नई दिल्ली — भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), जो दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट शासी निकाय है, कथित तौर पर अपने प्रशासनिक और वित्तीय परिदृश्य में एक बड़े बदलाव की तैयारी में है। क्रिकेट जगत में हलचल पैदा करने वाले एक कदम के तहत, BCCI अपने वार्षिक केंद्रीय अनुबंध ढांचे (annual central contract structure) में व्यापक फेरबदल पर विचार कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली और रोहित शर्मा की वार्षिक रिटेनर फीस (सालाना वेतन) में भारी कटौती हो सकती है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित बदलावों में प्रतिष्ठित ‘ग्रेड A+’ श्रेणी को पूरी तरह समाप्त करना शामिल है। अजीत अगरकर के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय चयन समिति द्वारा अनुशंसित यह ढांचागत बदलाव, तेजी से व्यस्त होते वैश्विक क्रिकेट कैलेंडर में ‘वरिष्ठता’ के बजाय ‘सभी प्रारूपों में भागीदारी’ को अधिक महत्व देने की रणनीति का हिस्सा है।
प्रस्तावित तीन-स्तरीय ढांचा
वर्षों से, BCCI चार-स्तरीय प्रणाली के तहत काम कर रहा है, जिसे टेस्ट, एकदिवसीय (ODI) और टी20 (T20I) प्रारूपों में निरंतरता, वरिष्ठता और उपस्थिति के आधार पर खिलाड़ियों को पुरस्कृत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। वर्तमान वित्तीय वितरण इस प्रकार है:
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ग्रेड A+: 7 करोड़ रुपये प्रति वर्ष
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ग्रेड A: 5 करोड़ रुपये प्रति वर्ष
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ग्रेड B: 3 करोड़ रुपये प्रति वर्ष
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ग्रेड C: 1 करोड़ रुपये प्रति वर्ष
नए प्रस्ताव में 7 करोड़ रुपये वाले ‘A+’ ब्रैकेट को पूरी तरह से हटाने और तीन-स्तरीय मॉडल (A, B और C) पर वापस लौटने की बात कही गई है। यदि एपेक्स काउंसिल (Apex Council) इस सिफारिश को मंजूरी देती है, तो सबसे ज्यादा कमाई करने वाले और बाकी टीम के बीच का अंतर कम हो जाएगा। यह 2018 में ‘A+’ श्रेणी शुरू होने के बाद से सबसे बड़ा वित्तीय पुनर्गठन होगा।
कोहली और रोहित को ‘ग्रेड B’ का सामना क्यों करना पड़ सकता है?
इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू पूर्व कप्तानों विराट कोहली और रोहित शर्मा का संभावित डिमोशन (श्रेणी में गिरावट) है। 2024-25 के अनुबंध चक्र में, A+ श्रेणी “बिग फोर” (कोहली, शर्मा, रवींद्र जडेजा और जसप्रीत बुमराह) के लिए आरक्षित थी।
हालांकि, इस बदलाव का तर्क ‘प्रारूप विशेषज्ञता’ (format specialization) में छिपा है। 2024 में भारत की टी20 विश्व कप जीत के बाद, कोहली और शर्मा दोनों ने अंतरराष्ट्रीय टी20 प्रारूप से संन्यास ले लिया था। चूंकि ये दिग्गज अब विशेष रूप से वनडे प्रारूप और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, इसलिए चयन समिति का मानना है कि वे अब शीर्ष श्रेणी के मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं, जिसमें आमतौर पर कम से कम दो या तीनों प्रारूपों में उत्कृष्टता की आवश्यकता होती है।
नए दिशा-निर्देशों के तहत, जो खिलाड़ी टेस्ट या टी20 टीम में लगातार शामिल नहीं होते हैं, उन्हें ग्रेड B में धकेला जा सकता है, जहाँ वर्तमान में 3 करोड़ रुपये मिलते हैं—जो मौजूदा A+ वेतन से 4 करोड़ रुपये की भारी गिरावट है। भले ही BCCI ग्रेड B के आधार वेतन में वृद्धि करे, लेकिन ‘रैंक’ में यह गिरावट बहस का विषय बनी हुई है।
