गुरुग्राम — राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र को झकझोर देने वाली एक बड़ी कार्रवाई में, गुरुग्राम पुलिस ने शुक्रवार को प्रतिष्ठित ’32nd माइलस्टोन’ (जिसे अब 32nd एवेन्यू के नाम से जाना जाता है) के निदेशक और सीईओ ध्रुव दत्त शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी लगभग ₹500 करोड़ के कथित रियल एस्टेट घोटाले की जांच के बाद हुई है, जिसमें एक ही व्यावसायिक संपत्ति (कमर्शियल प्रॉपर्टी) को 25 अलग-अलग खरीदारों को बेचने का आरोप है।
सिविल लाइंस स्थित डीएलएफ कैमेलियास के निवासी शर्मा को शनिवार को शहर की एक अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। गुरुग्राम पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) वर्तमान में इस मामले की जांच कर रही है, जिसमें 2021 और 2023 के बीच धोखाधड़ी के एक व्यवस्थित पैटर्न का संकेत मिलता है।
धोखाधड़ी की परतों का खुलासा
जांच की शुरुआत ‘ट्रैम वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ की एक औपचारिक शिकायत के बाद हुई। सिविल लाइंस थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, आरोपी की कंपनी ’32nd माइलस्टोन विस्टा प्राइवेट लिमिटेड’ (पूर्व में अप्रा मोटल्स) ने 2021 में ₹2.5 करोड़ में 3,000 वर्ग फुट का कमर्शियल स्पेस (यूनिट नंबर 24) देने की पेशकश की थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सितंबर 2021 तक पूरा भुगतान किए जाने के बावजूद, शर्मा के नेतृत्व वाली कंपनी ने कन्वेंस डीड (हस्तांतरण विलेख) के निष्पादन में बार-बार देरी की। 2023 के अंत में भेजे गए कानूनी नोटिसों का भी कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया। जब ईओडब्ल्यू ने गहराई से जांच की, तो रियल एस्टेट धोखाधड़ी का एक बड़ा खेल सामने आया।
जांचकर्ताओं ने पाया कि उसी 3,000 वर्ग फुट की यूनिट को कथित तौर पर 25 अन्य व्यक्तिगत खरीदारों को भी “बेचा” गया था। कानूनी पेचीदगियों को बढ़ाने और अधिक धन वसूलने के लिए, शर्मा के सहयोगियों ने कथित तौर पर ‘ग्रोथ हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड‘ नामक एक अन्य फर्म बनाई। इस दूसरी इकाई के तहत, कंपनी ने कथित तौर पर सभी 25 खरीदारों के साथ एक साथ 30 साल के लीज समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे उन्हें यह आभास होता रहा कि उनके निवेश पर किराया मिल रहा है।
कार्यप्रणाली: “डबल सेल” का जाल
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला “डबल सेल” (दोहरी बिक्री) घोटाले का एक परिष्कृत रूप है। ऐसे मामलों में, डेवलपर 32nd एवेन्यू जैसे लोकप्रिय गंतव्य की ब्रांड वैल्यू का उपयोग करके निवेशकों को लुभाते हैं।
राजस्व विभाग के साथ कन्वेंस डीड पंजीकृत न करके, डेवलपर संपत्ति को कागज पर “उपलब्ध” रखता है, जिससे वह एक ही स्थान के लिए अलग-अलग पक्षों के साथ कई बिक्री समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकता है। इस मामले में, एक सहयोगी कंपनी के माध्यम से 30 साल की लीज का अतिरिक्त दांव यह सुनिश्चित करने के लिए था कि खरीदार लंबे समय तक अंधेरे में रहें।
पुलिस का बयान और कानूनी कार्यवाही
गुरुग्राम पुलिस ने पुष्टि की है कि प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने महत्वपूर्ण बातें स्वीकार की हैं। गुरुग्राम पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा, “जांच के दौरान, शर्मा ने खुलासा किया कि पहली मंजिल का सौदा 2021 में फाइनल हुआ था, लेकिन डीड कभी निष्पादित नहीं की गई। हमारी जांच से पता चलता है कि उसी मंजिल को 25 अलग-अलग संस्थाओं को बेचा गया था।”
पुलिस ने ₹500 करोड़ के इस घोटाले के लेन-देन का पता लगाने के लिए कई डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट जब्त किए हैं। यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस धन को विदेशी खातों में भेजा गया था या अन्य हॉस्पिटैलिटी व्यवसायों में उपयोग किया गया था।
“यह केवल अनुबंध की विफलता का मामला नहीं है; यह एक प्रसिद्ध लैंडमार्क की ब्रांड वैल्यू का दुरुपयोग करके निवेशकों को ठगने की एक आपराधिक साजिश है। हम अन्य निदेशकों और बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं,” — वरिष्ठ अधिकारी, ईओडब्ल्यू गुरुग्राम।
32nd माइलस्टोन की विरासत
32nd माइलस्टोन 1990 के दशक से गुरुग्राम में एक ऐतिहासिक स्थल रहा है, जो शहर के पहले एकीकृत मनोरंजन और डाइनिंग हब में से एक है। NH-48 पर स्थित इस जगह का कुछ साल पहले 32nd एवेन्यू के रूप में कायाकल्प किया गया था।
अपनी अनूठी वास्तुकला और यूरोपीय शैली के कारण यह प्रोजेक्ट गुरुग्राम में कमर्शियल रियल एस्टेट के लिए एक प्रमुख निवेश विकल्प बन गया था। हालांकि, वर्तमान आरोपों से पता चलता है कि इसके चमकदार स्वरूप के पीछे प्रबंधन गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन में लिप्त था।
रियल एस्टेट क्षेत्र पर प्रभाव
ध्रुव शर्मा जैसे हाई-प्रोफाइल सीईओ की गिरफ्तारी ने कमर्शियल रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खरीदारों को किसी भी निवेश से पहले ‘ड्यू डिलिजेंस’ (उचित सावधानी) बरतनी चाहिए:
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आवंटन का सत्यापन: सुनिश्चित करें कि यूनिट पहले से किसी और के नाम पर पंजीकृत नहीं है।
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भार प्रमाणपत्र (Encumbrance Certificate): संपत्ति पर किसी भी मौजूदा ऋण या कानूनी विवाद की जांच करें।
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रेरा (RERA) पंजीकरण: सत्यापित करें कि विशिष्ट परियोजना और उसकी इकाइयां राज्य नियामक संस्था के साथ पंजीकृत हैं।
