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रिश्तों का अनोखा संगमः ईद की तरह ही रक्षाबंधन मनाता हैं ये मुस्लिम परिवार

रिपोर्ट : त्रिभुवन नाथ शर्मा
ब्यूरो चीफ | प्रयागराज

23 Aug

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प्रयागराज। संगम नगरी में रक्षाबंधन के पर्व पर एक बार फिर प्रेम सौहार्द और धर्म से परे रिश्ते के मायने को नया सन्देश दिया गया। दुनिया भर में नदियों के संगम के लिए जाना जाने वाला  शहर ने आज गंगा जमनी तहजीब और भाई चारे प्रेम का सन्देश दिया। जब लोग धर्म के नाम पर बांटने की बात कर रहे हो। ऐसे समय में शहर के नैनी क्षेत्र में रहने वाले एक मुस्लिम और हिन्दू परिवार ने सब के लिए एक मिसाल पेश की।  जिसमें मुस्लिम समुदाय के दो पीढ़ियों के लोग हिंदू समुदाय की लड़कियों से राखी बंधवाते हैं तकरीबन 35 सालों पहले से इस रिश्ते की शुरुआत हुई थी।

ख़ास ये भी है कि मुस्लिम परिवार सैय्यद घराने से तार्रुफ़ रखता है जो मुस्लिम में सर्वश्रेठ होते है और हिन्दू परिवार  ब्राह्मण है। शहर के यमुनापार इलाके में यह मुस्लिम परिवार ईद की तरह रक्षाबंधन को भी अपने घर में धूम धाम से मनाता है। आज के दिन पूरा परिवार एक जुट होता है। पूरे घर के लोग पूरी रश्म और परंपरा के साथ रक्षाबधंन मनाते है।

बता दें कि में पिछले 35 सालों से इन दो परिवारों में कभी भी कोई बदलाव नही आया और 45 सालो से हिन्दू बहनों से ये मुस्लिम परिवार राखी बंधवाता आ रहा है। नैनी में रहने वाले  रसिक बिहारी दुबे के परिवार से पिछले 35 सालों से उन्हीं के पड़ोस में रहने वाले सैय्यद अज़ीज़ आलम का परिवार राखी बंधवाते है। पैतीस साल पहले रहने आए मुस्लिम परिवार जो उनके पडोसी बने और तब से अब तक हर साल इस परिवार से राखी बंधवाते आ रहे हैं।

आलम साहब के दो बेटे हैं और दोनों के दोनों बेटे इनके परिवार से हर साल राखी पर आते हैं। जिनके बड़े बेटे का भी बेटा हुआ तो वह भी पिछले 8 सालों से इन्हीं के परिवार की बेटियों से राखी बंधवाता है। इस मुस्लिम परिवार की दो पीढ़ी इस रिश्ते को कायम रखी हुई है। ईद की तरह घर के बच्चे रक्षा बंधन पर भी नए कपड़े के साथ तैयार होते है। पुरे समाज ही नही देश भर में के मिशाल है कुरता पैजामा , सर में टोपी ,माथे पर तिलक और हाथों में बंधी राखी। 

इस राखी से सिर्फ अलग अलग सम्प्रदाय से जुड़े दो परिवार का ही रिश्ता नही बल्कि दुनिया को एक सूत में पिरोने की कोशिश भी है। संगम नगरी से उन लोगो के लिए भी सन्देश है जो रिश्तों को धर्म -जाती से जोड़ते है। दोनों परिवार गंगा जमनी तहजीब की मिसाल है। इस बार सैय्यद परिवार ने मीडिया के माध्यम से सभी को अमन और भाई चारे के साथ रहने की नसीहत भी दे रहे है। और बताया कि हम हाइलाइट नही होना चाहते बीते 35 सालों में कभी नही किया लेकिन हमें लगा करोड़ो लोगो के देश में एक संदेश जरूर दे सकते है। कि भाई चारा प्रेम और सौहार्द को धर्म और जाति से नही बांधा जा सकता।

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