वेदांता समूह के बहुप्रतीक्षित चार-तरफा डिमर्जर के बाद कंपनी के विभिन्न कारोबार अब स्वतंत्र इकाइयों के रूप में सामने आ रहे हैं। इस बड़े कॉर्पोरेट पुनर्गठन के बीच एल्युमिनियम कारोबार को सबसे मूल्यवान और मजबूत इकाई माना जा रहा है। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि सूचीबद्ध होने के बाद यह स्वतंत्र एल्युमिनियम कंपनी ₹1.74 लाख करोड़ से अधिक के बाजार पूंजीकरण के साथ शुरुआत कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार एल्युमिनियम व्यवसाय वेदांता के पूरे पोर्टफोलियो का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। कंपनी की उत्पादन क्षमता लगभग 2.88 मिलियन टन प्रति वर्ष बताई जाती है, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी और चीन के बाहर दुनिया की प्रमुख एल्युमिनियम उत्पादकों में शामिल है।
इस कारोबार की सबसे बड़ी ताकत इसकी लागत प्रतिस्पर्धा मानी जा रही है। कोयला और बॉक्साइट खदानों के माध्यम से प्राप्त बैकवर्ड इंटीग्रेशन कंपनी को कच्चे माल की लागत पर बेहतर नियंत्रण देता है। यही कारण है कि वैश्विक कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान भी इसके परिचालन मार्जिन अपेक्षाकृत मजबूत बने रहते हैं।
वित्तीय प्रदर्शन के आंकड़े भी इस इकाई की मजबूती को दर्शाते हैं। विश्लेषकों के अनुसार एल्युमिनियम कारोबार ने वित्त वर्ष 2026 में लगभग ₹25,500 करोड़ का EBITDA उत्पन्न किया। आने वाले वर्षों में इसके और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह समूह की अन्य नई इकाइयों की तुलना में अधिक लाभदायक साबित हो सकता है।
डिमर्जर का मुख्य उद्देश्य विभिन्न कारोबारों की वास्तविक क्षमता को अलग-अलग पहचान दिलाना है। पहले निवेशकों के पास एक समेकित कंपनी का शेयर होता था, जबकि अब उन्हें अलग-अलग व्यवसायों में प्रत्यक्ष हिस्सेदारी का अवसर मिलेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रत्येक इकाई का स्वतंत्र मूल्यांकन संभव होगा और निवेशकों को वास्तविक वैल्यू अनलॉक होने का लाभ मिल सकता है।
एल्युमिनियम कारोबार की घरेलू बाजार में भी मजबूत स्थिति है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार कंपनी की भारतीय बाजार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है और इसके प्रमुख औद्योगिक परिसंपत्तियां इसे प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करती हैं।
ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि डिमर्जर के बाद निवेशकों को एल्युमिनियम कारोबार की मजबूत आय क्षमता का सीधा लाभ मिल सकता है। वहीं लौह अयस्क, इस्पात, ऊर्जा और अन्य कारोबारों की स्वतंत्र पहचान भी निवेशकों के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा कर सकती है।
फिलहाल शेयर बाजार की नजर वेदांता की नई इकाइयों के प्रदर्शन पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिमर्जर के बाद एल्युमिनियम व्यवसाय समूह के सबसे आकर्षक और मूल्यवान निवेश अवसरों में से एक बनकर उभर सकता है।
