दावोस, स्विट्जरलैंड — एक बड़े भू-राजनीतिक तनाव को कम करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को यूरोपीय सहयोगियों पर प्रस्तावित टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने के फैसले को वापस ले लिया। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान हुई इस घोषणा ने एक संभावित वैश्विक व्यापार युद्ध को टाल दिया है। यह निर्णय नाटो (NATO) प्रमुख मार्क रट के साथ आर्कटिक सुरक्षा और ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति पर हुए एक नए समझौते के बाद आया है।
ट्रंप प्रशासन पिछले कई महीनों से डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को खरीदने या उस पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहा था। इस मांग को पूरा न करने पर अमेरिका ने डेनमार्क, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी सहित आठ देशों से आने वाले सामानों पर 10% से 25% तक का भारी शुल्क लगाने की धमकी दी थी।
‘साइप्रस मॉडल’ पर समझौता
खबरों के मुताबिक, यह समझौता “संप्रभु सैन्य आधार” (Sovereign Base Areas) के मॉडल पर आधारित है। डेनमार्क ने ग्रीनलैंड को बेचने से साफ इनकार कर दिया था, लेकिन नए ढांचे के तहत अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों पर पूर्ण अधिकार क्षेत्र मिल जाएगा। इसका मतलब है कि ग्रीनलैंड की जमीन तो डेनमार्क की ही रहेगी, लेकिन वहां स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अमेरिकी क्षेत्र की तरह माना जाएगा।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, “हमने ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र के संबंध में भविष्य के सौदे का एक ढांचा तैयार कर लिया है। इस समझ के आधार पर, मैं 1 फरवरी से लागू होने वाले टैरिफ को नहीं लगाऊंगा।”
इस समझौते में “गोल्डन डोम” नामक एक नई मिसाइल रक्षा प्रणाली भी शामिल है, जिसे अमेरिका आर्कटिक में तैनात करना चाहता है। नाटो सहयोगियों ने रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रखने के लिए समुद्री गश्त बढ़ाने पर भी सहमति जताई है।
नाटो और यूरोपीय नेताओं की प्रतिक्रिया
इस घोषणा से वैश्विक बाजारों ने राहत की सांस ली है। नाटो महासचिव मार्क रट ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि आर्कटिक की सुरक्षा सभी सहयोगियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
नाटो महासचिव मार्क रट ने कहा, “यह हमारे गठबंधन को परिभाषित करने वाले विश्वास को बहाल करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हमने पुष्टि की है कि आर्कटिक की सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है। हालांकि ग्रीनलैंड की संप्रभुता डेनमार्क के पास ही रहेगी, लेकिन हम सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक रास्ते खोज रहे हैं।”
हालांकि, कुछ यूरोपीय नेता अभी भी सतर्क हैं। डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि हालांकि ट्रंप द्वारा सैन्य बल के उपयोग को खारिज करना उत्साहजनक है, लेकिन क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होना चाहिए।
ग्रीनलैंड का रणनीतिक महत्व
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण आवश्यक है। ग्रीनलैंड खनिजों के विशाल भंडार और सामरिक स्थिति के कारण अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
2025 की शुरुआत में, ट्रंप ने इसे “पूरी तरह से खरीदने” का प्रस्ताव दिया था, जिसे डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकार ने “हास्यास्पद” बताकर खारिज कर दिया था। मौजूदा “आर्कटिक कमांड एक्सपेंशन” (ACE) ढांचे को एक बीच के रास्ते के रूप में देखा जा रहा है, जिससे अमेरिका को सुरक्षा अधिकार मिल जाएंगे और डेनमार्क की सीमाएं भी सुरक्षित रहेंगी।
दावोस में अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी थी कि अगर यह व्यापार युद्ध शुरू होता, तो दुनिया मंदी की चपेट में आ सकती थी। फिलहाल के लिए, “दावोस राहत” ने इस संकट को टाल दिया है, लेकिन भविष्य की बातचीत अभी भी जारी रहेगी।
