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भारत-यूके CETA लागू, निर्यात और निवेश को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

भारत-यूके CETA लागू, निर्यात और निवेश को मिलेगा बड़ा बढ़ावा - SamacharToday.co.in

भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement-CETA) आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इस समझौते को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। सरकार के अनुसार, यह समझौता भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में व्यापक पहुंच प्रदान करेगा, शुल्क बाधाओं को कम करेगा, सेवा क्षेत्र में नए अवसर खोलेगा और पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाएगा। इसके साथ ही कृषि, वस्त्र, इंजीनियरिंग, दवा, खाद्य प्रसंस्करण, समुद्री उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे कई क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, भारत-यूके CETA एक आधुनिक और व्यापक व्यापार समझौता है, जिसके तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटेन में शून्य सीमा शुल्क (Zero Duty) का लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, विदेशी निवेश आकर्षित होगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

द्विपक्षीय व्यापार को मिलेगी नई गति

भारत और ब्रिटेन लंबे समय से महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार रहे हैं। वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 25.12 अरब अमेरिकी डॉलर का वस्तु व्यापार दर्ज किया गया। इसमें भारत का निर्यात 13.44 अरब डॉलर और आयात 11.68 अरब डॉलर रहा, जिससे भारत को 1.76 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष प्राप्त हुआ।

सेवा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग देखने को मिला। वर्ष 2024 में सेवाओं का कुल व्यापार 35.44 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत ने 21.66 अरब डॉलर की सेवाओं का निर्यात किया, जबकि 13.78 अरब डॉलर की सेवाओं का आयात किया। इससे भारत को 7.88 अरब डॉलर का अधिशेष प्राप्त हुआ।

किसानों, MSME और उद्योगों को होगा सीधा लाभ

सरकार के अनुसार, इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ किसानों, मछुआरों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और श्रम-प्रधान उद्योगों को मिलेगा। कृषि और समुद्री उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच मिलने से निर्यात बढ़ने की संभावना है।

टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, प्लास्टिक, ऑटो कंपोनेंट, रसायन उद्योग और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों को भी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। वहीं, डिजिटल कस्टम प्रक्रिया, पेपरलेस ट्रेड और आसान अनुपालन व्यवस्था से एमएसएमई की लागत कम होगी और वैश्विक बाजार तक उनकी पहुंच आसान बनेगी।

संवेदनशील क्षेत्रों को दिया गया संरक्षण

सरकार ने स्पष्ट किया है कि बाजार खोलने के साथ-साथ भारत के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। भारत ने 89.5 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर रियायतें दी हैं, जबकि डेयरी, अनाज, दालें, खाद्य तेल, सेब और कुछ रणनीतिक विनिर्माण क्षेत्रों को संरक्षण दिया गया है।

ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी चरणबद्ध और कोटा आधारित उदारीकरण अपनाया गया है, जिससे छोटे और मध्यम श्रेणी के वाहनों तथा किफायती इलेक्ट्रिक वाहनों के घरेलू उद्योग पर तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

कई क्षेत्रों में बढ़ेगा निर्यात

समझौते के तहत टेक्सटाइल क्षेत्र को 1,143 टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बांग्लादेश, पाकिस्तान और कंबोडिया जैसे देशों के मुकाबले मजबूत होगी।

कृषि क्षेत्र में 1,437 टैरिफ लाइनों पर शुल्क समाप्त होने से अगले तीन वर्षों में कृषि निर्यात में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि का अनुमान है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को 985 टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क मिलेगा।

चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग का ब्रिटेन को निर्यात 900 मिलियन डॉलर से अधिक पहुंच सकता है। इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात 2029-30 तक बढ़कर 7.5 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।

इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, ऑप्टिकल फाइबर, आईटी सेवाएं, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, प्लास्टिक, खेल सामग्री, खिलौने और रत्न एवं आभूषण उद्योगों को भी इस समझौते से बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।

भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी राहत

भारत-यूके CETA का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) है। इसके तहत ब्रिटेन में 60 महीने तक कार्यरत भारतीय पेशेवरों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Social Security Contribution) नहीं देना होगा।

सरकार के अनुसार, इससे 75 हजार से अधिक भारतीय पेशेवरों और लगभग 900 भारतीय कंपनियों को हर वर्ष 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की बचत होगी।

इसके अलावा दोनों देशों ने नर्सिंग, अकाउंटेंसी और आर्किटेक्चर जैसी पेशेवर योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition Agreement) पर भी सहमति जताई है, जिससे भारतीय पेशेवरों के लिए ब्रिटेन में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

निवेश और भविष्य की साझेदारी होगी मजबूत

ब्रिटेन भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का छठा सबसे बड़ा स्रोत है। सितंबर 2024 तक ब्रिटेन से भारत में 35 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश आ चुका है, जबकि मार्च 2024 तक भारतीय कंपनियों ने ब्रिटेन में 19 अरब डॉलर का निवेश किया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 तक 971 भारतीय कंपनियां ब्रिटेन में कार्यरत हैं, जो एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार दे रही हैं। वहीं भारत में 667 ब्रिटिश कंपनियां संचालित हैं, जिनमें पांच लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं।

सरकार का कहना है कि भारत-यूके CETA केवल व्यापार समझौता नहीं बल्कि भविष्य की आर्थिक साझेदारी का मजबूत आधार है, जो व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग, नवाचार और पेशेवर गतिशीलता को नई दिशा देगा, साथ ही भारत के दीर्घकालिक विकास हितों की भी रक्षा करेगा।

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