प्रतिभा देख बाबा रामदेव ने सत्य प्रकाश रेशू को लगाया गले

रेशू ने रामदेव के सामने पेश किया देश के चहुंमुखी विकास का दर्पण

 
SATYA PRAKASH

मुजफ्फरनगर की जनशक्ति, बौद्धिक शक्ति और धनशक्ति को भारत की महाशक्ति बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके लिए सत्यप्रकाश रेशू अग्रवाल ने देश के चहुंमुखी विकास का एक दर्पण पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण के समक्ष प्रस्तुत किया। जिसे 136 करोड़ भारतीयों के कल्याण का सशक्त मार्ग मानकर आचार्य ने सत्य प्रकाश रेशू अग्रवाल को योग गुरु बाबा रामदेव के पास भेज दिया। सत्यप्रकाश रेशू अग्रवाल की 136 करोड़ भारतीयों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को समझकर योग गुरु ने उन्हें गले लगाते हुए अपना आर्शीवाद दिया।

Satya Prakash Reshu

योगगुरु बाबा रामदेव के समक्ष पेश किए विश्व के सबसे ज्यादा उभरते हुए विज्ञापन व्यवसाय से सरकार अरबों रुपये की धनराशि कैसे बचा सकती है? कैसे कमा सकती है ? जिससे सरकार आम जनता और उत्पादक का तो सीधा-सीधा लाभ होगा। इस विज्ञापन की तीन गुणों वाली योजना को शीघ्र ही भारत सरकार के समक्ष रखा जाएगा। जिससे सुंदरता एवं व्यवस्था को भी चार चांद लगेगें। सत्यप्रकाश रेशू की तीन गुणों वाली विज्ञापन खोज को गहराई से समझकर बाबा ने बहुत प्रसन्नता जताई।

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कण्व आश्रम कोटद्वार का वो पुण्य स्थल है। जहां भारत का नाम भारत रखा गया और 136 करोड़ भारतीयों की भावनाएं कण्व आश्रम के जीर्णोद्धार से जुड़ी है। कण्व आश्रम के जीर्णोद्धार के लिए सत्य प्रकाश रेशू ने एक मॉडल योग गुरु के सामने रखा. जिसे बाबा रामदेव ने अच्छे से समझ कर सभी भारतीय को कण्व आश्रम से जोड़ने की बात पर सहमति जताई। ताकि सभी भारतीय कण्व आश्रम पर अपना माथा टेक सके। जहां भारत का नाम भारत रखा गया और भारत के चहुंमुखी विकास का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।

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सत्यप्रकाश रेशू ने बाबा रामदेव के समक्ष लगभग उन 40% मतदाताओं का मतदान सुनिश्चित कराने की बात को भी अपने विचारों के साथ रखा। जिससे लगभग 95% तक मतदान अब संभव होगा। बाबा रामदेव ने मतदान के विषय पर अनेकों तर्क-वितर्क के साथ मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए सत्य प्रकाश रेशू को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। इसके साथ ही 14 जुलाई 2022 को स्वामी कल्याण देव की पुण्यतिथि पर योग गुरु रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को शुकतीर्थ आने के लिए आमंत्रित किया। साथ ही शुक्रताल को भी हरिद्वार की तरह विकसित करने एवं गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की भी चर्चा हुई। शुकतीर्थ की धार्मिक मान्यता को और अधिक मजबूती देने के लिए गंगा की धारा को शुकतीर्थ में लाने पर भी गहन वार्ता हुई।