Samachar Today

सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, 4 महीने के निचले स्तर पर पहुंचे भाव

सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, 4 महीने के निचले स्तर पर पहुंचे भाव - SamacharToday.co.in

वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद निवेशकों ने कीमती धातुओं से दूरी बनानी शुरू कर दी है, जिससे दोनों धातुएं पिछले चार महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। आमतौर पर युद्ध और भू-राजनीतिक संकट के दौरान सोना और चांदी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, लेकिन इस बार बाजार की दिशा अलग नजर आ रही है।

घरेलू सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमत में करीब ₹3,380 की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद इसका भाव लगभग ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। वहीं चांदी में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। कुछ ही दिनों में चांदी का भाव करीब ₹5,500 तक टूट गया, जिससे इसकी कीमत लगभग ₹2.44 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई। निवेशकों के लिए यह गिरावट हैरान करने वाली मानी जा रही है क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तनाव के दौरान कीमती धातुओं में खरीदारी बढ़ती है।

दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। ऊर्जा बाजार में यह चिंता बढ़ गई है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। दुनिया के बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति इसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरती है।

विशेषज्ञों के अनुसार सोना और चांदी में गिरावट की सबसे बड़ी वजह महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं। अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि वहां की अर्थव्यवस्था अभी भी अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। ऐसे में निवेशकों को आशंका है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है या जरूरत पड़ने पर फिर से सख्त रुख अपना सकता है।

यहीं से बाजार का पूरा समीकरण बदल गया है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं तो निवेशक उन साधनों की ओर आकर्षित होते हैं जो नियमित रिटर्न या ब्याज प्रदान करते हैं। इसके विपरीत, सोना और चांदी ऐसी संपत्तियां हैं जो कोई ब्याज नहीं देतीं। यही कारण है कि ऊंची ब्याज दरों की संभावना बढ़ते ही निवेशकों ने कीमती धातुओं में मुनाफावसूली शुरू कर दी।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक महंगाई को फिर से बढ़ावा दे सकती हैं। ऊर्जा लागत बढ़ने का असर परिवहन, उत्पादन और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। यदि महंगाई लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है तो दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है।

फिलहाल निवेशकों की नजर मध्य पूर्व के घटनाक्रम, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली नीति बैठक और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोना और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वहीं तेल बाजार की दिशा भी वैश्विक निवेशकों की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Exit mobile version