ये है मुजफ्फरनगर की 6 विधानसभाओं पर BJP प्रत्याशियों का हाल... पढ़िए प्रधान संपादक अमित सैनी की खास रिपोर्ट

'हेलीकॉप्टर प्रत्याशी' मोदी-योगी के काम पर कर रहा है जीत का दावा तो कोई खुद ही कह रहा है कि 'मेरा नहीं क्षेत्र में विरोध'
 
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मुजफ्फरनगर की सभी 6 विधानसभाओं पर बीजेपी द्वारा घोषित किए गए प्रत्याशियों का गजब का हाल है। बाहरी प्रत्याशी जहां मोदी-योगी के नाम पर खुद की जीत का दावा कर रहा है तो वहीं एक प्रत्याशी अपने ही मुंह से कह रहा है कि वो इसलिए जीतेगा, क्योंकि उसमें काबिलियत है और उसका क्षेत्र में विरोध नहीं है। क्या है हाल-ए-मंज़र... पढ़िए झनझनाती ये रिपोर्ट...

  • प्रधान संपादक की कलम स्पेशल रिपोर्ट...

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। बीजेपी की इस पहली ही लिस्ट में मुजफ्फरनगर जिले की सभी 6 विधानसभा सीटों के उम्मीदवारों के भी नाम शामिल है। खास बात ये है कि जिले की 6 सीटों में से 5 पर रिपीट उम्मीदवार है, जिनमें पूर्व राज्यमंत्री स्वर्गीय विजय कश्यप की बीवी सपना कश्यप भी शामिल है। केवल मीरापुर विधानसभा सीट पर रिपीट प्रत्याशी नहीं है, बल्कि इस बार भी बीजेपी ने इस सीट पर बाहरी व्यक्ति पर ही दांव खेला है। पिछली बार इस सीट से बीजेपी के सिंबल पर अवतार सिंह भड़ाना जीतकर गए थे। जिन्होंने जीत के बाद मीरापुर की तरफ मुड़कर भी नहीं देखा।

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कपिलदेव अग्रवाल पर तीसरी बार दांव
बीजेपी ने मुजफ्फरनगर सदर सीट पर तीसरी बार कपिलदेव अग्रवाल पर दांव खेला है। सदर सीट से दूसरी बार विधायक बने कपिलदेव अग्रवाल फिलहाल राज्यमंत्री है। सपा सरकार में राज्यमंत्री रहते हुए चित्तरंजन स्वरूप का निधन हो गया था, जिसके बाद उपचुनाव में बीजेपी ने पहली बार कपिलदेव अग्रवाल को चुनाव मैदान में उतारा था। उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने कपिलदेव अग्रवाल पर ही भरोसा जताया और मोदी की सुनामी में उनके सिर पर दूसरी बार जीत का सेहरा बंधा। अब तीसरी बार वो फिर से चुनाव मैदान में हैं।

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'पार्टी हाईकमान ने मुझ पर तीसरी बार भरोसा जताया है। इसके लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं और विश्वास दिलाता हूं कि पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करूंगा।' -कपिलदेव अग्रवाल, बीजेपी प्रत्याशी, मुजफ्फरनगर सदर सीट

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मीरापुर में फिर से 'उड़नखटोला प्रत्याशी'
भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर से मीरापुर विधानसभा सीट पर बाहरी व्यक्ति को प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है। 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से अवतार सिंह भड़ाना को बीजेपी ने चुनाव लड़वाया था, जो कि चुनाव जीतने के बाद वापस लौटकर क्षेत्र में नहीं आया। इस बार फिर से प्रशांत गुर्जर को बीजेपी ने मीरापुर सीट से चुनाव मैदान में उतारकर पार्टी कार्यकर्ताओं को नाराज़ कर दिया है। जनता-जर्नादन ही नहीं बल्कि पार्टी के कार्यकर्ता भी प्रशांत गुर्जर के नाम को लेकर बेहद नाराज़ है। जिसका उदाहरण मोरना में उस वक्त देखने को मिला जब शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रशांत गुर्जर का पुतला दहन कर अपना विरोध जताया। आपको बता दें कि प्रशांत गुर्जर उर्फ प्रशांत चौधरी बीजेपी से पहले बीएसपी में थे। पूर्व बीएसपी एमएलसी प्रशांत गुर्जर की बीवी हेमलता चौधरी बीएसपी के टिकट पर 2012 में बागपत से विधायक बनी थी, जबकि 2017 का चुनाव वो गढ़ सीट पर हार गई थी। हालांकि प्रशांत गुर्जर बागपत सीट से ही दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन पार्टी हाईकमान ने उन्हें मीरापुर सीट पर प्रत्याशी बनाकर भेजा है। 

'चुनाव लड़ रहे हैं... चुनाव जीतेंगे। मोदी जी-योगी जी के काम चुनाव जीताएंगे हमे। जनता का प्यार मिलेगा। हम अवतार सिंह भड़ाना तो है नहीं। वो जीतकर जनता के साथ विश्वासघात करके भाग गए। हम जीतने के बाद जनता के बीच में रहकर कार्य करेंगे।' -प्रशांत गुर्जर उर्फ प्रशांत चौधरी, बीजेपी प्रत्याशी, मीरापुर विधानसभा 

