आज के तेजी से बदलते बाजार चक्र, भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के बीच, “निश्चित आय” का आकर्षण एक बार फिर लौट आया है। डिविडेंड (लाभांश) देने वाले शेयर, जिन्हें कभी शेयर बाजार का “सुस्त” कोना माना जाता था, अब 2025 में हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और वैश्विक संस्थागत निवेशकों के लिए निवेश का मुख्य जरिया बनकर उभरे हैं।
वॉल स्ट्रीट से लेकर दलाल स्ट्रीट तक, एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। निवेशक अब केवल ऊंचे जोखिम वाले ‘ग्रोथ स्टॉक्स’ के पीछे भागने के बजाय उन कंपनियों में अपनी संपत्ति निवेश कर रहे हैं जो नियमित रूप से अपने मुनाफे का हिस्सा शेयरधारकों के साथ साझा करती हैं। यह रुझान न केवल सुरक्षा की तलाश है, बल्कि दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण और जोखिम प्रबंधन की एक सोची-समझी रणनीति है।
अनिश्चित समय में आय का आधार
डिविडेंड स्टॉक्स के प्रति बढ़ते रुझान का सबसे बड़ा कारण “निश्चित कैश फ्लो” की मांग है। एचएनआई और फैमिली ऑफिस के लिए, अपने मूल निवेश को बेचे बिना नियमित आय प्राप्त करना एक बड़ी वित्तीय सुविधा है।
अमेरिका में, “डिविडेंड एरिस्टोक्रेट्स” (वे कंपनियां जिन्होंने पिछले 25 वर्षों से लगातार अपना लाभांश बढ़ाया है) में इस साल रिकॉर्ड निवेश देखा गया है। ये कंपनियां स्वास्थ्य सेवा, उपभोक्ता वस्तुओं और उपयोगिताओं (Utilities) जैसे क्षेत्रों से जुड़ी हैं, जो स्थिरता का प्रतीक मानी जाती हैं। भारत में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही है। बैंकिंग, आईटी (IT) और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) ने अपनी ऊंची लाभांश भुगतान दर बनाए रखी है, जो अक्सर पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बराबर या उससे अधिक रिटर्न देती है।
बाजार की गिरावट में सुरक्षा कवच
ऐतिहासिक रूप से, डिविडेंड देने वाले शेयर बाजार की गिरावट के दौरान एक ‘बफर’ के रूप में कार्य करते हैं। जो कंपनी नियमित लाभांश देती है, वह बाजार को एक मजबूत संदेश देती है: उसकी बैलेंस शीट मजबूत है, प्रबंधन अनुशासित है और आर्थिक मंदी के दौरान भी वह नकदी पैदा करने में सक्षम है।
2024 और 2025 की शुरुआत के आंकड़ों से पता चलता है कि डिविडेंड-केंद्रित सूचकांकों में गिरावट, हाई-ग्रोथ या मोमेंटम-आधारित सूचकांकों की तुलना में काफी कम रही है। एक वैश्विक निवेशक के लिए, यह कम अस्थिरता जोखिम-समायोजित रिटर्न (Risk-adjusted return) में सुधार करती है, जिससे पोर्टफोलियो झटकों के प्रति अधिक लचीला हो जाता है।
“ऐसे दौर में जहां पूंजीगत लाभ (Capital gains) एक ट्वीट या भू-राजनीतिक तनाव के कारण रातों-रात गायब हो सकता है, त्रैमासिक डिविडेंड चेक ही एकमात्र ‘सच्चाई’ है जिस पर एक निवेशक भरोसा कर सकता है।” — विक्टर नोसेक, हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट एनालिटिक्स, वैनगार्ड यूरोप।
महंगाई से सुरक्षा: बढ़ता लाभांश
फिक्स्ड-इनकम साधनों जैसे बॉन्ड या डिबेंचर के विपरीत, जहां ब्याज दर आमतौर पर स्थिर रहती है, डिविडेंड में बढ़ने की क्षमता होती है। कई गुणवत्तापूर्ण कंपनियां “प्रगतिशील डिविडेंड नीति” अपनाती हैं, जिसका अर्थ है कि वे अपनी कमाई में वृद्धि के साथ-साथ लाभांश भुगतान बढ़ाने का लक्ष्य रखती हैं।
यह वृद्धि महंगाई के खिलाफ एक प्राकृतिक सुरक्षा (Hedge) के रूप में कार्य करती है। यदि महंगाई दर 4-5% रहती है, तो 8-10% की दर से बढ़ने वाला डिविडेंड निवेशक की वास्तविक आय को सुरक्षित रखता है। भारत में, एफएमसीजी (FMCG) और ऑटो क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां इस मामले में अग्रणी रही हैं।
कर कुशलता और वैश्विक विविधीकरण
आधुनिक एचएनआई पोर्टफोलियो अब केवल एक देश तक सीमित नहीं है। वैश्विक निवेशक मुद्रा जोखिमों (Currency risk) के प्रबंधन के लिए लाभांश रणनीतियों का उपयोग कर रहे हैं।
-
अमेरिकी एरिस्टोक्रेट्स: डॉलर में आय प्रदान करते हैं, जो स्थानीय मुद्रा की गिरावट के खिलाफ एक सुरक्षा है।
-
भारतीय कंपनियां: दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था में निवेश का अवसर देती हैं, जहां कई कंपनियां अपने वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में आकर्षक ‘डिविडेंड यील्ड’ पर कारोबार कर रही हैं।
भारत में 2020 में डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) की समाप्ति के बाद से, लाभांश पर निवेशक की लागू स्लैब दरों के अनुसार कर लगाया जाता है। एचएनआई अक्सर इन भुगतानों को अनुकूलित करने के लिए ‘डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस एग्रीमेंट’ (DTAA) जैसे लाभों का उपयोग करते हैं।
“हर कीमत पर विकास” से बदलाव
इस रुझान को समझने के लिए, 2022-2025 के संक्रमण काल को देखना जरूरी है। एक दशक तक चली कम ब्याज दरों के बाद, जब वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें 4-5% तक पहुंच गईं, तो निवेश का गणित बदल गया। अब इक्विटी को अपनी कीमत साबित करने के लिए भविष्य के “संभावित” मुनाफे के बजाय तत्काल और ठोस रिटर्न देना पड़ रहा है।
लचीले पोर्टफोलियो का स्तंभ
2025 में डिविडेंड स्टॉक्स अब केवल “रिटायरमेंट टूल” नहीं, बल्कि “संपत्ति संरक्षण” का आधार बन गए हैं। चाहे वह भारतीय निवेशक हो जो जोखिम भरे स्मॉल कैप से बाहर निकल रहा है, या वैश्विक एचएनआई जो स्थिरता की तलाश में है, डिविडेंड एक बेहतरीन संतुलन प्रदान करते हैं।
तेजी से बदलते बाजार चक्रों में, डिविडेंड की शांत और निरंतर वृद्धि ही वित्तीय मजबूती का सबसे भरोसेमंद रास्ता है।
