भारतीय शेयर बाजार में आज भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल बन गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 650 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 50 महत्वपूर्ण 23,150 के स्तर से नीचे फिसल गया। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी को इस गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी शेयर बाजारों में आई तेज गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। विशेष रूप से टेक्नोलॉजी शेयरों में दबाव बढ़ने से निवेशकों ने जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनानी शुरू कर दी। अमेरिकी टेक इंडेक्स Nasdaq में आई बड़ी गिरावट ने वैश्विक निवेश धारणा को प्रभावित किया है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी भारतीय बाजार पर भारी पड़ रही है। हाल के दिनों में विदेशी फंड भारतीय इक्विटी बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं, जिससे बड़े और मझोले शेयरों पर दबाव बढ़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
अमेरिका में मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की आशंकाएं बढ़ गई हैं। ऊंची ब्याज दरें उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का एक प्रमुख कारण मानी जाती हैं।
आईटी सेक्टर आज बाजार की गिरावट का सबसे बड़ा केंद्र रहा। Wipro के शेयरों में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि Tata Consultancy Services के शेयर भी दबाव में रहे। निवेशकों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी प्रतिस्पर्धा और बदलते वैश्विक तकनीकी कारोबार मॉडल को लेकर चिंता देखी गई।
इसके अलावा ऑटो और औद्योगिक क्षेत्र के कई बड़े शेयरों में भी बिकवाली का दबाव रहा। Mahindra & Mahindra समेत कई प्रमुख कंपनियों के शेयर दिन के प्रमुख नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा गिरावट में वैश्विक कारकों की भूमिका प्रमुख है। निवेशकों को निकट भविष्य में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की नीतियों और विदेशी निवेश प्रवाह पर विशेष नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
फिलहाल भारतीय शेयर बाजार वैश्विक संकेतों के दबाव में दिखाई दे रहा है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर घरेलू आर्थिक आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की दिशा पर बनी रहेगी, जो बाजार की अगली चाल तय कर सकते हैं।
