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ITC के शेयरों में गिरावट से LIC को बड़ा घाटा

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भारतीय शेयर बाजार के लिए 2026 की शुरुआत उतार-चढ़ाव भरी रही। सिगरेट पर सरकार द्वारा लगाए गए नए उत्पाद शुल्क (excise duty) के कारण आईटीसी लिमिटेड (ITC Limited) के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे कंपनी के बाजार मूल्यांकन में अरबों रुपये की कमी आई। इस गिरावट का सबसे बड़ा असर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) पर पड़ा है, जिसे केवल दो कारोबारी सत्रों में अपने निवेश के मूल्य में ₹11,500 करोड़ से अधिक का घाटा झेलना पड़ा।

यह गिरावट तंबाकू उत्पादों के कराधान के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा किए गए नीतिगत बदलावों का परिणाम है। जैसे ही सरकार ने सिगरेट पर संशोधित उत्पाद शुल्क संरचना पेश की, निवेशकों में आईटीसी के मुख्य राजस्व स्रोत—सिगरेट व्यवसाय—पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई।

दो दिनों की बाजार में तबाही

1 और 2 जनवरी 2026 के बीच आईटीसी के स्टॉक में 14% तक की भारी गिरावट देखी गई। गुरुवार को, शेयर ₹345.25 के 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया, हालांकि बाद में मामूली सुधार के साथ यह ₹350.10 पर बंद हुआ। इस अस्थिरता ने कंपनी के कुल बाजार पूंजीकरण (market cap) से ₹72,000 करोड़ का सफाया कर दिया, जो अब लगभग ₹4,38,639 करोड़ रह गया है।

पिछले पांच दिनों में स्टॉक 13% से अधिक और पिछले छह महीनों में 15% से अधिक गिर चुका है। विश्लेषकों का सुझाव है कि उत्पाद शुल्क में वृद्धि से कंपनी को कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे बिक्री की मात्रा (volume growth) प्रभावित हो सकती है।

LIC और सरकारी बीमा कंपनियों को हुआ नुकसान

वित्तीय वर्ष 2026 की जुलाई-सितंबर तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, आईटीसी में 100% हिस्सेदारी सार्वजनिक शेयरधारकों के पास है और इसमें कोई प्रमोटर समूह नहीं है। एलआईसी के नेतृत्व में सरकारी वित्तीय संस्थानों के पास कंपनी का एक बड़ा हिस्सा है।

कुल मिलाकर, केवल 48 घंटों के भीतर इन तीन दिग्गज सरकारी बीमा कंपनियों की संपत्ति में ₹13,740 करोड़ से अधिक की कमी आई।

कारण: तंबाकू उत्पाद शुल्क में संशोधन

इस भारी बिकवाली का मुख्य कारण राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (NCCD) और सिगरेट पर विशिष्ट उत्पाद शुल्क को समायोजित करने का सरकार का निर्णय था। सरकार अक्सर राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ तंबाकू के सेवन को कम करने के लिए इस तरह के कदम उठाती है।

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार ने कहा, “बाजार शुल्क वृद्धि की मात्रा से अचंभित रह गया। हालांकि आईटीसी ने अतीत में लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालकर लचीलापन दिखाया है, लेकिन दोहरे अंकों की गिरावट मुद्रास्फीति के माहौल में बिक्री घटने के डर को दर्शाती है।”

आईटीसी की अनूठी संरचना और इतिहास

आईटीसी लिमिटेड, जो पहले इंपीरियल टोबैको कंपनी ऑफ इंडिया थी, अपनी उच्च लाभांश उपज (dividend yield) के कारण निवेशकों की पसंदीदा रही है। हालांकि, सिगरेट खंड पर इसकी भारी निर्भरता—जो इसके कुल लाभ (EBIT) में 80% से अधिक का योगदान देती है—इसे कर परिवर्तनों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है।

हाल के वर्षों में, आईटीसी ने अपने जोखिम को कम करने के लिए “तंबाकू से एफएमसीजी” विविधीकरण रणनीति को आक्रामक रूप से अपनाया है। होटलों और पेपरबोर्ड व्यवसायों में सफलता के बावजूद, यह स्टॉक अभी भी भारत में तंबाकू नियमों का बैरोमीटर बना हुआ है। वर्तमान बिकवाली के बाद आईटीसी का पी/ई (P/E) अनुपात 22.59 पर आ गया है, जो इसे आकर्षक मूल्यांकन वाला स्टॉक बनाता है, भले ही इसके साथ नियामक चुनौतियां जुड़ी हों।

निष्कर्ष और भविष्य का दृष्टिकोण

भारी घाटे के बावजूद, एलआईसी जैसे संस्थागत निवेशक आमतौर पर लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां आईटीसी के शेयरों में गिरावट आई, वहीं एलआईसी का अपना शेयर 2 जनवरी को लगभग 1% बढ़कर ₹861 पर बंद हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि एलआईसी का पोर्टफोलियो काफी विविधतापूर्ण है, जिससे अन्य शेयरों में लाभ और मजबूत प्रीमियम संग्रह विशिष्ट होल्डिंग्स में होने वाली गिरावट की भरपाई कर देते हैं।

अब सभी की निगाहें आईटीसी के आगामी तिमाही नतीजों पर टिकी होंगी ताकि यह देखा जा सके कि प्रबंधन नई वित्तीय चुनौतियों का सामना कैसे करता है।

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