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विज्ञान और राजनीति का टकराव: डॉ. निशा वर्मा की सीनेट गवाही

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वैश्विक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वायरल हुई एक तीखी बहस में, भारतीय मूल की प्रसूति-स्त्री रोग विशेषज्ञ (OB/GYN) डॉ. निशा वर्मा अमेरिकी सीनेट की सुनवाई के दौरान एक वैचारिक विवाद के केंद्र में आ गईं। यह चर्चा मुख्य रूप से ‘गर्भपात की गोलियों’ (abortion pills) की सुरक्षा और विनियमन पर केंद्रित थी, लेकिन जल्द ही यह जैविक परिभाषाओं और लैंगिक पहचान के विवाद में बदल गई।

जॉर्जिया और मैसाचुसेट्स में अपनी सेवाएं देने वाली डॉ. वर्मा, सीनेट की स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम और पेंशन (HELP) समिति के सामने गवाही दे रही थीं। यह सुनवाई गर्भपात की दवा ‘मिफेप्रिस्टोन’ (mifepristone) के दुरुपयोग या जबरदस्ती के बारे में चिंताओं को दूर करने के लिए बुलाई गई थी। हालांकि, रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉली और सीनेटर एशले मूडी द्वारा डॉ. वर्मा से बार-बार एक ही सवाल पूछने पर ध्यान पूरी तरह भटक गया: “क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं?”

14 सवालों का गतिरोध

यह विवाद तब शुरू हुआ जब सीनेटर मूडी ने पहली बार यह सवाल उठाया, जिसके बाद सीनेटर हॉली ने लगातार वही प्रश्न दोहराया। गवाही के दौरान यह विशेष प्रश्न कुल 14 बार पूछा गया। डॉ. वर्मा ने लगातार “हाँ” या “नहीं” में सीधा उत्तर देने से इनकार कर दिया, जिससे गवाह और समिति के सदस्यों के बीच स्पष्ट तनाव पैदा हो गया।

सीनेटर हॉली ने तर्क दिया कि यह सवाल “बुनियादी जीव विज्ञान और विज्ञान” पर आधारित था, और उन्होंने डॉ. वर्मा पर एक विशेष सामाजिक विचारधारा के साथ तालमेल बिठाने के लिए तथ्यात्मक वास्तविकता से बचने का आरोप लगाया। इसके विपरीत, डॉ. वर्मा ने स्पष्ट किया कि उनकी झिझक वैज्ञानिक ज्ञान की कमी के कारण नहीं, बल्कि उस संदर्भ के कारण थी जिसमें यह सवाल पूछा जा रहा था।

डॉ. वर्मा ने समिति से कहा, “विज्ञान और साक्ष्य को चिकित्सा का मार्गदर्शन करना चाहिए। लेकिन मुझे यह भी लगता है कि इस तरह के हाँ या ना वाले सवाल राजनीतिक हथियार हैं। मैं अलग-अलग पहचान वाले मरीजों का इलाज करती हूँ, और मेरा लक्ष्य हर उस व्यक्ति को सहानुभूतिपूर्ण, साक्ष्य-आधारित देखभाल प्रदान करना है जो मेरे क्लिनिक में आता है।”

कौन हैं डॉ. निशा वर्मा?

उत्तरी कैरोलिना के ग्रीन्सबोरो में भारतीय अप्रवासी माता-पिता के घर जन्मी डॉ. निशा वर्मा की शैक्षणिक यात्रा असाधारण रही है। उनकी पृष्ठभूमि चिकित्सा के जैविक और सामाजिक दोनों पहलुओं के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

वर्तमान में, डॉ. वर्मा ‘अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्सटेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट’ (ACOG) में प्रजनन स्वास्थ्य नीति और वकालत के लिए वरिष्ठ सलाहकार के रूप में कार्य करती हैं।

वैज्ञानिक बनाम राजनीतिक दृष्टिकोण

सीनेट की सुनवाई में यह बहस इस बात को दर्शाती है कि चिकित्सा पेशेवर और कानून निर्माता लिंग (gender) और जैविक यौनिकता (biological sex) को कैसे अलग-अलग देखते हैं। सीनेटरों के लिए, इस बात को स्वीकार करने से इनकार करना कि जैविक पुरुष गर्भवती नहीं हो सकते, वस्तुनिष्ठ सत्य से विचलन माना गया। डॉ. वर्मा और उनके कई सहयोगियों के लिए, यह प्रश्न एक “जाल” के रूप में देखा जाता है जो उन ट्रांसजेंडर और गैर-बाइनरी व्यक्तियों के अनुभवों को अमान्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जिन्हें प्रजनन देखभाल की आवश्यकता हो सकती है।

मिफेप्रिस्टोन विवाद

यह सुनवाई अमेरिका में मिफेप्रिस्टोन को लेकर चल रही एक बड़ी कानूनी और विधायी लड़ाई का हिस्सा थी। 2022 में ‘रो बनाम वेड’ (Roe v. Wade) के फैसले को पलटने के बाद, गर्भपात की गोलियों की पहुंच प्रजनन अधिकारों के संघर्ष का मुख्य मोर्चा बन गई है। मिफेप्रिस्टोन को दो दशक पहले एफडीए (FDA) द्वारा अनुमोदित किया गया था और इसे कई नैदानिक अध्ययनों के माध्यम से सुरक्षित साबित किया गया है।

निष्कर्ष

जैसे-जैसे इस सुनवाई का वीडियो वायरल हो रहा है, डॉ. वर्मा दोनों पक्षों के लिए एक प्रतीक बन गई हैं। कुछ लोगों के लिए, वह समावेशी स्वास्थ्य सेवा का बचाव करने वाली नायक हैं; दूसरों के लिए, वह राजनीतिक शुद्धता के नाम पर जैविक तथ्यों को नजरअंदाज करने वाली प्रतिनिधि हैं। दृष्टिकोण जो भी हो, इस 14 बार पूछे गए सवाल ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि डॉ. वर्मा का नाम अब अमेरिकी प्रजनन अधिकारों के इतिहास में स्थायी रूप से दर्ज हो गया है।

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