26 जनवरी को मनाई जाएगी बसंत पंचमी, यहां जानें क्यों मनाया जाता है यह त्योहार क्या है इसका महत्व

पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है सरस्वती पूजा
 
Basant Panchami

नई दिल्ली। बसंत पंचमी हिन्दूओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करने की मान्यता हैं। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।

ऐतिहासिक महत्व
जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सरसों का फूल मानो सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर मांजर (बौर) आ जाता और हर तरफ रंग-बिरंगी तितलियां मंडराने लगतीं। भंवरे भंवराने लगते है।  तब बसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पांचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती हैं। यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था।

बसंत पंचमी 2023
मां सरस्वती की पूजा का पर्व बसंत पंचमी इस वर्ष 26 जनवरी गुरुवार को मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार इस दिन कुछ खास चीजें खरीदकर घर लाने से धन और समृद्धि में बढ़ोत्तरी होती है। शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी पर शंकर-पार्वती का विवाह के लिए तिलकोत्सव हुआ था।  

क्यों होती है सरस्वती पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ही विद्या की देवी सरस्वती का जन्‍म हुआ था और इसलिए इस दिन सरस्वती पूजा की जयंती के रूप में मनाया जाता है। 

बसंत पंचमी का महत्व
 उत्तर भारत में, वसंत पंचमी के शुभ दिन देवी सरस्वती को पीले फूल चढ़ाए जाते हैं, क्योंकि वर्ष के इस समय में सरसों के फूल और गेंदे (गेंदा फूल) की प्रचुरता होती है। वसंत पंचमी का दिन विद्या आरंभ के लिए महत्वपूर्ण है, जो छोटे बच्चों को शिक्षा और औपचारिक शिक्षा की दुनिया से परिचित कराने की रस्म है। अधिकांश स्कूल और कॉलेज बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा का आयोजन करते है।

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बसंत पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार माघ की पंचमी तिथि 25 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट पर शुरू होगी और 26 जनवरी को 10 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार बसंत पंचमी का त्योहार 26 जनवरी 2023 को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 7 मिनट पर शुरू होगा और दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगा।

समाचार टुडे के लिए स्निग्धा श्रीवास्तव की रिपोर्ट