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सेंसेक्स में 1,000 अंकों का उछाल: वैश्विक तनाव में कमी से लौटी हरियाली

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मुंबई – पिछले सत्र में भारी बिकवाली के बाद, मंगलवार सुबह भारतीय शेयर बाजारों ने नाटकीय ढंग से वापसी की। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से निवेशकों को मिली राहत के चलते बेंचमार्क बीएसई (BSE) सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1,000 से अधिक अंक उछल गया।

सुबह 9:32 बजे, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,008.41 अंक (1.39%) की बढ़त के साथ 73,704.80 पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह, व्यापक एनएसई निफ्टी 50 भी 338.85 अंक चढ़कर 22,851.50 पर पहुंच गया। यह रिकवरी सोमवार के पैनिक-सेलिंग (घबराहट में की गई बिकवाली) के बाद एक बड़ा यू-टर्न है, जो दर्शाता है कि घरेलू निवेशक दिग्गज ‘ब्लू-चिप’ शेयरों में निचले स्तरों पर खरीदारी कर रहे हैं।

मुख्य कारण: कूटनीति और कच्चे तेल का ‘क्रैश’

बाजार की धारणा में सुधार के पीछे प्राथमिक कारण अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का कम होना माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के माध्यम से कूटनीतिक प्रयासों की रिपोर्टों ने उम्मीद जगाई है कि एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध को टाला जा सकता है।

इस कूटनीतिक नरमी का सीधा असर ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड की कीमतें, जो खतरनाक स्तर पर बनी हुई थीं, लगभग 10% गिरकर $100 के स्तर के आसपास आ गईं। भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए तेल की कम कीमतें एक महत्वपूर्ण ‘मैक्रोइकोनॉमिक लुब्रिकेंट’ (आर्थिक सहायक) का काम करती हैं, क्योंकि इससे आयातित मुद्रास्फीति कम होती है और चालू खाता घाटा (CAD) में सुधार होता है।

बैंकिंग और लार्ज-कैप शेयरों ने संभाली कमान

दलाल स्ट्रीट पर आई इस रिकवरी का नेतृत्व मुख्य रूप से बैंकिंग क्षेत्र के दिग्गज शेयरों ने किया। HDFC बैंक, ICICI बैंक और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) जैसे वित्तीय संस्थानों में भारी खरीदारी देखी गई। निफ्टी और सेंसेक्स में इनके भारी वजन (weightage) के कारण, इनकी बढ़त ने पूरे बाजार को गति प्रदान की।

इसके अलावा ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स और टेलीकम्युनिकेशन जैसे अन्य क्षेत्रों ने भी इस रैली में हिस्सा लिया। विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक महीने में कई लार्ज-कैप शेयरों में भारी गिरावट आई थी, जिससे वे घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और खुदरा निवेशकों के लिए “सस्ती खरीदारी” (bargain hunting) का आकर्षक लक्ष्य बन गए।

विशेषज्ञ विश्लेषण: आगे की राह में अस्थिरता

सुबह के उत्साह के बावजूद, बाजार के अनुभवी जानकार सतर्क बने हुए हैं। वैश्विक राजनीति में अस्थिरता अभी भी उभरते बाजारों (emerging markets) पर अपनी छाया बनाए हुए है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने इस रैली पर एक सूक्ष्म परिप्रेक्ष्य प्रदान किया: “राजनीति बाजार की तरह ही अस्थिर साबित हो रही है। हालांकि बाजार युद्ध की समाप्ति की संभावना को मानकर चल रहा है—अगस्त के अमेरिकी तेल वायदा $80 पर कारोबार कर रहे हैं—लेकिन युद्ध के मोर्चे से आने वाली खबरों के कारण निकट अवधि में अस्थिरता अत्यधिक बनी रहेगी।”

डॉ. विजयकुमार ने एक निरंतर घरेलू चुनौती पर भी प्रकाश डाला: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली। “रुपये में लगातार कमजोरी FII की बिकवाली के पीछे मुख्य कारक है। स्थिरता के लिए पहले रुपये का स्थिर होना जरूरी है। हालांकि, आईटी और फार्मास्युटिकल जैसे निर्यात-उन्मुख क्षेत्र लचीले बने रहने की संभावना है।”

हरियाली के बीच सावधानी

हालांकि 1,000 अंकों की छलांग ने अस्थायी राहत दी है, लेकिन आगे का रास्ता दो कारकों पर निर्भर करेगा: भारतीय रुपये की स्थिरता और खाड़ी में कूटनीतिक प्रयासों की सफलता। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें और आईटी व फार्मा जैसे ‘डिफेंसिव’ क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करें।

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