लेवाना होटल कांड के बाद अयोध्या प्रशासन की टूटी नींद

होटलों और धर्मशालाओं की जांच के दौरान खुला राज

 
AYODHYA

अयोध्या। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लेवाना होटल में भीषण आग कांड के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है। रामनगरी अयोध्या जहां प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन करने आते हैं। ऐसे में अयोध्या नगरी के होटलों की जैसे ही जांच शुरू हुई तो की चौंकाने वाले सच सामने आए।

दरअसल....  रामनगरी के 5 होटलों पर फायर ब्रिगेड दस्ते ने जांच की है, फायर ब्रिगेड दस्ते के सुपरविजन कर रहे सीएफओ का कहना है कि 5 धर्मशाला और होटलों में एनबीसी 2016 के मानकों को ताक पर रखा गया है। होटलों में प्रवेश और निकास के मानकों की अनदेखी के साथ-साथ, आग से बचाव के यंत्र भी नहीं रखे गए हैं। वहीं जहां लगे भी हैं वो केवल औपचारिकता पूरी कर रहे हैं।

दरअसल लखनऊ के लेवाना होटल कांड में चार लोगों की मौत और 9 से ज्यादा लोगों के घायल होने के बाद प्रशासन की नींद टूट गई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि  आखिर प्रशासन की नींद किसी हादसे के बाद ही क्यों टूटती है। अगर भगवान ना करें लेकिन कभी लखनऊ जैसा हादसा अयोध्या में हो तो परिणाम कितना भयानक हो सकता है। होटल और धर्मशाला के संचालक श्रद्धालुओं की जान से खिलवाड़ कर मोटी कमाई करने में लगे हुए हैं, जबकि धर्म नगरी के होटलों की आमदनी श्रद्धालुओं के सहारे है।

प्रत्येक माह श्रद्धालुओं का आगमन लाखों की संख्या में होता है, इतना ही नहीं साल में पड़ने वाले 3 पारंपरिक मेले के दौरान तो होटलों में जगह तक नहीं रहती है। ऐसे में सोने पर सुहागा योगी सरकार के द्वारा मनाया जाने वाला दीपोत्सव है, जिसे देखने के लिए यहां दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं और ठीक दीपोत्सव के पहले जब फायर ब्रिगेड ने होटलों की जांच की तो प्रशासनिक कार्रवाई और सजगता को लेकर सवाल खड़े हो गए।