गाजियाबादः रैपिड ट्रेन लाइन के निर्माण से जर्जर हुए मकान और दुकान, लोगों ने किया निर्माण कार्य का विरोध

रैपिट ट्रेन के सिविल इंजीनियर पर लगाया सिंडिकेट बैंक के फर्जी चेक देने का आरोप

 
गाजियाबाद

गाज़ियाबाद। नेशनल हाईवे-58 से निकलने वाली रैपिड ट्रेन की लाइन के निर्माण कार्य से हाइवे से सटे 20 से 25 मकान और दुकाने जर्जर हो गई। जिसमें लोगों का लाखों रुपये का नुकसान हो गया। जिसको लेकर हाइवे से सटे मकान और दुकानों के स्वामी कई माह से लगातार विरोध-प्रदर्शन करते आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना हैं कि उनके मकान और दुकानों में जो नुकसान हुआ हैं। उसे पूरा किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि उगर उनके नुकसान को पूरा नहीं किया गया तो वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे और रैपिड ट्रेन लाइन का निर्माण कार्य रोक देंगे।

भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष टिंकू चौधरी दुहाई ने हाईवे से सटे मकान और दुकानों के स्वामियों की आवाज बुलंद की हैं। स्थानीय लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े टिंकू चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने रैपिड ट्रेन के सिविल इंजीनियर से कई बार बातचीत की और स्थानीय लोगों के नुकसान को लेकर मुआवजे की बात की। जिसके बाद सिविल इंजीनियर गौरव मल्होत्रा द्वारा स्थानीय लोगों को आश्वासन दिया गया और उन्होंने 5 लाख 50 हज़ार रुपये का चेक भी दिया।

स्थानीय लोगों का आरोप हैं कि रैपिट ट्रेन के सिविल इंजीनियर द्वारा उन्हें सिंडिकेट बैंक के फर्जी चेक दिया गए। जोकि उनके किसी काम के नहीं हैं। आक्रोशित स्थानीय लोगों ने साफ तौर पर चेतावनी दी हैं कि अगर उनके नुकसान को पूरा नहीं किया गया तो वे अपने यहां से गुजरने वाली रैपिट ट्रेन की लाइन का कार्य किसी भी कीमत पर पूरा नहीं होने देंगे।

वहीं, दूसरी तरफ रैपिड ट्रेन की लाइन का निर्माण कार्य करने वाले मजदूरों का कहना हैं कि ठेकेदारों ने उनका पैसा रोक रखा हैं। जिससे उन्हें काफी दिक्कत और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं. और वे भूखे प्यासे हैं उनके पास खाने-पीने के लिए भी पैसा नहीं हैं। इतना ही नहीं मजदूरों का ये भी कहना हैं कि वे काफी दूर से अपने परिवार को छोड़कर आए हुए हैं. और उन्हें पैसा नहीं मिलने से वे काफी परेशान हैं। मजदूरों का कहना हैं कि अगर उनका पैसा उन्हें नहीं मिला तो वे भूखे प्यासे मर जाएंगे और उनका परिवार भी काफी परेशानी में आ जाएगा।