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व्यापार में बड़ी जीत: ऑस्ट्रेलिया ने सभी भारतीय उत्पादों पर खत्म किया शुल्क

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भारतीय निर्यातकों के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़ी खुशखबरी के साथ होने वाली है। भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) के तहत, 1 जनवरी 2026 से ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश करने वाले सभी भारतीय उत्पादों पर सीमा शुल्क (Tariff) शून्य हो जाएगा। यह कदम द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ है, जिससे भारतीय निर्यात को वैश्विक बाजार में जबरदस्त प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।

यह मील का पत्थर ऐसे समय में आया है जब भारत अपने निर्यात गंतव्यों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। अगस्त 2025 से अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए 50% के भारी शुल्क के बाद, ऑस्ट्रेलियाई बाजार का पूरी तरह से खुलना भारतीय कपड़ा, चमड़ा, और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह काम करेगा।

शून्य शुल्क: प्रतिस्पर्धा में भारी उछाल

दिसंबर 2022 में जब यह समझौता लागू हुआ था, तब ऑस्ट्रेलिया ने 98.3% उत्पादों पर शुल्क हटा दिया था। अब, शेष 1.7% उत्पादों—जिनमें इंजीनियरिंग सामान, चिकित्सा उपकरण, मशीनरी और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं—पर भी शुल्क हटा दिया गया है।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा:

“1 जनवरी 2026 से, 100 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई टैरिफ लाइनें भारतीय निर्यात के लिए शून्य-शुल्क होंगी। पिछले तीन वर्षों में, इस समझौते ने इरादे को प्रभाव (Intent to Impact) में बदल दिया है, जिससे हमारे निर्यातकों, एमएसएमई, किसानों और श्रमिकों को सीधा लाभ हुआ है।

सेक्टर-वार प्रदर्शन और उपलब्धियां

वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़े बताते हैं कि इस समझौते का लाभ मिलना शुरू हो चुका है:

रणनीतिक महत्व: बदलती वैश्विक व्यवस्था

2025 का साल ‘टैरिफ युद्ध’ का साल रहा है। अमेरिका और मैक्सिको जैसे देशों द्वारा लगाए गए उच्च शुल्कों के बीच, ऑस्ट्रेलिया भारत के लिए एक भरोसेमंद और स्थिर व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है। ईसीटीए (ECTA) न केवल व्यापार बढ़ाता है, बल्कि मेक इन इंडिया और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करता है।

निष्कर्ष

100% शुल्क-मुक्त पहुंच भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंधों के लिए एक नया अध्याय है। यह न केवल भारतीय उद्योगों को वैश्विक अस्थिरता से बचाएगा, बल्कि लाखों नए रोजगार पैदा करने में भी मदद करेगा। 2026 में कदम रखते ही भारतीय निर्यातक अब एक ऐसे बाजार में प्रवेश करेंगे जहां उनके उत्पादों की कीमत अन्य देशों के मुकाबले काफी कम और प्रतिस्पर्धी होगी।

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