भूगर्भ जल सप्ताह के समापन पर बोले सीएम योगी, पानी की बूंद-बूंद की कीमत को समझना होगा

जल संरक्षण के लिए विशेष कार्य करने वाली 10 संस्थाओं के प्रतिनिधियों को किया सम्मानित

 
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  • रिपोर्टः ज्ञानेश वर्मा

लखनऊ। भूगर्भ जल के साथ वर्षा की एक-एक बूंद को संरक्षित करने के पवित्र अभियान से प्रदेश भर के लोगों को जोड़ना होगा। हम सबको बूंद-बूंद पानी की कीमत को समझना होगा। यह अपील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोकभवन में भूगर्भ जल सप्ताह के समापन समारोह पर की। सीएम योगी ने इस दौरान नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की योजनाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि पांच सालों में भूगर्भ जल संरक्षण की दिशा में बेहतर काम किया गया है। लेकिन अभी और भी बहुत कुछ काम करने की जरूरत है।

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सीएम योगी ने कार्यक्रम में जल संरक्षण के लिए विशिष्ट कार्य करने वाली प्रदेश की 10 संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। सीएम योगी ने यहां भूजल एटलस का विमोचन किया। भारत सरकार की नेशनल हाइड्रोलॉजी प्रोजेक्ट में भूगर्भ जल विभाग उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ कार्य के लिए मिले सम्मान चिन्ह को सीएम को भेट किया गया। कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, राज्य मंत्री रामकेश निषाद, मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र और नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूगर्भ जल की स्थिति में पांच सालों में आए सुधारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि भूगर्भीय जल को संरक्षित करने के लिए उतने ही जल का इस्तेमाल करें जितने की आवश्यकता है। हमको एक-एक  बूंद की कीमत को समझना पड़ेगा। अमृत सरोवरों को बनाने के साथ ही पोखर, कुंओं, सरोवरों को पुनर्जीवित करना होगा। आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया में यूपी की भूमि को सबसे उर्वरा भूमि माना जाता है। भूगर्भीय जल के संरक्षण से इसे बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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सीएम ने कहा कि इस दिशा में और अच्छे प्रयासों को करने की जरूरत है। कहा कि जल है तो जीवन है। जल और जीवन के बीच के इस भाव को समझता हर व्यक्ति है। लेकिन उसके उचित प्रबंधन के बारे में जो प्रयास होने चाहिए उसमें कहीं न कहीं वो व्यक्ति चूक जाता है। उन्होंने कहा कि आदिकाल से जल को भारतीय मनीषा ने बहुत पवित्र भाव के साथ देखा है। इस संपूर्ण ब्रह्मांड के कल्याण की बात होती है तो जल के कल्याण की बात भी उसमें निहित होती है। जीव, जन्तु और सृष्टि की कल्पना जल के बिना नहीं की जा सकती है। पहले के लोग जल संरक्षण को पवित्र कार्य के रूप में मानते थे। तालाब खुदवाते थे, कुंए खुदवाते थे। नदियों को मां जैसा पवित्र भाव दिया। गंगा मैया के रूप में हमने भारत की सबसे पवित्र नदी को मान्यता दी।

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भूजल सप्ताह के समापन अवसर पर कार्यक्रम में मौजूद जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने विभाग की उपलब्धियों को बताते हुए खेत की मेड़-मेढ़ पर पेड़ और घर का पानी घर में खेत का पानी खेत में नारा दिया। उन्होंने कहा भूजल सप्ताह जैसे कार्यक्रमों से न केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गति मिलती है। बल्कि भूजल संरक्षण के प्रति लोगों में वृहद स्तर पर जागरूकता भी होती है। प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने भूगर्भ जल विभाग द्वारा भूजल प्रबंधन की विभिन्न संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में गतिशीलता एवं पारदर्शिता लाने के लिए भूजल सप्ताह जैसे कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका को बताया।