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जेनेरिक क्रांति: सेमाग्लूटाइड पेटेंट खत्म होते ही भारतीय फार्मा कंपनियों ने घटाई वजन घटाने की दवा की कीमतें

SamacharToday.co.in - जेनेरिक क्रांति सेमाग्लूटाइड पेटेंट खत्म होते ही - Image Credited by The Times of India

नई दिल्ली — भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव के तहत, 20 मार्च 2026 को नोवो नॉर्डिस्क (Novo Nordisk) का पेटेंट समाप्त होते ही प्रमुख घरेलू दवा कंपनियों ने सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) के जेनेरिक संस्करण लॉन्च कर दिए हैं।

सन फार्मा, टोरेंट, ज़ायडस, डॉ. रेड्डीज, ग्लेनमार्क और अल्केम जैसी दिग्गज कंपनियों ने एक साथ बाजार में उतरकर इस “वेट-लॉस थेरेपी” की लागत को भारी मात्रा में कम कर दिया है, जो अब तक भारतीय मरीजों के लिए काफी महंगी थी।

कीमतों में भारी गिरावट

जेनेरिक दवाओं के आने से उपचार की लागत में 60% से 90% तक की कमी आई है:

महत्व: मधुमेह और मोटापे के खिलाफ बड़ी राहत

भारत वर्तमान में मधुमेह (Diabetes) की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, जहां 10 करोड़ (100 मिलियन) से अधिक लोग इस बीमारी के साथ जी रहे हैं। सेमाग्लूटाइड रक्त शर्करा को नियंत्रित करने और भूख कम करने में मदद करता है, जिससे वजन घटाने में आसानी होती है। इन सस्ती दवाओं के आने से अब यह इलाज केवल अमीरों तक सीमित नहीं रहेगा।

वैश्विक संदर्भ और भविष्य

भारत दुनिया का पहला बड़ा बाजार है जहां सेमाग्लूटाइड का पेटेंट समाप्त हुआ है (अमेरिका और यूरोप में यह 2030 तक सुरक्षित है)। सन फार्मा के एमडी कीर्ति गणोरकर ने कहा, “हमारा प्रयास भारतीय मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाला और किफायती इलाज प्रदान करना है।” इसके लिए कंपनियां मरीजों को दवा के सही उपयोग के लिए विशेष ‘पेशेंट सपोर्ट प्रोग्राम’ भी शुरू कर रही हैं।

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