संजय राउत को ED ने हिरासत में लिया, बोले- झुकूंगा नहीं और पार्टी भी नहीं छोड़ूंगा

घर से भगवा गमछा लहराते हुए निकले शिवसेना सांसद

 
संजय राउत

मुंबई। महाराष्ट्र में उद्धव सरकार गिरने के ठीक 31 दिन बाद उनके सबसे खास संजय राउत को ED ने हिरासत में ले लिया। मामला एक हजार करोड़ के जमीन घोटाले का हैलेकिन जांच एजेंसी जब राउत को लेकर जा रही थीतब उनके तेवर देखने लायक थे। राउत घर से निकले तो भगवा दुपट्टा लहराते नजर आए। रवाना हुए तो लग्जरी एसयूवी की छत से विक्ट्री साइन दिखाया। इतना ही नहीं, अपने समर्थकों की नारेबाजी पर मुट्ठी बांधकर दोनों हाथ हवा में लहराते रहे।

संजय राउत

हिरासत में लिए जाने के कुछ देर बाद राउत ने बाल ठाकरे और उद्धव की तस्वीर के साथ ट्वीट किया। इसमें लिखा आप उस व्यक्ति को नहीं हरा सकते जो कभी हार नहीं मानता। झुकेंगे नहीं, जय महाराष्ट्र। राउत पर ये कार्रवाई महाराष्ट्र के 1034 करोड़ के पात्रा चॉल जमीन घोटाला मामले में की गई है। ED दफ्तर पर पुलिस तैनात की गई है। राउत को 27 जुलाई को ED ने तलब किया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए थे।


इस दौरान शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि उनके खिलाफ झूठी कार्रवाई, झूठे सबूत लोगों को मार-पीटकर बनाए जा रहे हैं। ये सिर्फ महाराष्ट्र और शिवसेना को कमजोर करने के लिए है। लेकिन महाराष्ट्र और शिवसेना कमजोर नहीं होगी। संजय राउत झुकेगा नहीं और पार्टी भी नहीं छोड़ेगा।

संजय राउत

बताया जाता हैं कि शिवसेना सांसद संजय राउत को 9 घंटे की पूछताछ के बाद ED ने हिरासत में ले लिया है। भांडुप में उनके बंगले मैत्री पर सुबह सात बजे से ED की टीम पहुंची थी। 10 अफसरों ने राउत और उनके विधायक भाई सुनील राउत के कमरों की तलाशी ली। टीम ने उनसे और उनके परिवार वालों से पूछताछ की। कहा गया है कि राउत राउत जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे।

SANJAY

मामला मुंबई के गोरेगांव इलाके में पात्रा चॉल से जुड़ा है। यह महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवेलपमेंट अथॉरिटी का भूखंड है। इसमें करीब 1034 करोड़ का घोटाला होने का आरोप है। इस केस में संजय राउत की नौ करोड़ रुपये और राउत की पत्नी वर्षा की दो करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त हो चुकी है। आरोप है कि रीयल एस्टेट कारोबारी प्रवीण राउत ने पात्रा चॉल में रह रहे लोगों से धोखा किया। एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को इस भूखंड पर 3000 फ्लैट बनाने का काम मिला था। इनमें से 672 फ्लैट पहले से यहां रहने वालों को देने थे। शेष एमएचएडीए और उक्त कंपनी  को दिए जाने थे, लेकिन वर्ष 2011 में इस विशाल भूखंड के कुछ हिस्सों को दूसरे बिल्डरों को बेच दिया गया था।