मुंबई – भारतीय शेयर बाजारों में मंगलवार को भारी गिरावट देखी गई, क्योंकि प्रमुख सूचकांकों ने जनवरी 2026 के तीसरे सप्ताह में भी अपनी गिरावट का सिलसिला जारी रखा। घरेलू निवेशकों का मनोबल काफी कमजोर रहा, जिस पर विदेशी फंडों की निकासी, आईटी (IT) क्षेत्र में भारी बिकवाली और अमेरिका-यूरोप के बीच बढ़ते व्यापार युद्ध का गहरा असर पड़ा।
दोपहर तक, एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स 611.84 अंक या 0.74% गिरकर 82,634.34 पर आ गया। वहीं, एनएसई निफ्टी50 213.30 अंक या 0.83% गिरकर 25,372.20 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। यह गिरावट 2025 से चली आ रही सुस्ती का ही विस्तार है, जिसमें भारतीय बाजार अपने वैश्विक समकक्षों की तुलना में काफी पीछे रहे थे।
आईटी क्षेत्र में भारी गिरावट
मंगलवार की गिरावट का मुख्य कारण आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में हुई बिकवाली थी। निफ्टी आईटी इंडेक्स लगभग 2% गिर गया। निवेशकों को डर है कि पश्चिम में बदलती व्यापार नीतियों के कारण कंपनियां अपने खर्चों में कटौती कर सकती हैं।
एलटीआईमाइंडट्री (LTIMindtree) में 6.53% की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। विप्रो, टेक महिंद्रा और एम्फेसिस के शेयर भी 2% से अधिक टूट गए। टीसीएस (TCS) और इंफोसिस जैसे दिग्गज शेयरों में भी क्रमशः 1.46% और 1.01% की गिरावट दर्ज की गई।
ग्रीनलैंड टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितता
घरेलू कारकों के अलावा, “ग्रीनलैंड विवाद” ने वैश्विक व्यापार परिदृश्य को धुंधला कर दिया है। ग्रीनलैंड के अधिग्रहण को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच जारी टैरिफ युद्ध ने निवेशकों को घबरा दिया है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयाकुमार ने स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा:
“निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। जब तक ग्रीनलैंड टैरिफ पर अमेरिका-यूरोप गतिरोध स्पष्ट नहीं होता, तब तक अनिश्चितता बनी रहेगी। दोनों पक्षों ने कड़ा रुख अपनाया है, जिससे पता चलता है कि समाधान जल्द होने वाला नहीं है। इसके अलावा, बाजार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है; यदि फैसला ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ आता है, तो बाजार का मूड तेजी से बदल सकता है।”
इसके साथ ही, भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते पर कोई प्रगति न होना भी चिंता का विषय बना हुआ है।
विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली
बाजार की कमजोरी का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली है। जनवरी 2026 के शुरुआती 20 दिनों में, FII ने 29,315.22 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं।
हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने इसी अवधि में 38,311.01 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की है, लेकिन विदेशी फंडों की निकासी का दबाव इतना अधिक है कि घरेलू निवेश इसे पूरी तरह संतुलित नहीं कर पाया।
क्षेत्रीय प्रदर्शन और बाजार की स्थिति
बेंचमार्क सूचकांकों के गिरने के बावजूद, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.89% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.17% की बढ़त दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि निवेशक अब बड़ी कंपनियों के बजाय घरेलू स्तर पर केंद्रित मध्यम आकार की कंपनियों में मूल्य तलाश रहे हैं।
अन्य क्षेत्रों की स्थिति:
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निफ्टी रियल्टी: सबसे अधिक 4.49% की गिरावट।
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निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: 2.33% की गिरावट।
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निफ्टी ऑटो और पीएसयू बैंक: क्रमशः 1.28% और 1.26% की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए।
आगे की राह
दलाल स्ट्रीट के लिए 2026 की शुरुआत कठिन रही है। अब सबकी नजरें वॉशिंगटन और ब्रुसेल्स से आने वाली खबरों पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका-भारत व्यापार समझौता गति नहीं पकड़ता या विदेशी निवेशकों की बिकवाली नहीं रुकती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। निवेशकों के लिए फिलहाल “रुको और देखो” की रणनीति ही सबसे उपयुक्त मानी जा रही है।