हालत ये है कि बीजेपी ने जिसे मीरापुर सीट से प्रत्याशी बनाया है, उसे जिलाध्यक्ष तक नहीं जानते। उन्होंने साफ तौर पर ये कहा कि वो ना तो प्रशांत गुर्जर को जानते हैं कि वो कौन है और कहां के रहने वाले हैं। 


'मैं प्रशांत गुर्जर को नहीं जानता कि वो कौन है और कहां का रहने वाला है।' -विजय शुक्ला, बीजेपी जिलाध्यक्ष, मुजफ्फरनगर

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विक्रम सैनी को भी दूसरा मौका
भारतीय जनता पार्टी ने विधायक विक्रम सैनी को खतौली विधानसभा से दूसरी बार चुनाव लड़ने का मौका दिया है। 'कवाल कांड' के बाद 'गरीब परिवार से' होने की दुहाई देकर जिला पंचायत सीट जीतने वाले विक्रम सैनी को 2017 के चुनाव में बीजेपी ने खतौली सीट से ही चुनाव मैदान में उतारा था। इस सीट पर 'कवाल कांड' के बाद 'सांप्रदायिक दंगे के प्रभाव, मोदी की विजयी सुनामी और 'गरीब का बेटा हूं' की बिनाह पर जीत दर्ज करने वाले विक्रम सैनी का भी जमकर विरोध हो रहा है। बावजूद इसके पार्टी हाईकमान ने अपने कार्यों के लिए नहीं, बल्कि विवादित बयानबाजी देकर चर्चा बटोरने वाले विक्रम सैनी पर भरोसा जताया है।

'मुझे पार्टी ने इस लायक समझा कि मैं दोबारा भी चुनाव जीत जाऊंगा, इसलिए मुझे टिकट दिया गया है। मैंने क्षेत्र में काम कराए हैं। मैंने जनता को खुश किया है। मेरा विरोध नहीं है जनता में।' -विक्रम सैनी, बीजेपी प्रत्याशी, खतौली विधानसभा

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प्रमोद उंटवाल की 'सुरक्षित सीट'
उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए सुरक्षित सीटों में से एक पुरकाजी विधानसभा पर इस बार भी बीजेपी ने प्रमोद उंटवाल को ही टिकट दिया है। वर्तमान विधायक प्रमोद उंटवाल भी मोदी की विजयी सुनामी में बहकर जीते थे। हालांकि पुरकाजी विधानसभा के कई गांवों में विधायक के कार्यकाल में हुए कामकाज को लेकर लोग खुश नहीं है। कई गांवों में तो भारी विरोध भी देखने को मिल रहा है। बावजूद इसके बीजेपी ने पुरकाजी विधानसभा सीट उनके लिए सुरक्षित रखी।


'इसके लिए मैं पार्टी का आभारी हूं कि मुझ पर दोबारा विश्वास जताया। मैं पार्टी हाईकमान का धन्यवाद करता हूं।' -प्रमोद उंटवाल, बीजेपी प्रत्याशी, पुरकाज़ी विधानसभा

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विजय कश्यप की बीवी सपना पर भरोसा
मुजफ्फरनगर की चरथावल सीट से पार्टी ने पूर्व राज्यमंत्री स्वर्गीय विजय कश्यप की धर्मपत्नी सपना कश्यप पर भरोसा जताया है। कोरोना की दूसरी लहर में योगी सरकार में मंत्री रहते हुए विजय कश्यप की मौत हो गई थी, जिसके बाद पार्टी ने उनकी पत्नी सपना कश्यप को उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का सदस्य बनाया दिया था। जिसके बाद अब उन्हें पति विजय कश्यप की जगह चरथावल विधानसभा से चुनाव मैदान में उतारा गया है। हालांकि इससे पहले इस सीट से गन्ना मंत्री सुरेश राणा के चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही थी। आपको ये भी बता दें कि सपना कश्यप से पहले नरेंद्र कश्यप (प्रदेशाध्यक्ष, बीजेपी पिछड़ा मोर्चा) का नाम चरथावल से फाइनल माना जा रहा है। जैसे ही नरेंद्र कश्यप का नाम चर्चा में आया तो क्षेत्र के लोगों ने बाहरी व्यक्ति बताकर घोर विरोध करना शुरू कर दिया था।

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बुढ़ाना पर फिर से उमेश मलिक काबिज़
तमाम अटकलों और विरोधी खेमों की चुगलबाज़ी के बावजूद मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना सीट पर काबिज़ रहने में विधायक उमेश मलिक कामयाब रहे। पार्टी हाइकमान ने एक बार फिर से बुढ़ाना विधानसभा सीट पर उमेश मलिक को उतारा है। हालांकि उमेश मलिक 2012 में भी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़कर हार चुके हैं। आपको ये भी बता दें कि प्रमोद उंटवाल और विक्रम सैनी के साथ-साथ उमेश मलिक के खिलाफ भी उनके क्षेत्र में काफी विरोध देखने को मिल रहा है। जिसकी बानगी गत दिनों भारतीय किसान यूनियन की राजधानी कहे जाने वाले सिसौली गांव में उस वक्त देखने को मिली थी, जब उमेश मलिक के काफिले पर नाराज़ लोगों ने हमला बोल दिया था! लगातार दोबारा टिकट फाइन होने और उठ रहे विरोधाभाषी स्वरों पर विधायक उमेश मलिक से उनका पक्ष जानने की खातिर कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव करने तक की जरूरत नहीं समझी।