मुजफ्फरनगरः 33 साल बाद मेरठ कोषागार में कार्यरत मुख्य रोकड़िया के निष्कासन की संस्तुति

12 सितंबर को नियम के खिलाफ की गई थी सुशील कुमार की नियुक्ति

 
मुजफ्फरनगर

मुजफ्फरनगर। डीएम चंद्रभूषण सिंह ने मेरठ कोषागार में तैनात मुख्य रोकड़िया सुशील कुमार को सेवा से निष्कासित करने की संस्तुति कर दी है। जांच के बाद निदेशक कोषागार को पत्र लिखा है। मुजफ्फरनगर के कोषागार में सुशील कुमार की नियम के खिलाफ नियुक्ति कर दी गई थी। 33 साल की नौकरी के बाद भी उनके पास कोई नियुक्ति पत्र नहीं है।

दरअसल रामपुरम निवासी जयप्रकाश ने मुख्यमंत्री को शिकायत की थी कि मेरठ कोषागार में तैनात सुशील कुमार की नियुक्ति नियम के खिलाफ हुई है। मुजफ्फरनगर के कोषागार में 12 सितंबर 1989 को सुशील की नियुक्ति रोकड़िया के पद पर कर दी गई थी। नियुक्ति के लिए उस समय न कोई विज्ञापन निकाला गया और न ही डीएम से अनुमति ली गई थी।

शासन के आदेश पर इस मामले की जांच अपर निदेशक कोषागार मेरठ अतुल कुमार सिंह ने की। जांच में उन्होंने शिकायत को सही पाया। नियुक्ति अनियमित पाई गई। सुशील के पास कोई नियुक्ति पत्र भी नहीं मिला। जांच शासन को भेज दी गई। शासन ने इस पूरे मामले में कार्रवाई के लिए डीएम मुजफ्फरनगर को पत्र लिखा था।

डीएम सीबी सिंह ने जांच में पाया कि सुशील कुमार की नियुक्ति अनियमित एवं नियमों के विपरीत हुई है। शासन को सुशील कुमार को सेवा से निष्कासन की संस्तुति की गई है। पत्र में लिखा है कि सुशील कुमार इस समय मुख्य रोकड़िया है, इस कारण उसका नियुक्ति प्राधिकारी डीएम न होकर निदेशक कोषागार है। इसलिए निष्कासन की प्रक्रिया निदेशक कोषागार पूरी करें।

जानकारी के मुताबिक कोषागार में कक्षा दस तक पढे़ प्रमोद कुमार रोकड़िया का कार्य कर रहे है। इनकी भी जांच चल रही है। जांच में इनकी शैक्षिक योग्यता पद के अनुरूप नहीं मिली। शिकायत के बाद इन पर भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

अपर निदेशक कोषागार की जांच में सुशील कुमार की नियुक्ति अवैध पाई गई है। जांच के आधार पर नियुक्ति प्राधिकारी निदेशक कोषागार को सेवा से निष्कासन की कार्रवाई के लिए संस्तुति की गई है। - सीबी सिंह, डीएम