भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2026 में रुपये को स्थिर रखने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप किया। केंद्रीय बैंक ने स्पॉट फॉरेक्स मार्केट में कुल 8.94 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री (Net Sale) की। यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब भारतीय रुपया वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण भारी दबाव का सामना कर रहा था।
आरबीआई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में केंद्रीय बैंक ने 16.23 अरब डॉलर की खरीदारी की, जबकि 25.17 अरब डॉलर की बिक्री की। इस प्रकार कुल मिलाकर 8.94 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री दर्ज की गई। इससे पहले मार्च 2026 में भी आरबीआई ने लगभग 9.8 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री कर रुपये को समर्थन देने की कोशिश की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा। इसी दौरान भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 96.96 तक पहुंच गई थी। हालांकि बाद में बाजार में कुछ स्थिरता लौटने के साथ रुपये में सुधार देखने को मिला।
आर्थिक जानकारों के अनुसार, आरबीआई का यह हस्तक्षेप बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए किया गया। जब किसी देश की मुद्रा पर अचानक दबाव बढ़ता है, तब केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर डॉलर बेचता है ताकि स्थानीय मुद्रा को समर्थन मिल सके और विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव न आए।
इस बीच आरबीआई ने अपने स्वर्ण भंडार को लेकर चल रही अटकलों को भी खारिज किया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि उसके पास मौजूद भौतिक सोने का भंडार स्थिर बना हुआ है। अप्रैल के अंत तक भारत के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना सुरक्षित था। इससे पहले कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि आरबीआई ने अपने स्वर्ण भंडार का कुछ हिस्सा बेचा है, लेकिन केंद्रीय बैंक ने इन अटकलों को गलत बताया।
विदेशी मुद्रा बाजार में तत्काल हस्तक्षेप के अलावा आरबीआई फॉरवर्ड मार्केट में भी सक्रिय रहा। अप्रैल के अंत तक केंद्रीय बैंक की नेट आउटस्टैंडिंग फॉरवर्ड डॉलर बिक्री 95.30 अरब डॉलर रही। यह मार्च के अंत में दर्ज 103.06 अरब डॉलर की तुलना में कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकेत देता है कि केंद्रीय बैंक धीरे-धीरे अपने फॉरवर्ड पोजिशन को संतुलित कर रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि भारत की विदेशी मुद्रा स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर रखना जरूरी होगा। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा और अंतरराष्ट्रीय निवेश प्रवाह आने वाले महीनों में रुपये की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल आरबीआई के ताजा आंकड़े यह दिखाते हैं कि केंद्रीय बैंक भारतीय मुद्रा की स्थिरता बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां और अधिक चुनौतीपूर्ण होती हैं, तो आने वाले समय में भी आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप जारी रख सकता है ताकि रुपये में अत्यधिक कमजोरी को रोका जा सके।
