टेक्सास के फ्रिस्को में नगर परिषद (City Council) की गरमागरम बैठकों की एक श्रृंखला ने H-1B वीजा कार्यक्रम और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सांस्कृतिक एकीकरण पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। एक युवा भारतीय-अमेरिकी निवासी, नेहा सुरत्रन, उन प्रमुख आवाजों में से एक बनकर उभरी हैं, जो उस “गलत सूचना और डर” के नैरेटिव का विरोध कर रही हैं, जिसने हाल ही में डलास के इस तेजी से बढ़ते उपनगर में स्थानीय चर्चा को प्रभावित किया है।
यह विवाद उन अमेरिकी नगर पालिकाओं में गहराते घर्षण को उजागर करता है जहाँ हाई-टेक क्षेत्र के कारण तेजी से जनसांख्यिकीय बदलाव हुए हैं। 2016 से टेक्सास में रह रही सुरत्रन ने परिषद के सामने तर्क दिया कि फ्रिस्को का अमेरिका के सबसे सुरक्षित शहरों में से एक होना विविधता के बावजूद नहीं, बल्कि उन समुदायों के योगदान के कारण है जो इसे अपना घर कहते हैं।
‘इंडियन टेकओवर’ (भारतीय कब्जे) के नैरेटिव को चुनौती
H-1B वीजा, जो अमेरिकी नियोक्ताओं को विशेषज्ञ व्यवसायों में विदेशी श्रमिकों को अस्थायी रूप से नियुक्त करने की अनुमति देता है, स्थानीय शिकायतों का केंद्र बन गया है। हालिया बैठकों में आलोचकों ने “भारतीय कब्जे” की आशंका जताई है और इस वीजा कार्यक्रम को आवास की कमी और सांस्कृतिक विस्थापन से जोड़ा है।
सुरत्रन ने इन दावों का जवाब अनुभवजन्य आंकड़ों (empirical data) से दिया:
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उन्होंने नोट किया कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय में शिक्षा और आय का स्तर लगातार उच्च रहता है, जबकि अपराध दर काफी कम है।
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उन्होंने परिषद से कहा, “फ्रिस्को सबसे सुरक्षित शहरों में से एक है, और यह विविधता या भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बावजूद नहीं, बल्कि उनके साथ रहते हुए है।”
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सांस्कृतिक तालमेल पर उन्होंने एक मार्मिक टिप्पणी की: “हिंदू भारतीय-अमेरिकी समुदाय क्रिसमस और थैंक्सगिविंग भी मनाता है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि “हिंदू धर्म धर्मांतरण नहीं करता है।”
आर्थिक और नियामक वास्तविकता
फ्रिस्को बहस में विवाद का एक मुख्य बिंदु H-1B प्रणाली का कथित दुरुपयोग है। हालांकि, सुरत्रन ने बताया कि शहर की सीमाओं के भीतर H-1B धोखाधड़ी की कोई सत्यापित रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने परिषद को याद दिलाया कि नगर पालिकाओं का संघीय आव्रजन कानूनों (Federal Immigration Laws) पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
सुरत्रन ने कहा, “लोग तथ्यों की पुष्टि किए बिना ग्रुप चैट और वायरल पोस्ट के आधार पर मजबूत राय बना रहे हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि H-1B कार्यक्रम वैश्विक प्रतिभाओं के लिए एक “चयनात्मक और प्रतिस्पर्धी” प्रवेश द्वार है, जो उस समय आवश्यक है जब कम घरेलू छात्र STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
फ्रिस्को का जनसांख्यिकीय परिवर्तन
पिछले दो दशकों में फ्रिस्को एक छोटे ग्रामीण शहर से एक प्रमुख टेक हब में बदल गया है। अमेरिकी जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, फ्रिस्को में एशियाई आबादी—जो मुख्य रूप से आईटी और चिकित्सा क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों द्वारा संचालित है—बढ़कर शहर के निवासियों का लगभग 20% हो गई है।
तथ्य-आधारित चर्चा की लड़ाई
जैसे-जैसे बहस जारी है, सुरत्रन और साहिल कौल जैसे निवासियों की गवाही 21वीं सदी के अमेरिकी “मेल्टिंग पॉट” (Melting Pot) की जटिलताओं की याद दिलाती है। वायरल गलत सूचनाओं के बजाय सत्यापित तथ्यों पर लौटने की मांग करके, फ्रिस्को में भारतीय-अमेरिकी समुदाय खुद को केवल “विदेशी श्रमिकों” के रूप में नहीं, बल्कि शहर के भविष्य के अभिन्न हिस्से के रूप में पहचान दिलाने पर जोर दे रहा है।
