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SEBI की सख्ती: AMC द्वारा प्रबंधित AIFs के लिए ‘ब्रॉड-बेस्ड फंड’ नियम अनिवार्य

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पारंपरिक और वैकल्पिक निवेश साधनों (Investment Vehicles) के बीच विनियामक अंतर को कम करने के लिए, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) और उनकी सहायक कंपनियों द्वारा प्रबंधित या सलाह दिए जाने वाले अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) पर सख्त “ब्रॉड-बेस्ड फंड” आवश्यकताओं को लागू कर दिया है।

9 अप्रैल, 2026 को एक अनौपचारिक मार्गदर्शन पत्र (Informal Guidance) के माध्यम से जारी इस स्पष्टीकरण ने AMC के दायरे में आने वाले AIFs के लिए केंद्रित (Concentrated) और छोटे पोर्टफोलियो के युग को प्रभावी ढंग से समाप्त कर दिया है। अब इन्हें भी म्यूचुअल फंड की तरह ही विविधीकरण (Diversification) के मानकों का पालन करना होगा। यह स्पष्टीकरण यूटीआई अल्टरनेटिव्स प्राइवेट लिमिटेड (UTI Alternatives Pvt Ltd) द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में आया है।

“20-25” का नियम: AIFs के लिए नया बेंचमार्क

सेबी ने स्पष्ट किया है कि जब किसी AMC द्वारा AIF का प्रबंधन किया जाता है, तो उसे “पूल की गई संपत्ति” (Pooled Assets) माना जाएगा। परिणामस्वरूप, इन फंडों को अब “ब्रॉड-बेस्ड” मानदंडों का पालन करना होगा:

  • न्यूनतम निवेशक संख्या: प्रत्येक योजना (Scheme) में कम से कम 20 अद्वितीय (Unique) निवेशक होने चाहिए।

  • एकाग्रता सीमा (Concentration Limit): कोई भी एक निवेशक फंड के कुल कोष (Corpus) के 25 प्रतिशत से अधिक का हिस्सा नहीं रख सकता है।

ये शर्तें व्यक्तिगत योजना (Scheme) के स्तर पर पूरी होनी चाहिए, न कि समग्र फंड के स्तर पर। यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक निवेश वाहन स्वतंत्र रूप से एक विविध निवेशक मिश्रण को प्रदर्शित करे।

मास्टर-फीडर संरचनाओं पर नकेल

सेबी ने स्पष्ट किया है कि निवेश के लिए उपयोग की जाने वाली जटिल ‘मास्टर-फीडर’ संरचनाओं (Master-Feeder Structures) का उपयोग इन नियमों से बचने के लिए नहीं किया जा सकेगा।

  • स्वतंत्र अनुपालन: मास्टर फंड और उसके फीडर फंड, दोनों को स्वतंत्र रूप से ब्रॉड-बेस्ड आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।

  • यह नियम किसी फीडर फंड को केवल इसलिए 20-निवेशक नियम को दरकिनार करने की अनुमति नहीं देता कि उसका पैसा अंततः एक विविध मास्टर फंड में जा रहा है।

विशेषज्ञ विश्लेषण: मार्गदर्शन या नया नियम?

बाजार विशेषज्ञों के बीच इस स्पष्टीकरण को लेकर काफी चर्चा है। मुंबई के एक वरिष्ठ प्रतिभूति वकील ने कहा, “सेबी द्वारा जारी यह मार्गदर्शन वास्तव में एक नया नियम है। पहले AIFs को म्यूचुअल फंड नियमों से अलग माना जा सकता था, लेकिन अब सेबी ने इन्हें स्पष्ट रूप से जोड़ दिया है।”

भारत में AIFs का वर्तमान परिदृश्य

फरवरी 2026 तक, भारत का AIF उद्योग तेजी से बढ़ा है:

  • पंजीकृत फंड: 1,768 से अधिक।

  • कुल निवेश: ₹13.49 ट्रिलियन तक पहुँचा।

AIF श्रेणियों पर प्रभाव:

श्रेणी प्राथमिक निवेश फोकस नए नियमों का प्रभाव
Category I स्टार्टअप, सामाजिक उद्यम उच्च; अब AMC के नेतृत्व वाले फंडों को बड़े सिंडिकेट बनाने होंगे।
Category II प्राइवेट इक्विटी, रियल एस्टेट महत्वपूर्ण; AMCs को एकल फैमिली ऑफिस के लिए “विशेष फंड” बनाने से रोकेगा।
Category III हेज फंड, जटिल ट्रेडिंग सामान्य; कई बड़े हेज फंडों में पहले से ही बड़ा निवेशक आधार है।

घरेलू संस्थानों के लिए कोई ‘लुक-थ्रू’ छूट नहीं

दिलचस्प बात यह है कि सेबी ने बैंकों, बीमा कंपनियों और भविष्य निधि ट्रस्टों (Provident Fund Trusts) जैसे घरेलू संस्थानों को “लुक-थ्रू” आधार पर ब्रॉड-बेस्ड दर्जा देने से इनकार कर दिया है। इन्हें AMC-प्रबंधित AIF के संदर्भ में एकल निवेशक (Single Investor) के रूप में ही माना जाएगा।

स्थिरता की ओर कदम

यूटीआई, एसबीआई और एचडीएफसी जैसे AMCs के लिए अब चुनौती अपने मौजूदा फंडों को पुनर्गठित करने की है। जिन फंडों में वर्तमान में केवल कुछ ही बड़े निवेशक हैं, उन्हें अब 20-निवेशकों की सीमा तक पहुँचने के लिए अपनी योजनाओं का आक्रामक रूप से विपणन (Marketing) करना होगा, अन्यथा उन्हें गैर-अनुपालन (Non-compliant) माना जा सकता है।

सेबी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि AMCs द्वारा दी जाने वाली प्रबंधन और सलाहकार सेवाएं वास्तव में एक “पूल किए गए निवेश वाहन” की गरिमा को दर्शाती हों।

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