कलयुगी कपूत की काली करतूतः पहले पिता को टपकाया, फिर मां को भी ठिकाने लगाया

मां के साथ मिलकर की थी पिता की हत्या, दो महीने बाद मां को भी हथौड़े से पीट-पीटकर मार डाला
 
Katil Son
  • रिपोर्टः मोहिंदर भारती
रेवाडी (हरियाणा)। सनसनखेज खबर हरियाणा के रेवाड़ी से है, जहां पहले बेटे ने मां के साथ मिलकर पिता को मौत के घाट उतारा और हत्या को आत्महत्या के बदलकर मामला रफा-दफा कर दिया। जिसके बाद बेटे ने हथौड़े से पीट-पीटकर मां को भी ठिकाने लगा दिया। इस बार भी बेटा अपनी करतूतों पर पर्दा डालने की जुगत में जुटा हुआ था, लेकिन पुलिस ने शक के आधार पर उसे घेर लिया और पुलिसिया अंदाज में पूछताछ की तो वो कुछ ही देर में टूट गया। पूछताछ में कातिल बेटे ने अपना गुनाह कबूल करते हुए तोते की मानिंद पूरी वारदात पुलिस के सामने उगल दी। जिसके बाद पुलिस अब कातिल कपूत को सलाखों के पीछे भेजते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।
ये है पूरा मामला!
दरअसल ये पूरा मामला रेवाड़ी जिले के उपमंडल बावल के गांव खुरमपुर का है, जहां एक जून की रात को 40 साल की सुशीला की हथौड़े से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक के बेटे जोगेंद्र ने पुलिस को बताया था कि जब वो ड्यूटी से आया तो उसने अपने घर से 3 लोगों को भागते हुए देखा था और जब अंदर जाकर देखा तो उसकी मां लहूलुहान पड़ी हुई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो उसके हाथ एक ऐसा सबूत लगा कि पूरे मामले की परत-दर-परत खुलती चली गई। केवल सुशीला की हत्या के राज से नहीं, बल्कि उसके पति यानि जोगेंद्र के पिता राम निवास की मौत के रहस्य से भी पर्दा उठ गया। पुलिस के मुताबिक दोनों के कत्ल किसी और ने नहीं, बल्कि खुद उनके कपूत बेटे जोगेंद्र ने की थी।

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ऐसे की थी पिता की हत्या
पुलिस के मुताबिक जोगेंद्र के पिता राम निवास शराब पीने का आदी था, जो कि आए दिन घर में लड़ाई झगड़ा करता रहता था। जोगेंद्र ने अप्रैल माह में अपनी मां सुशीला के साथ मिलकर गला दबाकर अपने पिता रामनिवास की हत्या कर दी और फिर फांसी का फंदा लगाकर उसे शीशम के पेड़ से लटका दिया, ताकि सबको लगे कि उसने आत्महत्या की है। जिसके बाद बिना किसी कार्रवाई के रामनिवास का गुपचुप तरीके से उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया।
फिर ऐसे की मां की हत्या
राम निवास की हत्या के बाद मां-बेटे के बीच अक्सर अनबन रहने लगी। भले ही दोनों ने राम निवास की हत्या को एक राज बनाकर अपने सीने में दफन कर लिया हो, लेकिन कहीं ना कहीं दोनों अंदर से डरे हुए थे और इसी वजह से दोनों के बीच झगड़ा होता रहता था। एक अप्रैल को जब जोगेंद्र ड्यूटी से वापस आया तो फिर से दोनों के बीच झगड़ा हुआ और इस बार जोगेंद्र ने हथौड़े से वार कर अपनी मां सुशीला को भी मौत के घाट उतार दिया।

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पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
पुलिस से बचने के लिए जोगेंद्र ने एक प्रपंच रचा और पुलिस को झूठी सूचना देकर उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। ब्लाइंड मर्डर को सुलझाने के लिए बावल डीएसपी राजेश लोहान और बावल थाना एसएचओ विद्यासागर की टीम गठित की थी। पुलिस ने अपने स्तर पर जांच की तो पता लगा कि सुशीला के पति रामनिवास की मौत भी संदिग्ध थी और उसके बारे में पुलिस को कोई सूचना नहीं दी गई थी। इसी बीच पुलिस के हाथ जोगेंद्र के पिता रामनिवास की फांसी के फंदे पर झूलते हुए एक फोटो हाथ लग गई। पुलिस को उस फोटो में कुछ ऐसा नजर आया कि जोगेंद्र पर पुलिस का शक गहरा गया। पुलिस ने शक के आधार पर जोगेंद्र को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। जिसके बाद पुलिस ने आवश्यक लिखा-पढ़ी करते हुए कातिल बेटे को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। 
राम निवासी की दूसरी बीवी थी सुशीला
मृतक रामनिवास की दो शादियां हुई थी। पहली पत्नी रामरती से एक बेटा मनोहर और बेटी राजबाला को जन्म दिया था। पहली बीवी की मौत के बाद उन्होंने दूसरी शादी सुशीला की थी। दूसरी शादी से तीन बेटी और एक बेटा जोगेंद्र है। तीनों बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि जोगेंद्र अविवाहित है।