Exclusive: पंकज अग्रवाल ने ठुकराया सपा-रालोद का ऑफर, 'अभिमन्यु' बनने से किया इनकार!

सदर सीट से चुनाव मैदान में उतारने का था प्लान, पंकज अग्रवाल के इनकार से फ्लॉप हुआ सपा-रालोद गठबंधन का प्लान
 
Pankaj Agarwal
'बनिया-ब्राह्मण' केंद्रित मुजफ्फरनगर सदर सीट से पूर्व पालिकाध्यक्ष पंकज अग्रवाल को चुनाव मैदान में उतारने के सपा-रालोद गठबंधन के मंसूबों पर उस वक्त पानी फिर गया, जब पंकज ने चुनाव लड़ने से ही इनकार कर दिया। क्या है पूरा मामला... पढ़िए समाचार टुडे के प्रधान संपादक अमित सैनी की इस खास रिपोर्ट में...

  • रिपोर्टः अमित सैनी, प्रधान संपादक

मुजफ्फरनगर। सदर सीट से बीजेपी का 'तिलिस्म' तोड़ने के लिए तैयार किया जा रहा सपा-रालोद का 'हथियार' फुस्स हो गया है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने सपा-रालोद का 'अभिमन्यु' बनने से स्पष्ट इनकार करते हुए ऑफर ठुकरा दिया है! सपा-रालोद पूर्व चेयरमैन को मौजूदा विधायक एवं राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल को चित करने के मकसद से सदर सीट के राजनीतिक अखाड़े में उतारना चाहती थी, मगर काफी मान-मनोव्वल के बाद भी पंकज अग्रवाल ने हामी नहीं भरी। पंकज अग्रवाल को खुद समाजवादी पार्टी के मुखिया एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ बुलाया था। इस मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव ने उन्हे सदर सीट का टिकट ऑफर किया, लेकिन पंकज ने चुनाव लड़ने से साफ मना कर दिया।

kapil dev and pankaj agarwal

मुजफ्फरनगर की सदर सीट को लेकर राजनीतिक गलियारे में खूब चर्चा हो रही है। एक तरफ सत्ताधारी बीजेपी है तो दूसरी तरफ सपा-रालोद गठबंधन है... और 'दोनों' ही पार्टियां एक-दूसरे को राजनीतिक जमीन पर पटखनी देने के लिए राजनैतिक सूरमाओं की तलाश में हैं। जहां तक बीजेपी का सवाल है... अभी तक इस सीट पर राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल को ही मजबूत दावेदार माना जा रहा है, हालांकि अभी तक कोई घोषणा नहीं हुई है और कपिलदेव अग्रवाल के अलावा भी कई दिग्गज़ कतार में लगे हैं। चूंकि मुजफ्फरनगर की सदर सीट परंपरागत रूप से बनिया सीट कहलाई जाती है और पूरे जनपद की राजनीतिक दिशा भी निर्धारित करती है। यही वजह है कि सदर सीट को अपनी झोली में डालने के लिए समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहता। इसीलिए पार्टी हाईकमान ऐसे चेहरे की तलाश में है जो बीजेपी को मात दे सके। इसी तलाश के दौरान सपा-रालोद को पंकज अग्रवाल एक आस के रूप में नज़र आए।। मगर उनके इनकार कर देने के बाद फिर से दोनों ही पार्टी हाईकमान पेशोपेश में हैं और टक्कर का कंडीडेट तलाश कर रही है।

'मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं। ऑफर जरूर था, लेकिन फिलहाल मेरा मन राजनीति करने का नहीं है। मैं स्पष्ट रूप से इनकार कर चुका हूं। मेरा पूरा ध्यान अपने व्यापार और परिवार पर है।' -पंकज अग्रवाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष, मुजफ्फरनगर

amit garg

अमित गर्ग पर भी 'डोरे'

ऐसा नहीं है कि केवल पंकज अग्रवाल को पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ाने का ऑफर दिया गया हो। इनके अलावा पश्चिम प्रदेश में अपनी अलग छाप छोड़ने वाले स्वर्गीय नेकीराम गर्ग के बेटे और प्रतिष्ठित व्यापारी नेता अमित गर्ग को भी राष्ट्रीय लोक दल की तरफ से ऑफर दिया गया, लेकिन उन्होंने राजनीति में कदम रखने से ही इनकार कर दिया।

'फिलहाल मेरा राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है। मैं पूर्ण रूप से अपने व्यापार को समर्पित हूं।' -अमित गर्ग, व्यापारी नेता

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ये भी हैं कतार में...

पूर्व राज्यमंत्री स्वर्गीय चितरंजन स्वरूप के बेटे गौरव स्वरूप के अलावा उनका भाई बंटी स्वरूप भी सपा-रालोद गठबंधन से सदर सीट पर चुनाव लड़ने के लिए अपनी-अपनी दावेदारी ठोके हुए हैं। दोनों भाईयों का एक साथ चुनाव मैदान में उतरने... एक ही सिंबल और एक ही सीट पर चुनाव लड़ने की मंशा की वजह से शायद ही किसी को टिकट मिले। वहीं दूसरी तरफ राकेश शर्मा भी ब्राह्मणों की तरफ से खुद को मजबूत कंडीडेट साबित करने की जुगत लगा चुके और एक सम्मेलन कर जबरदस्त भीड़ भी जुटा चुके हैं। लेकिन इन सबके बीच पंकज अग्रवाल अथवा अमित गर्ग को पार्टी हाईकमान द्वारा चुनाव मैदान में उतारने की मंशा कहीं ना कहीं ये साबित करती है कि बनिया-ब्राह्मण कंडीडेट को लेकर अभी भी सपा-रालोद असमंजस की स्थिति में है।

payal maheshwari

पायल माहेश्वरी के बीच में आया 'शर्मा'

हर दावेदार खुद को मजबूत कंडीडेट और अपने पास हर वर्ग का वोटर होने का दंभ भर रहा है, जिसकी बानगी मुजफ्फरनगर शहर में लगे पायल माहेश्वरी के होर्डिग्स के रूप में देखने को मिल रही है। कल तक पायल अपने नाम के पीछे केवल माहेश्वरी लगाती थी, लेकिन अब उनके नाम के पीछे और माहेश्वरी से पहले शर्मा भी जुड़ गया है। माना जा रहा है कि बनिया-ब्राह्मण वोटर जिस कंडीडेट को मिल जाएगा, उसकी फतह निश्चित है। शायद ये ही वजह है कि पायल अब खुद को बनिया और ब्राह्मणदोनों साबित करने में जुटी हुई है। ताकि पार्टी हाईकमान की नज़र में वो मजबूत कंडीडेट साबित हो सके और टिकट पर भी उनकी मजबूत दावेदारी हो जाए।

Ram Niwas Pal

'पाल' को लेकर भी हलचल

इन तमाम चर्चाओं के बीच एक नाम और भी उभरकर सामने आ रहा है... और वो है राम निवास पाल। जी हां... पाल समाज से ताल्लुक रखने वाले राम निवास पाल बहुजन समाज पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष, पूर्व कॉर्डिनेटर एवं पूर्व विधानसभा प्रभारी है। वो भी सदर सीट से रालोद-सपा गठबंधन पर चुनाव मैदान में उतरने के लिए आतुर है और अपनी मजबूत दावेदारी भी पेश कर चुके है।