मुजफ्फरनगर में रोहाना टोल प्लाजा पर भाकियू का चक्का जाम, अग्निपथ पर बोले राकेश टिकैत

15 सूत्रीय मांगों को लेकर सीओ को सौंपा ज्ञापन

 
मुजफ्फरनगर भाकियू

  • रिपोर्टः गोपी सैनी

मुजफ्फरनगर। नगर कोतवाली इलाके के रोहाना टोल प्लाजा पर भारतीय किसान यूनियन ने धरना प्रदर्शन करते हुए एक ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम सीओ को सौंपा। जिसमें उन्होंने अपनी 15 सूत्रीय मांगों का अवलोकन करते हुए पीएम मोदी को बताया कि भाकियू पिछले 36 सालों से देश-दुनिया के खेती-किसानी के मुद्दों पर आंदोलनरत है। मौजूदा दौर में देश की आर्थिक हालात को केवल कृषि ने ही अपने दम पर संभाला है। ये किसी भी कृषि प्रधान देश के लिए गर्व की बात है। लेकिन मौजूदा समय में किसान घाटे में जाती खेती की वजह से संकट का सामना कर रहा है।

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि खेती से आय लगातार घट रही है. और इसकी वजह से वे शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर है। सही सरकारी नीतियों को लागू न करने से वे खुद को ठगा महसूस कर रहे है। इस दौरान भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने धर्म में आमजन को संबोधित करते हुए कहा कि मुद्दे तो किसानों के कई हैं। लेकिन फिलहाल सरकार अपने द्वारा किए गए वादे को याद करें और किसान हित में लागू करें।

एमएसपी गारंटी कानून बनाने के मामले में केंद्र सरकार की ओर से ऐसी कमेटी बनाई गई है। जिस पर संयुक्त किसान मोर्चा को विश्वास ही नहीं है। कमेटी में उन नौकरशाहों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को अधिक स्थान दिया गया। जो तीन कानूनों के प्रबल समर्थक रहे। ऐसे में उनसे किसान हितों के लिए एमएसपी पर कोई सही फॉर्मूला देने की संभावना नहीं है। इसलिए इस कमेटी को सिरे से नकारने के अलावा भाकियू के पास अन्य विकल्प नहीं है। हमारी एकमात्र मांग एमएसपी गारंटी कानून को अमल में लाने की दिशा में पहल की जाए।

फसलों के उचित लाभकारी मूल्य के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को केंद्र सरकार लागू करे। इसके लिए सी 2+50 के फॉर्मूले को लागू किया जाए। सात राज्य सूखे की चपेट में हैं और करीब 6 राज्य बाढ़ की चपेट में हैं। ऐसे में फसलें चौपट हो गई हैं। किसानों को धन-जन के अलावा पशुओं की हानि हुई है। सरकार तत्काल ग्राम स्तर पर नुकसान का आंकलन कर किसानों को तत्काल उचित मुआवजे की व्यवस्था करे।

अग्निपथ योजना से मात्र चार साल बाद चयनित में से 75 फीसदी जवानों की छंटनी से देश के युवा बेरोजगार होंगे। उनके भविष्य और देश की उन्नति के लिए युवाओं को देश की अन्य एजेंसियों जैसे पुलिस, अर्धसैनिक बलों में प्राथमिकता के आधार पर अनिवार्य तौर पर चयनित किया जाए। साथ ही चयन न होने तक की दिशा में उन्हें बेरोजगारी भत्ता भी दिया जाए। देश में एक अलग से किसान आयोग का गठन किया जाए।

छठी मांग हैं कि देश के कई राज्यों में भूमि अधिग्रहण को लेकर चल रहे किसान आंदोलनों के मद्देनजर सरकार एकरूप पॉलिसी के आधार पर किसानों की भूमि अधिग्रहीत करे और मांग के अनुरूप मुआवजा राशि सर्किल रेट से चार गुना अधिक किसानों को दिलाने की दिशा में प्रयास करे। सात राज्यों में किसानों को बिजली मुफ्त में देने का काम राज्य सरकार कर रही हैं। बाकी राज्यों में भी किसानों को मुफ्त बिजली दी जाए।

खाद-बीज और कीटनाशक के क्षेत्र समेत अन्य क्षेत्रों में किसानों के नाम पर उद्योगों को दी जा रही। सब्सिडी सीधे किसानों को दी जाए। सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए रूफ टॉप सब्सिडी दी जाए और किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए। जिससे बिजली पर गांवों की निर्भरता कम हो सके। इसके साथ ही एनजीटी के नियमों में किसानों के लिए ढील देने का काम किया जाए। कृषि में काम आने वाले यंत्रों व साधनों को लेकर विशेष योजना के अंतर्गत समय सीमा में छूट देने का प्रावधान किया जाए।

टिकैत ने कहा कि प्राइवेट और कमर्शियल वाहनों को चाहे वो किसान के ही क्यों न हो, अलग-अलग वर्गों में विभाजित कर किलोमीटर के हिसाब से उनकी मियाद की गारंटी को निर्धारित किया जाए। राजस्थान की ईस्टर्न कैनाल परियोजना को केंद्रीय योजना के अंतर्गत लाया जाए। क्योंकि ये राजस्थान के 13 जिलों की जीवन पद्धति को प्रभावित करेगी। पहाड़ी राज्यों में पहाड़ी कृषि नीति के तहत स्थानीय संसाधनों और बाजार व्यवस्था को मजबूत करने का काम किया जाए। प्राकृतिक खेती की दिशा में हो रहे प्रयासों के मद्देनजर पहाड़ी राज्यों को ऑर्गेनिक राज्य का दर्जा दिलाया जाए।

भाकियू प्रवक्ता ने कहा कि आदिवासी इलाकों में जल-जंगल-जमीन को बचाने के लिए चल रहे आंदोलनों से सबक लेते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार आदिवासियों के कल्याण के लिए योजनाओं को धरातल पर उतारें और उन्हें उस जमीन का मालिकाना हक दिलाएं। आवारा पशुओं की समस्या विकराल रूप धारण कर रही है। विशेष नीति के तहत छुट्टा पशुओं को गौशाला में पहुंचाने के लिए पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी सुनिश्चित कर किसानों की खेती की सुरक्षा और संरक्षा का ध्यान रखा जाए।