35 वर्षो के बाद भी नही मिल रही सहकारी समिति के सदस्यों को उनकी जमीन

भू माफिया और सरकारी अधिकारियों का गथ जोड़, 35 वर्ग मीटर जगह को हड़पने को तैयार

 
ghotaala

 

 

  • रिपोर्टः सुधीर गोयल

मुरादाबाद। 1987 में मुरादाबाद के कुछ अध्यापकों और अध्यापिकाओं ने मिलकर मयंक सहकारी आवास समिति लिमिटेड बनाई थी जिसमे कुल 241 सदस्य हुए थे। इनमे से कुछ लोगों ने कोर्ट फीस जमा कर रजिस्ट्री करा ली और कुछ लोगों के पास समिति की राशिद और आवेदन पत्र है।

समिति ने सब की सहमति से जमीन गांव साहपुर में खरीद ली थी। परंतु जमीन खरीदने के बाद लोगों ने एकैदम मकान नही बनवाए फिर 2003 में उस जगह आवास विकास विस्तार के लिए आई जिसे मयंक सहकारी आवासै समिति के पदाधिकारियों की नियत में कुछ गड़बड़ करने की सूझ और वो समिति के सदस्यों को बेवकूफ बनाते रहे 2013 में समिति के सदस्य एकत्रित होकर कोर्ट गए और आवास विकास के खिलाफ स्टे आर्डर ले आए 2018 माननीय हाय कोर्ट इलाहाबाद मुरादाबाद जिलाधिकारी को एक आदेश दिया। उन्होंने कहा कि इसै समिति के जो लोग जमीन लेना चाहते हैं उन्हें जमीन और जो लोग मुआवजा चाहते हैं उन्हें मुआवजा दिया जाए। परंतु विधि का खेल हुआ और मयंक सहकारी समिति का चुनाव हुआ

नई कमेटी के नजर में जमीन उनके जीवन में बदलाव लाने वाली लगी, इसी बीच कोविद जैसी महामारी फैली और मयंक सहकारी समिति की नई कमेटी और आवास विकास भूमाफिया का मिलन हो गया

फिर क्या था कोविड कल में ही आवास विकास और समिति सचिव ने फर्जी तरीके से बिना सदस्य की मर्जी के एक एग्रीमेंट तैयार कर के लोगों की जमीन हड़पने लगे।

आपको बता दे कि मुरादाबाद आवास अधिकारी मुरादाबाद के बीजेपी के पूर्व पार्षद का उत्तम सिंह पाल का बड़ा भाई है जिसके कारण इस सरकार में उसकी बहुत चलती है।