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ICC और खिलाड़ियों के संघ के बीच ‘शोषणकारी’ शर्तों पर विवाद

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नई दिल्ली — 2026 पुरुष टी20 विश्व कप से पहले क्रिकेट की दुनिया में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और वर्ल्ड क्रिकेटर्स एसोसिएशन (WCA) के बीच खिलाड़ियों की भागीदारी की शर्तों को लेकर ठन गई है। वैश्विक खिलाड़ी संघ (WCA) ने आईसीसी पर “शोषणकारी” शर्तें लागू करने का आरोप लगाया है, जो खिलाड़ियों के डेटा स्वामित्व और उनकी छवि (NIL) के व्यावसायिक अधिकारों के लिए खतरा पैदा करती हैं।

यह नया विवाद बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर किए जाने के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है, जो खेल की शासी निकाय और इसके मुख्य हितधारकों—खिलाड़ियों—के बीच बढ़ते तनाव का संकेत है।

विवाद की जड़: भरोसे में कमी?

असली विवाद भारत और श्रीलंका में होने वाले आगामी टी20 विश्व कप की “स्क्वाड पार्टिसिपेशन टर्म्स” (Squad Participation Terms) को लेकर है। डब्लूसीए (WCA) के अनुसार, कई देशों के खिलाड़ियों को भेजी गई शर्तें 2024 में दोनों संगठनों के बीच हुए समझौते से काफी अलग हैं।

डब्लूसीए का आरोप है कि आईसीसी उन सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने की कोशिश कर रही है जो पहले तय किए गए थे। दूसरी ओर, आईसीसी ने यह कहकर अपना बचाव किया है कि 2024 का समझौता केवल आठ “राष्ट्रीय शासी बोर्डों” (जैसे ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका आदि) पर लागू था, और अन्य भागीदार इसके दायरे में नहीं आते। डब्लूसीए ने इस “दोहरे मापदंड” का विरोध करते हुए कहा है कि यह समझौता वैश्विक निकाय से जुड़े सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

विवाद के तीन मुख्य बिंदु

यह संघर्ष मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर केंद्रित है जो एक पेशेवर क्रिकेटर की पहचान और डेटा के प्रबंधन को परिभाषित करते हैं:

  1. नाम, छवि और समानता (NIL) अधिकार: डब्लूसीए का कहना है कि आईसीसी का नया ड्राफ्ट राष्ट्रीय बोर्डों को खिलाड़ियों की सहमति के बिना उनकी छवियों को तीसरे पक्ष को लाइसेंस देने की अनुमति देता है। 2024 के समझौते में इसे केवल आईसीसी के आधिकारिक भागीदारों तक सीमित रखा गया था।

  2. डेटा स्वामित्व: डिजिटल युग में प्रदर्शन डेटा बहुत मूल्यवान है। डब्लूसीए का तर्क है कि आईसीसी खुद को इस डेटा का “मालिक” बनाना चाहती है, जबकि पहले तय हुआ था कि इसका असली मालिक खिलाड़ी होगा और इसके व्यावसायिक उपयोग के लिए उसकी सहमति अनिवार्य होगी।

  3. मौन सहमति (Deemed Acceptance): सबसे विवादित बात यह है कि आईसीसी की शर्तों के अनुसार, यदि कोई खिलाड़ी टूर्नामेंट में खेलता है, तो यह मान लिया जाएगा कि उसने शर्तें स्वीकार कर ली हैं, भले ही उसने हस्ताक्षर न किए हों। डब्लूसीए हर टूर्नामेंट के लिए अलग से हस्ताक्षर की मांग कर रहा है।

“सबसे कमजोर” खिलाड़ियों की सुरक्षा

डब्लूसीए के सीईओ टॉम मोफ़ैट ने इसे आईसीसी द्वारा उभरते देशों के खिलाड़ियों का फायदा उठाने की कोशिश करार दिया है।

“आईसीसी द्वारा दी गई शर्तें छवि और व्यावसायिक उपयोग के मामले में खिलाड़ियों के अधिकारों और सुरक्षा को काफी कम करती हैं। यह विशेष रूप से चिंताजनक है कि सबसे कमजोर खिलाड़ी समूहों को निशाना बनाया जा रहा है और उनसे अलग शर्तों पर खेलने की उम्मीद की जा रही है,” टॉम मोफ़ैट, सीईओ, वर्ल्ड क्रिकेटर्स एसोसिएशन।

एसोसिएट देशों के कई खिलाड़ियों के लिए आईसीसी टूर्नामेंट ही आय का मुख्य स्रोत होता है। मोफ़ैट का तर्क है कि आईसीसी इसी वित्तीय निर्भरता का फायदा उठाकर खिलाड़ियों को उनके अधिकारों के “असीमित” व्यावसायिक उपयोग के लिए मजबूर कर रही है।

बांग्लादेश निष्कासन विवाद

यह विवाद उस समय गहराया है जब बांग्लादेश को 2026 टूर्नामेंट से बाहर कर उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत का दौरा करने से इनकार कर दिया था। आईसीसी द्वारा मैचों को तटस्थ स्थान पर ले जाने के अनुरोध को ठुकराने के बाद बांग्लादेश को हटना पड़ा। मोफ़ैट ने इसे खेल के लिए एक “दुखद क्षण” बताया है।

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