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निफ्टी 25,800 के समर्थन पर, बैंक निफ्टी में मंदी

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भारतीय शेयर बाजारों ने मध्य-सप्ताह के कारोबारी सत्र की सतर्क शुरुआत की, क्योंकि बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी 50 और बैंक निफ्टी एक महत्वपूर्ण ‘कंसोलिडेशन’ (स्थिरीकरण) चरण में प्रवेश कर गए हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निरंतर बिकवाली और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच, निवेशक इस बात पर पैनी नजर रख रहे हैं कि क्या निफ्टी 50 खुद को 25,800 के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर से ऊपर बनाए रख पाएगा।

बाजार की स्थिति और संस्थागत प्रवाह

वर्तमान में बाजार “हर तेजी पर बिकवाली” (sell-on-rise) की भावना से प्रेरित दिख रहा है। 16 दिसंबर को निफ्टी 50 में 167 अंकों (0.64%) की गिरावट आई और यह 25,860 पर बंद हुआ, जबकि बैंक निफ्टी 427 अंक (0.72%) गिरकर 59,035 पर आ गया। शेयर बाजार में गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों की तुलना में काफी अधिक रही।

बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती FII द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और भारतीय रुपये के 91 के ऐतिहासिक निचले स्तर को पार करने के कारण विदेशी निवेशक पूंजी निकाल रहे हैं। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी ने बाजार को बड़े नुकसान से बचाने में मदद की है।

निफ्टी 50: महत्वपूर्ण स्तर

तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी 50 अपने अल्पकालिक औसत (moving averages) से नीचे गिर गया है। वेव्स स्ट्रैटेजी एडवाइजर्स के संस्थापक और सीईओ आशीष क्याल का कहना है, “निफ्टी ऊंचे स्तरों पर संघर्ष कर रहा है। 25,830 से नीचे जाने पर कीमतें 25,760-25,728 की ओर बढ़ सकती हैं, जब तक कि यह 26,060 के प्रतिरोध स्तर को पार न कर ले।”

विशेषज्ञों के अनुसार, 25,800–25,834 का क्षेत्र निफ्टी के लिए तत्काल “करो या मरो” वाला क्षेत्र है। यदि सूचकांक इन स्तरों को नहीं बचा पाता है, तो अगला बड़ा समर्थन 25,700 पर है। वहीं, ऊपर की ओर 26,050–26,100 का स्तर एक बड़ी बाधा के रूप में कार्य करेगा।

बैंक निफ्टी: रक्षात्मक रुख

बैंक निफ्टी ने हाल के सत्रों में व्यापक बाजार की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है। इस महीने की शुरुआत में 60,114 के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर को छूने के बाद, अब यह 58,800 से 59,800 के दायरे में घूम रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि बैंक निफ्टी को 58,800 के स्तर की रक्षा करनी होगी। यदि यह स्तर टूटता है, तो सूचकांक 58,500 तक गिर सकता है। ऊपर की ओर 59,300 का स्तर प्रमुख प्रतिरोध बना हुआ है।

निष्कर्ष

भारतीय बाजार इस समय वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू मजबूती के बीच फंसे हुए हैं। जहां एक ओर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां और भारत-अमेरिका व्यापार सौदे को लेकर अनिश्चितता विदेशी निवेशकों को सतर्क कर रही है, वहीं दूसरी ओर घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और एसआईपी (SIP) के जरिए आ रहा पैसा बाजार को सहारा दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि साल के अंत में ‘बुक क्लोजर’ और ‘एक्सपायरी’ के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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