ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपने नियंत्रण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने और भविष्य में यहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने के अपने रुख पर कायम है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान का कहना है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह अपने इस दावे को बलपूर्वक लागू करने से भी पीछे नहीं हटेगा। यह मुद्दा अमेरिका के साथ जारी शांति वार्ताओं का प्रमुख विषय बन गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत ईरान ने 60 दिनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को बिना किसी शुल्क के गुजरने की अनुमति देने पर सहमति जताई थी। हालांकि, ईरान का दावा है कि समझौते की शर्तें उसे यह अधिकार देती हैं कि वह तय करे कि कौन से जहाज जलडमरूमध्य से गुजरेंगे और वे किस मार्ग का उपयोग करेंगे। तेहरान चाहता है कि अंतरिम अवधि समाप्त होने के बाद इस नियंत्रण को औपचारिक और स्थायी मान्यता मिले।
सूत्रों के अनुसार, ईरान के वार्ताकारों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के मुद्दे पर सहमति नहीं बनती, तब तक वे अमेरिका के साथ अन्य विवादित विषयों पर आगे नहीं बढ़ेंगे। यदि अंतरिम समझौते की अवधि बढ़ाई नहीं जाती, तो ईरान अगस्त के मध्य से जहाजों पर पारगमन शुल्क लागू कर सकता है। हालांकि अभी तक शुल्क की दरों या उसके स्वरूप की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। युद्ध से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) सहित अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं का परिवहन इसी मार्ग से होता था। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान स्थायी रूप से इस मार्ग पर शुल्क और औपचारिक नियंत्रण लागू करता है, तो वैश्विक शिपिंग लागत, परिवहन समय और व्यापारिक जोखिम में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
वहीं अमेरिका इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाए हुए है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगाया जाएगा, जब तक कि अमेरिका स्वयं ऐसा निर्णय न ले। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी स्पष्ट किया कि किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही रोकने या उन पर टोल अथवा शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के दिनों में ईरान और ओमान के बीच जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन मार्गों को लेकर बातचीत की तैयारी चल रही है। हालांकि सप्ताहांत में ईरान द्वारा कथित रूप से चार जहाजों पर चेतावनी स्वरूप कार्रवाई किए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। इस घटना के दौरान अमेरिकी बलों और ईरानी पक्ष के बीच संक्षिप्त सैन्य टकराव की भी खबरें सामने आईं।
अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की कानूनी स्थिति लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के दायरे में मानी जाती रही है, जहां सभी देशों के जहाजों को निर्बाध आवाजाही का अधिकार प्राप्त है। हालांकि ईरान अब इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए अपने अधिकारों की नई व्याख्या पेश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे का कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो क्षेत्र में एक बार फिर तनाव बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ने की आशंका है।
