राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच ने जंतर-मंतर पर किया सत्याग्रह

राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना बनाने की सरकार से की मांग

 
SATYAGRAH

दिल्ली। राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच के तत्वाधान में बढ़ती हुई बेतहाशा बेरोजगारी, युवाओं के स्वाभिमान, सम्मान, अधिकार, संरक्षण, संवर्धन के लिए युवा आधारित नीति के तहत उनकी भूमिका और भागीदारी सुनिश्चित कराने के लिए जंतर मंतर पर सत्याग्रह आंदोलन का आयोजन किया गया। जिसमें राष्ट्रीय युवा आयोग के गठन और कुशल-योग्य बेरोजगारों के लिए राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना बनाए जाने के साथ  उनके बुनियादी सवालों को लेकर सरकार से मांग की गई।

युवा सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शशांक शेखर सिंह पुष्कर ने कहा कि 7 जून के ही दिन महात्मा गांधी ने अपने युवा अवस्था में दक्षिण अफ्रीका में भेदभाव, भारतीय समुदाय के साथ अन्याय, उत्पीड़न के विरुद्ध सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की थी। इसलिए छात्रों, बेरोजगारों और नौजवानों के बुनियादी सवालों के जवाब, समाधान के साथ-साथ उनके साथ अन्याय, भेदभाव और शोषण के खिलाफ अपने सभी युवा साथियों के साथ युवा सत्याग्रह के माध्यम से वर्तमान की केंद्र सरकार का ध्यान नौजवानों, बेरोजगारों की तरफ खींच रहा हूं कि 2 करोड़ रोजगार की आस में देश के युवाओं को आपसे काफी उम्मीदें और आशाएं थी। इसलिए नौजवानों ने दूसरी बार सत्ता में लाने का काम किया l

शेखर सिंह ने कहा कि बहुत चिंता का विषय है कि जाति, धर्म, संप्रदाय के नाम पर तमाम आयोग का गठन तो किया गया। लेकिन आबादी के 65 से 70% के युवाओं के अधिकार, संरक्षण, संवर्धन और उनके सम्मान, स्वाभिमान की रक्षा के लिए अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर न तो कोई युवाओं की नीति बन पाई, न ही राष्ट्रीय स्तर पर कोई आयोग का गठन हो पाया बल्कि राजनीतिक दलों द्वारा नौजवानों को वोट बैंक और प्रचार तंत्र के रूप में सिर्फ इस्तेमाल किया गया। फ्रंटल/प्रकोष्ठ के नाम पर पार्टियों द्वारा सिर्फ गुमराह किया गया। जब भी उनकी भूमिका और भागीदारी की बात आई तो राजनीतिक दलों ने इससे कन्नी काट ली।  किसी भी दल की नीति और नीयत युवाओं के प्रति साफ नहीं है। राजनीतिक दलों का युवा विरोधी चेहरा बेनकाब हो चुका है,युवाओं को अपनी लड़ाई स्वयं लड़नी पड़ेगी। जबकि देश की आजादी से लेकर जयप्रकाश के आंदोलन तक 30 वर्ष से कम उम्र के नौजवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है l उन्होंने कहा कि आज बीटेक, एमटेक, एमबीए एमसीए जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं बेरोजगारी इतनी चरम पर है कि हर 2 घंटे में 3 बेरोजगार आत्महत्या कर रहे विगत 3 वर्षों में देश के लगभग 26000 लोगों ने बेरोजगारी एवं अवसाद की दशा में आत्महत्या कर चुके है।

शशांक शेखर ने कहा कि नशे और अपराध के तरफ बढ़ रहे है। नौजवानों को रोजगार के बजाय लाठियों से पीटा जा रहा,। जो अत्यंत चिंता का विषय है रोजगार के मामले में किसी भी दल के पास कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। पक्ष-विपक्ष एक दूसरे पर सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप लगाते है। शशांक शेखर सिंह पुष्कर ने कहा कि इन दो मुख्य मांगों को लेकर लगातार धरना प्रदर्शन व युवा जागरूकता कार्यक्रम तथा युवा अधिकार और न्याय यात्रा के माध्यम से लगातार राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को मांग पत्र के माध्यम से जानकारी दी जा रही हैं। अगर मंच के मुख्य मांगों पर विचार किया गया तो सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, राजनीतिक रूप से राष्ट्र को सशक्त बनाने से कोई नहीं रोक पाएगा।

मामले को त्वरित और गंभीरता से संज्ञान में लाने के लिए जंतर-मंतर पर युवा सत्याग्रह के माध्यम से सरकार से ये आग्रह किया जा रहा है. कि युवा इस देश की रीढ़ है। युवाओं के बगैर सशक्त हुए सशक्त भारत की परिकल्पना नहीं की जा सकती।  इन्ही युवाओं के दम पर आप सत्ता में हैं उन युवाओं के लिए यदि 6 महीने में कोई ठोस कार्य योजना नहीं बनाई गई,राष्ट्रीय स्तर पर युवा आधारित नीति के तहत राष्ट्रीय युवा आयोग अथवा राष्ट्रीय युवा कल्याण आयोग का गठन नहीं किया गया। राष्ट्रीय रोजगार गारंटी जैसी कोई ठोस एवं रचनात्मक कार्ययोजना नहीं बनाई गई तो पूरे देश का नौजवान संसद का घेराव करेगा और आगामी चुनाव में युवा विरोधी सरकार मानते हुए उखाड़ फेंकने का काम नौजवान करेगा।उन्होंने कहा कि समय रहते बुनियादी समस्याओं पर मुखर होने के बजाय राजनीतिक पार्टियां सिर्फ राजनीति करने के लिए नौजवानों का इस्तेमाल करती हैं,जिसका परिणाम है कि आज भी युवा अपने अधिकार से वंचित है।

युवाओं को रोजगार न मिलने तक 10000 प्रतिमाह, बेरोजगारी भत्ता, प्रत्येक परिवार से योग्यता के आधार पर कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी और स्वरोजगार की व्यवस्था के साथ बेरोजगारों की प्रतियोगी परीक्षाएं निशुल्क,एवं संबंधित आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं एवं परिणाम की समय सीमा निर्धारित एवं संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित कराने के लिए कानून बनाए जाने की मांग शामिल है।