वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग में हाइब्रिड तकनीक को लेकर तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। भारत में भी हाइब्रिड कारों की मांग बढ़ रही है, क्योंकि ये लंबी दूरी की यात्रा के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की तुलना में अधिक व्यावहारिक मानी जा रही हैं। हाल ही में Geely Auto ने AI आधारित i-HEV हाइब्रिड तकनीक पेश की, जिसने 45 किमी प्रति लीटर से अधिक का माइलेज हासिल किया। इस उपलब्धि को Guinness World Records द्वारा मान्यता दी गई है। टेस्ट के दौरान इस तकनीक ने 100 किमी की दूरी तय करने के लिए मात्र 2.22 लीटर ईंधन का उपयोग किया।
भारत में हाइब्रिड कारों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2029 तक इनका मार्केट शेयर 13% से 16% तक पहुंच सकता है। वर्तमान में कई प्रमुख हाइब्रिड मॉडल उपलब्ध हैं।
Maruti Suzuki Grand Vitara मिड-सेगमेंट में एक लोकप्रिय विकल्प है, जबकि Toyota Urban Cruiser Hyryder अपने मजबूत हाइब्रिड सिस्टम के लिए जानी जाती है। वहीं Toyota Innova Hycross प्रीमियम सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प बनी हुई है। आने वाले समय में कई नई हाइब्रिड कारें लॉन्च होने वाली हैं। Renault Duster का हाइब्रिड वर्जन, Nissan Tekton और Honda Elevate का हाइब्रिड संस्करण बाजार में आने की उम्मीद है। इसके अलावा JSW Motors Jetour T2 प्लेटफॉर्म पर आधारित प्लग-इन हाइब्रिड एसयूवी लाने की तैयारी कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाइब्रिड कारें उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हैं जो बिना चार्जिंग की चिंता के अच्छा माइलेज और कम प्रदूषण चाहते हैं। ऑटोकार इंडिया के संपादक होरमज़्द सोराबजी ने कहा, “हाइब्रिड कारें भारतीय बाजार के लिए सबसे व्यावहारिक ग्रीन समाधान हैं।”
हालांकि, हाइब्रिड कारों को इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में कम टैक्स लाभ मिलता है और भविष्य में बैटरी बदलने की लागत एक चुनौती हो सकती है। फिर भी, तकनीकी प्रगति और बढ़ती मांग को देखते हुए हाइब्रिड कारों का भविष्य उज्ज्वल माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या हाइब्रिड कारें पारंपरिक और इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच संतुलन बना पाती हैं या नहीं।