अजीत अगरकर की चयन समिति पर नजर
मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर इस सुधारात्मक बदलाव के केंद्र में हैं। सूत्रों का सुझाव है कि समिति “सभी प्रारूपों” (all-format) में खेलने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की इच्छुक है। शुभमन गिल और यशस्वी जायसवाल जैसे उभरते सितारों के साथ-साथ तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को नए ‘ग्रेड A’ का मुख्य लाभार्थी माना जा रहा है, क्योंकि वे खेल के सभी प्रारूपों में भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
BCCI के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “बोर्ड यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अनुबंध टीम के वर्तमान कार्यभार और भविष्य की जरूरतों को दर्शाएं। हालांकि रोहित और विराट का योगदान अतुलनीय है, लेकिन अनुबंध प्रणाली एक भविष्योन्मुखी वित्तीय उपकरण है। चयन समिति को लगता है कि A+ श्रेणी का उद्देश्य पूरा हो चुका है और तीन-स्तरीय प्रणाली अधिक न्यायसंगत है।”
अन्य श्रेणियों पर प्रभाव
इस फेरबदल का असर पूरी टीम पर पड़ेगा। वर्तमान में, ग्रेड A में मोहम्मद शमी, केएल राहुल और ऋषभ पंत जैसे बड़े खिलाड़ी शामिल हैं। ग्रेड B में टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव और स्पिन जोड़ी अक्षर पटेल और कुलदीप यादव शामिल हैं।
ग्रेड C सबसे बड़ा समूह बना हुआ है, जो रिंकू सिंह, तिलक वर्मा और संजू सैमसन जैसी उभरती प्रतिभाओं के लिए एक नर्सरी के रूप में कार्य करता है। इस बदलाव के बाद कुछ “सफेद गेंद विशेषज्ञों” (white-ball specialists) को संशोधित ग्रेड B में पदोन्नत किया जा सकता है, जबकि जो खिलाड़ी दौड़ से बाहर हो गए हैं, उन्हें अपनी योग्यता साबित करनी होगी।
BCCI अनुबंधों का विकास
BCCI ने खिलाड़ियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने और “केवल मैच-दर-मैच भुगतान” मॉडल से दूर जाने के लिए 2004 में केंद्रीय अनुबंधों की शुरुआत की थी। शुरू में केवल तीन ग्रेड थे। ‘A+’ श्रेणी बाद में उन विशिष्ट खिलाड़ियों को पहचानने के लिए जोड़ी गई थी जो सभी प्रारूपों में अपरिहार्य थे और जिनका व्यावसायिक मूल्य बहुत अधिक था।
मौजूदा प्रस्ताव के आलोचकों का तर्क है कि कोहली और शर्मा को ग्रेड B में ले जाने से उनके कद को ठेस पहुँच सकती है। हालांकि, समर्थकों का मानना है कि 2027 विश्व कप चक्र और चल रहे विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) की जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करते हुए बोर्ड के विशाल खजाने का प्रबंधन करने के लिए यह एक व्यावहारिक कदम है।
विशेषज्ञ की राय: व्यावहारिक या जोखिम भरा कदम?
क्रिकेट विश्लेषक और पूर्व दिग्गज खिलाड़ी संजय मांजरेकर ने हाल ही में अनुबंधों के बदलते स्वरूप पर टिप्पणी करते हुए कहा:
“क्रिकेट में व्यावसायिकता का अर्थ है कि पुरस्कार भागीदारी और प्रदर्शन से जुड़े होने चाहिए। यदि खिलाड़ी कुछ प्रारूपों में अपने करियर के अंत की ओर बढ़ रहे हैं, तो यह स्वाभाविक है कि अनुबंध संरचना उस बदलाव को दर्शाए। हालांकि, इन वरिष्ठ खिलाड़ियों द्वारा भारतीय क्रिकेट में लाई जाने वाली अपार ब्रांड वैल्यू के साथ इसका संतुलन बनाना भी जरूरी है।”
अंतिम निर्णय BCCI की एपेक्स काउंसिल के पास है। हालांकि वेतन कटौती की संभावना अधिक दिख रही है, लेकिन बोर्ड ‘डिमोशन’ के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए मैच फीस या प्रदर्शन-आधारित बोनस के माध्यम से वरिष्ठ खिलाड़ियों को मुआवजा दे सकता है।
