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होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण ट्रंप ने स्वीकारा

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संघर्ष के शुरुआती दिनों के आक्रामक रुख से पीछे हटते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब सैन्य अल्टीमेटम के बजाय होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के परिचालन नियंत्रण (operational control) को स्वीकार करते नजर आ रहे हैं। उनके बयानों में आया यह बदलाव ज़मीनी हकीकत को दर्शाता है: अमेरिकी और इजरायली सैन्य हमलों के बावजूद, ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा धमनी पर अपनी पकड़ बनाए हुए है।

यह बदलाव राष्ट्रपति के उस पिछले दावे से बिल्कुल अलग है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी “अधिकतम दबाव” के आगे यह जलमार्ग “अपने आप खुल जाएगा।” अब स्थिति यह है कि तेहरान न केवल यातायात को प्रतिबंधित कर रहा है, बल्कि गुजरने वाले कुछ चुनिंदा जहाजों से “ट्रांजिट शुल्क” (transit fees) वसूलने के प्रयोग भी कर रहा है।

असममित शक्ति (Asymmetric Leverage) की वास्तविकता

होर्मुज जलडमरूमध्य 96 मील लंबा एक जलमार्ग है, जहाँ से प्रतिदिन लगभग 2.1 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। यह अब एक हाई-स्टेक भू-राजनीतिक गतिरोध का केंद्र बन गया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में स्वीकार किया, “उन्हें [यातायात को नियंत्रित] नहीं करना चाहिए, लेकिन वे थोड़ा-बहुत ऐसा कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी नोट किया कि ईरान ने अप्रत्यक्ष बातचीत के दौरान “मिस्ट्री गिफ्ट” (रहस्यमयी उपहार) के रूप में दस तेल टैंकरों को जाने की अनुमति दी थी।

समुद्री सुरक्षा की ‘मुख्य पहेली’

बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) ने पाया है कि इन संकरे पानी में पारंपरिक विमान वाहक समूहों का दबदबा बनाना मुश्किल है। ईरान की रणनीति “कम लागत, उच्च प्रभाव” वाली असममित तकनीकों पर निर्भर है:

एक वरिष्ठ अमेरिकी खुफिया अधिकारी ने बताया, “इस संघर्ष की मुख्य पहेली यह है कि ईरानियों के पास वास्तविक पकड़ (leverage) है… और इसका कोई आसान समाधान नहीं है। आप उनकी मिसाइल बैटरियों पर हमला कर सकते हैं, लेकिन एक हजार समुद्री बारूदी सुरंगों को साफ करना या सौ मील लंबी ऊबड़-खाबड़ तटरेखा पर हर छोटी नाव को रोकना आसान नहीं है।”

आर्थिक परिणाम और ऊर्जा मुद्रास्फीति

इस नाकाबंदी ने वैश्विक तेल की कीमतों में आग लगा दी है, जिससे ब्रेंट क्रूड अक्सर $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर रहा है।

  1. बीमा लागत: शिपिंग बीमा की लागत (War Risk Premiums) दस गुना बढ़ गई है।

  2. वैकल्पिक मार्ग: कई वैश्विक शिपिंग कंपनियों को ‘केप ऑफ गुड होप’ (अफ्रीका के चक्कर लगाकर) से जहाजों को भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिससे डिलीवरी में हफ्तों की देरी और अरबों डॉलर की वैश्विक महंगाई बढ़ रही है।

  3. भारत पर प्रभाव: भारत जैसे ऊर्जा-निर्भर देशों के लिए यह “होर्मुज प्रीमियम” विशेष रूप से कष्टकारी है। हालांकि सरकार ने घरेलू करों में कटौती की है, लेकिन इसकी स्थिरता जलडमरूमध्य के खुलने पर निर्भर करती है।

दबाव में कूटनीति

तीसरे पक्षों के माध्यम से अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है, लेकिन “होर्मुज फैक्टर” अभी भी ईरान का सबसे मजबूत कार्ड बना हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप के नरम लहजे से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन अब समुद्री यातायात को सामान्य करने के बदले कुछ रियायतें देने के लिए तैयार हो सकता है। हालांकि, जब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं होता, होर्मुज जलडमरूमध्य एक ऐसा “चोकहोल्ड” बना रहेगा जिसे ईरान अपनी मर्जी से कस सकता है।

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