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भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता: भारतीय छात्रों के लिए नए अवसर

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ऐसे समय में जब कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे पारंपरिक देश अपनी प्रवासन नीतियों को सख्त कर रहे हैं, भारतीय छात्रों के लिए एक नया क्षितिज खुल गया है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में संपन्न हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने भारतीय प्रतिभाओं के लिए “न्यूजीलैंड” को एक प्रमुख विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया है। इस समझौते के तहत पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा (पढ़ाई के बाद काम करने का वीजा) को उदार बनाया गया है और रोजगार के नए रास्ते खोले गए हैं।

22 दिसंबर, 2025 को घोषित यह समझौता ऐतिहासिक है क्योंकि यह पहली बार है जब न्यूजीलैंड ने किसी देश के साथ छात्र गतिशीलता और कार्य अधिकारों पर एक समर्पित अनुबंध (Annexure) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता न्यूजीलैंड को वैश्विक शिक्षा बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में पेश करता है।

वर्क वीजा के नए नियम: छात्रों को क्या मिलेगा?

इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि पढ़ाई के बाद मिलने वाले वर्क वीजा की अवधि में विस्तार है। भारतीय परिवारों के लिए विदेश में शिक्षा का निवेश करते समय ‘स्थायित्व’ सबसे महत्वपूर्ण होता है। नए नियमों के अनुसार:

इसके अलावा, भारतीय छात्रों की संख्या पर लगी सीमाओं को हटा दिया गया है और उन्हें पढ़ाई के दौरान प्रति सप्ताह 20 घंटे काम करने का कानूनी अधिकार दिया गया है।

पीयूष गोयल का बयान: “निश्चितता और स्थिरता”

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को दोनों देशों के लिए लाभकारी बताया है। उन्होंने नई दिल्ली में एक ब्रीफिंग के दौरान कहा:

“यह समझौता छात्रों के काम करने के अधिकारों को सुरक्षित करता है और पढ़ाई के बाद स्पष्ट रास्ते बनाता है। यह उन परिवारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो विदेशी शिक्षा में निवेश करते हैं। यह केवल वस्तुओं का व्यापार नहीं है; यह प्रतिभा का आदान-प्रदान और दो जीवंत समाजों को जोड़ने का माध्यम है।”

पेशेवरों के लिए ‘स्किल्ड एम्प्लॉयमेंट पाथवे’

यह समझौता केवल छात्रों तक सीमित नहीं है। इसमें ‘स्किल्ड एम्प्लॉयमेंट पाथवे’ नाम का एक नया कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत 5,000 भारतीय पेशेवरों को एक समय में तीन साल तक न्यूजीलैंड में काम करने की अनुमति दी जाएगी।

इस योजना में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है जहाँ न्यूजीलैंड में प्रतिभा की कमी है, जैसे:

  1. आईटी विशेषज्ञ: न्यूजीलैंड के तकनीकी क्षेत्र को मजबूती देने के लिए।

  2. स्वास्थ्य देखभाल: विशेष रूप से नर्सों के लिए।

  3. पारंपरिक क्षेत्र: योग प्रशिक्षक और रसोइये (Chefs)।

इसके साथ ही, हर साल 1,000 युवा भारतीयों को ‘वर्किंग हॉलिडे वीजा’ दिया जाएगा, जिससे वे 12 महीने तक न्यूजीलैंड में घूमते हुए काम का अनुभव ले सकेंगे।

बदलता वैश्विक परिदृश्य

पिछले 18 महीनों में कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों ने विदेशी छात्रों के लिए नियमों को कड़ा किया है। ऐसे में न्यूजीलैंड ने अपनी आठों सरकारी यूनिवर्सिटीज (जो दुनिया की शीर्ष 3% में शामिल हैं) के जरिए भारतीय छात्रों को एक सुरक्षित और आकर्षक विकल्प दिया है। वर्तमान में न्यूजीलैंड में लगभग 12,000 भारतीय छात्र हैं, और विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन वर्षों में यह संख्या दोगुनी हो सकती है।

दवा और स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग

पहली बार, न्यूजीलैंड ने भारतीय फार्मास्युटिकल उत्पादों के लिए ‘फास्ट-ट्रैक अप्रूवल’ तंत्र पर सहमति व्यक्त की है। इससे न्यूजीलैंड में जेनेरिक दवाओं की लागत कम होगी और सिप्ला तथा सन फार्मा जैसी भारतीय कंपनियों को एक बड़ा बाजार मिलेगा। साथ ही, आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भी न्यूजीलैंड के नियामक ढांचे में मान्यता दी जाएगी।

एक मजबूत भविष्य की नींव

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए आधुनिक अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह स्वीकार करता है कि 21वीं सदी में ‘मानव पूंजी’ का महत्व भौतिक पूंजी से कम नहीं है। शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़कर, न्यूजीलैंड ने भारतीय युवाओं के लिए एक स्पष्ट और उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया है।

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