कुत्ते काटने के मामले में नगर निगम ने लिया संज्ञान

शहर के पालतू कुत्तों में है 56 फीसदी खतरनाक नस्ल की प्रजाति

 
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  • रिपोर्टः अजीत रावत

गाजियाबाद शहर मैं बढ़ते कुत्ते काटने के मामले मैं अब नगर निगम द्वारा संज्ञान लेकर शहर वासियों को इस परेशानी से मुक्त करने की कवायद पर अमलीजामा पहनाया जा रहा है। शहर के लोग खतरनाक मानी जाने वाली रॉटविलर, साइबेरियन हस्की, जर्मन शेफर्ड जैसी नस्लों के कुत्तों को पालना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसका पता नगर निगम में कराए गए कुत्तों के पंजीकरण से चला है। शहर में कुल 20 हजार से ज्यादा कुत्ते हैं। इनमें से अब तक कुल 2600 का पंजीकरण हुआ है। इनमें 1456 खतरनाक नस्ल के हैं। शहर में कुल 70 नस्लों के कुत्ते पाले जा रहे हैं।

दरअसल.... जिस पिटबुल नस्ल के कुत्ते ने संजय नगर के पार्क में दस साल के कुश त्यागी पर हमला किया, उस नस्ल के सिर्फ 22 कुत्तों का ही पंजीकरण कराया गया है। इस हमले के बाद ही निगम ने सख्ती दिखाई। जिसके बाद सात दिन में 600 कुत्तों का पंजीकरण हुआ है। पंजीकृत कुत्तों में पिटबुल, रॉट विलर, बॉक्सर, जर्मन शेफर्ड, ग्रेटडेन, बुल मेस्टिफ जैसी विदेशी और गुस्सैल नस्ल के शामिल हैं। हालांकि, पहले नंबर पर शांत मानी जाने वाली नस्ल लेब्राडोर है जिसके 793 कुत्ते पंजीकृत हैं।

नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तवर का कहना है कि शहर में आक्रामक प्रजाति के कुत्तों के पालने का चलन बढ़ा है। ऐसे कुत्तों को प्रशिक्षण दिलाया जाना अनिवार्य किए जाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि इनको नियंत्रण में रखा जा सके साथ ही गली मोहल्ले में पल रहे आवारा कुत्तों की भी गिनती और जांच की जा रही है साथ ही ऐसे कुत्ते जिनकी काटने की शिकायत मिल रही है उनको उपचार कराकर ही गली मोहल्ले में भेजा जा रहा है।

इसी तरह की अन्य नस्ल पॉमेरियन, पग, पूडल, ल्हासा के कुत्ते कम संख्या में हैं। पंजीकृत कुत्तों में बुल टेरियर नस्ल के 13, बुलडॉग के नौ, बुल मेस्टिफ के 10, डॉलमिशन के 13, ग्रेटडेन के 10, मेस्टिफ के 10, सेंट बर्नाड 16, तिब्बतियन मेस्टिफ का एक और स्टेफोर्डशेर बुल टेरियर के आठ हैं