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नासा का हाई अलर्ट: पृथ्वी से टकराएगा सौर तूफान, भारत में दिख सकता है दुर्लभ अरोरा

नासा का हाई अलर्ट पृथ्वी से टकराएगा सौर तूफान, भारत में दिख सकता है दुर्लभ अरोरा - SamacharToday.co.in

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने पृथ्वी की ओर बढ़ रहे एक शक्तिशाली सौर तूफान को लेकर हाई अलर्ट जारी किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य से निकला एक विशाल कोरोनल मास इजेक्शन (CME) पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराने वाला है, जिसके चलते G3 श्रेणी का मजबूत भू-चुंबकीय तूफान उत्पन्न हो सकता है। इस खगोलीय घटना के कारण दुनिया के कई हिस्सों में दुर्लभ अरोरा दिखाई देने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक यह सौर तूफान लगभग 1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में अस्थायी उथल-पुथल हो सकती है, जिसका असर संचार प्रणालियों, सैटेलाइट नेटवर्क और जीपीएस सेवाओं पर देखने को मिल सकता है।

इस घटना की सबसे खास बात यह है कि शक्तिशाली भू-चुंबकीय गतिविधियों के कारण भारत के कुछ हिस्सों में भी अरोरा दिखाई देने की संभावना बनी हुई है। सामान्य परिस्थितियों में अरोरा केवल ध्रुवीय क्षेत्रों जैसे अलास्का, कनाडा, नॉर्वे और आइसलैंड में दिखाई देता है, लेकिन इस बार सौर गतिविधि इतनी प्रबल मानी जा रही है कि इसका प्रभाव कम अक्षांश वाले क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि भारत में लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में साफ मौसम की स्थिति में हरे, लाल और बैंगनी रंगों की रोशनी आसमान में दिखाई दे सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अरोरा देखने के लिए रात के समय कम रोशनी वाले क्षेत्रों का चयन करना बेहतर होगा।

हालांकि इस प्रकार का सौर तूफान मनुष्यों के लिए सीधे तौर पर खतरनाक नहीं माना जाता, लेकिन आधुनिक तकनीकी ढांचे पर इसका असर पड़ सकता है। अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों के संचालन में व्यवधान आने की संभावना रहती है, जबकि जीपीएस सेवाओं की सटीकता भी अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा विमानन और समुद्री संचार में उपयोग होने वाली हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो तरंगों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। कुछ क्षेत्रों में रेडियो संचार कमजोर होने या अस्थायी रूप से बाधित होने की आशंका जताई गई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक भू-चुंबकीय गतिविधियों के दौरान बिजली ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ सकता है।

अंतरिक्ष वैज्ञानिक लगातार इस सौर तूफान की निगरानी कर रहे हैं और इसके प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो भारत समेत कई देशों के लोगों को रात के आसमान में दुर्लभ और रंग-बिरंगा अरोरा देखने का अवसर मिल सकता है।

फिलहाल वैज्ञानिक एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और तकनीकी संस्थानों को संभावित प्रभावों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है। यह घटना अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) से जुड़ी सबसे चर्चित घटनाओं में से एक मानी जा रही है।

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