मुजफ्फरनगर में कई ग्राम प्रधानों को रास नहीं आ रहा नगर पालिका का विस्तार, दर्ज कराएंगे आपत्ति

ग्राम प्रधान बोले- हमारी प्रधानी बीच में ही चली जाएगी

 
मुजफ्फरनगर

मुजफ्फरनगर। नगर विकास अनुभाग ने नगर पालिका परिषद की सीमा विस्तार का प्रस्ताव मंजूर कर लिया है। जिसके तहत 11 गांवों को पूरी तरह से शहर में शामिल कर लिया जाएगा। 4 गांवों का आंशिक क्षेत्रफल शामिल किया जाएगा। इसके लिए शासन ने संबंधित ग्राम प्रधानों से 7 दिन के भीतर आपत्तियां मांगी थी। लेकिन अधिकतर ग्राम प्रधानों को सीमा विस्तार का प्रस्ताव रास नहीं आ रहा है। प्रधानों का मानना है कि इससे गांव वालों पर कई तरह के टैक्स लग जाएंगे। जबकि, शहर की मुख्य धारा में शामिल होने में समय लगेगा। असमय उनकी प्रधानी भी चली जाएगी।

दरअसल मंधेड़ा गांव के प्रधान नरेंद्र ने कहा कि वे इस प्रस्ताव के विरोध में जिला प्रशासन से आपत्ति लगाऊंगा। सवा साल पहले ही वे प्रधान बने। हमारे गांव में गरीब अधिक हैं। गांव नगर पालिका में शामिल हो गया, तो सभी को हाउस और वाटर टैक्स देना पड़ेगा। सुविधाएं आने में समय लगेगा। हमारी प्रधानी भी बीच में ही चली जाएगी।

वहीं सूजड़ु गांव के प्रधान महताब ने कहा कि ये एक सियासी स्टंट है। इससे गांव वालों का कोई भला नहीं होगा। टैक्स लग जाएंगे और विकास के नाम पर मामला शून्य ही रहेगा। इसलिए सोमवार को वो इस प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराएंगे। इसके साथ ही कूकड़ा गांव प्रधान मेहरदीन ने कहा कि वे और उनके गांव वाले किसी भी सूरत में इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं हैं। इससे लाभ कम और नुकसान अधिक होगा। वे इस प्रस्ताव के विरोध में आपत्ति दर्ज कराएंगे।

पूनम देवी अलमासपुर गांव की प्रधान हैं। उन्होंने कहा, "इससे गांव वालों को शहरी सुविधाएं मिल जाएंगी। लोगों को विकास की मुख्य धारा में शामिल होने का मौका मिलेगा।" गांव शहर में शामिल हो जाएगा, तो आपकी प्रधानी चली जाएगी। इस सवाल पर उन्होंने कहा, "मैं पढ़ी-लिखी हूं। हमारे पति भी पढ़े-लिखे हैं। दोनों मिलकर नौकरी कर लेंगे। हम इस बात से नहीं डरते हैं।"

बता दें कि आपत्ति निस्तारण के बाद ही सीमा विस्तार का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। नगर विकास विभाग ने जो मसविदा तैयार किया है। उसमें सबसे बड़े गांव के रूप में सूजड़ू को शामिल किया जा रहा है। कूकड़ा और सरवट भी क्षेत्रफल के हिसाब से सूची में काफी ऊपर है। शहरी सीमा में शामिल करने के लिए 15 गांव का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था