मुजफ्फरनगरः नकली नोट के सौदागर को 4 साल की सजा, 16 साल बाद आया अदालत का फैसला

कंप्यूटर की मदद से नकली नोट छापकर मार्केट में सप्लाई करते थे 3 लोग, मौके से भारी संख्या में बरामद हुए थे नकली नोट
 
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  • रिपोर्टः एम.रहमान (वरिष्ठ पत्रकार, मुजफ्फरनगर)

मुज़फ्फरनगर। नकली नोट छापने और उन्हें मार्केट में सप्लाई करने के एक मामले में अदालत का 16 साल बाद फैसला आया है। अदालत ने एक आरोपी को दोषी करार देते हुए 4 साल की सजा सुनाई है, जबकि एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है और तीसरे आरोपी को नाबालिग घोषित कर दिया गया।
साल 2006 का है मामला
दरअसल, 19 मई 2006 को शामली ज़िले के थाना झिंझाना के ग्राम बीबीपुर में पुलिस ने एक मकान में छापा मारा था। सटीक सूचना के आधार पर मारे गए इस छापे के दौरान मौके से 500-500 और 100-100 के नकली नोट भारी संख्या में बरामद हुए थे। साथ ही मौके से पुलिस के हाथ कंप्यूटर, प्रिंटर एवं अन्य सामान भी बरामद हुआ था, जिनकी मदद से आरोपी नकली नोट छापा करते थे। पुलिस ने मौके से देवेंद्र, राजेश और जितेंद्र को हिरासत में लिया था।

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एडीजे-13 की अदालत में विचाराधीन था मामला
ये मामला एडीजे-13 शक्ति सिंह की अदालत में विचाराधीन था। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अभियोजन की तरफ से तमाम सबूत और गवाह पेश किए गए, जिनके आधार पर अदालत ने देवेंद्र को दोषी करार देते हुए 4 साल की सजा सुनाई। इस मामले में अभियोजन की तरफ से एडीजीसी प्रवेंद्र कुमार ने पैरवी की।
एक आरोपी की हो चुकी है पहले ही मौत
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस मामले में दोषी करार दिए गए देवेंद्र के एक साथी राजेश की अदालत का फैसला आने से पहले ही मौत हो चुकी है, जबकि जांच में जितेंद्र घटना के वक्त नाबालिग पाया गया था, जिस कारण वो सजा से बच गया।