Samachar Today

लैब तकनीशियन से क्रिकेट स्टार तक: जेडन लेनोक्स की अनूठी कहानी

SamacharToday.co.in - लैब तकनीशियन से क्रिकेट स्टार तक जेडन लेनोक्स की अनूठी कहानी - Image Credited by The Financial Express

पेशेवर खेलों के आधुनिक युग में, अधिकांश अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर विशिष्ट और उच्च-प्रदर्शन वाली अकादमियों की उपज होते हैं, जिनका भविष्य किशोरावस्था में पहुंचने से पहले ही तय कर दिया जाता है। हालांकि, न्यूजीलैंड के उस स्पिनर ने, जिसने हाल ही में जारी एकदिवसीय श्रृंखला में भारत के दुर्जेय बल्लेबाजी क्रम को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, इस स्थापित मानदंड के विपरीत एक स्फूर्तिदायक और संघर्षपूर्ण मिसाल पेश की है।

31 वर्षीय बाएं हाथ के स्पिनर जेडन लेनोक्स ने अपने जीवन का शुरुआती हिस्सा आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं में नहीं बिताया। उनका लिंक्डइन प्रोफाइल—जो बाउंड्री की रस्सी के बाहर बिताए गए जीवन का एक डिजिटल प्रमाण है—गोल्फ कोर्स के ‘ग्रीन्सकीपर’, पशुधन उपकरण तकनीशियन और प्रयोगशाला तकनीशियन (लैब तकनीशियन) जैसी भूमिकाओं को सूचीबद्ध करता है। फिर भी, राजकोट की एक उमस भरी रात में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के इस डिप्लोमा धारक ने ही रोहित शर्मा और शुभमन गिल द्वारा पेश की गई जटिल चुनौतियों का समाधान खोज निकाला।

वास्तविक दुनिया के अनुभवों से बना एक बायोडाटा

अंतरराष्ट्रीय मंच तक लेनोक्स की यात्रा ‘देर से चमकने वाले’ (late bloomer) दर्शन का एक प्रमाण है। जब उनके साथी खिलाड़ी आकर्षक टी20 अनुबंध हासिल कर रहे थे, तब 25 साल की उम्र में लेनोक्स ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्र में घास काट रहे थे। बाद में, उन्होंने एक पर्यावरण परामर्श कंपनी ‘एक्वालिन’ (Aqualinc) के लिए काम किया और एक असेंबली तकनीशियन के रूप में कर्तव्यों का पालन किया। क्रिकेट उनके लिए एक जुनून था, लेकिन लंबे समय तक यह उनकी कमाई का जरिया नहीं बन पाया था।

उन्हें पेशेवर सफलता काफी देर से मिली। उन्होंने 2019 में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट्स के लिए अपनी ‘लिस्ट ए’ की शुरुआत की। इस पदोन्नति के बावजूद, घरेलू क्रिकेट की वित्तीय अस्थिरता का मतलब था कि उन्होंने अपने पेशेवर करियर के दौरान भी काफी समय तक अपनी पुरानी नौकरियाँ जारी रखीं। यह केवल 2023-24 के ‘सुपर स्मैश’ (न्यूजीलैंड की प्रमुख टी20 प्रतियोगिता) के दौरान था कि पूरी कहानी बदल गई। लेनोक्स ने 11 मैचों में 15.23 के अविश्वसनीय औसत के साथ 13 विकेट चटकाए, जिसने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को उनकी उम्र से परे जाकर उनकी सटीकता पर गौर करने के लिए मजबूर कर दिया।

राजकोट मास्टरक्लास: दिग्गजों पर लगाम

राजकोट में दूसरे एकदिवसीय मैच में प्रवेश करते समय, लेनोक्स को केवल एक ‘कमजोर कड़ी’ के रूप में देखा जा रहा था। भारतीय पिचें, जो स्पिनरों की मददगार मानी जाती हैं, अक्सर उन नवागंतुकों के लिए कठिन साबित होती हैं जो स्पिन को बेअसर करने के लिए कदमों का इस्तेमाल करने वाले स्थानीय उस्तादों का सामना करते हैं। पूरी श्रृंखला में भारत प्रति ओवर छह से अधिक रन बना रहा था, फिर भी लेनोक्स इससे विचलित नहीं हुए।

छोटे मैदानों पर गेंदबाजी करते हुए, लेनोक्स द्वारा पहले मैच में 10-0-42-1 और दूसरे में 10-0-42-2 का प्रदर्शन एक उच्च स्कोरिंग श्रृंखला में सांख्यिकीय रूप से असाधारण था। उन्होंने पावरप्ले और डेथ ओवरों में गेंदबाजी की और 20 ओवरों में केवल तीन बाउंड्री दीं। उनका रहस्य कोई जादुई टर्न नहीं था, बल्कि निरंतर और मशीन जैसा नियंत्रण था—शायद यह एक ऐसा कौशल था जिसे उन्होंने पशुधन फीडरों को ठीक करने के अपने वर्षों के दौरान हासिल किया था, जहाँ सटीकता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता था।

लेनोक्स ने अपने पदार्पण के बाद ईएसपीएनक्रिकइंफो (ESPNcricinfo) से कहा, “बस यह याद रखें कि यह केवल एक और खेल है। मैं हॉक्स बे की गलियों (cul-de-sac) में क्रिकेट खेलकर बड़ा हुआ हूं। यह बस उसी का एक भव्य रूप है।”

सफलता के पीछे का बलिदान

इस अचानक मिली प्रसिद्धि के पीछे एक दशक की अनिश्चितता छिपी है। लेनोक्स अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी और अपने क्लब, ‘नेपियर टेक’ को देते हैं, जिन्होंने तब उनके सपने को जीवित रखा जब पदार्पण के बजाय संन्यास लेना अधिक तार्किक विकल्प लग रहा था। एजाज पटेल जैसे स्थापित सितारों के खिलाफ जगह बनाने के लिए संघर्ष करते हुए, लेनोक्स ने अपनी दृढ़ता के माध्यम से सफेद गेंद के क्रिकेट में अपनी एक अलग जगह बनाई।

न्यूजीलैंड के मुख्य कोच गैरी स्टीड ने लेनोक्स को टीम में शामिल किए जाने पर टिप्पणी की:

“जेडन ने पिछले कुछ सत्रों में घरेलू सर्किट में लगातार प्रदर्शन के माध्यम से अपनी जगह बनाई है। दबाव में शांत रहने की उनकी क्षमता और पावरप्ले में नई गेंद के साथ उनका उच्च स्तर का कौशल उन्हें एक मूल्यवान खिलाड़ी बनाता है, विशेष रूप से भारत जैसी परिस्थितियों में।”

एक नया पदनाम

फरवरी 2025 तक, लेनोक्स ने सेंट्रल स्टैग्स को सुपर स्मैश जीतने में मदद की और गुयाना में ग्लोबल सुपर लीग में भी काफी प्रभावित किया। अब, 31 साल की उम्र में, उस व्यक्ति ने आखिरकार अपना बायोडाटा (resume) अपडेट कर लिया है जो कभी गोल्फ कोर्स की घास काटता था। अब वह एक तकनीशियन नहीं है जो क्रिकेट खेलता है; वह एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर है जिसके पास एक वैज्ञानिक का तकनीकी अनुशासन है। किशोर प्रतिभाओं की इस दुनिया में, लेनोक्स ने साबित कर दिया है कि एक “साधारण” बायोडाटा असाधारण परिणाम दे सकता है।

Exit mobile version