कारगिल विजय दिवसः आज भी हौसला नहीं हारी गाजियाबाद की प्राची गर्ग, कारगिल युद्ध में निभाई थी अहम भूमिका

जून 1997 में सिलेक्ट होने के साथ ही शुरू हुआ था आर्मी का जीवन

 
गाजियाबाद

  • रिपोर्टः अजीत रावत

गाजियाबाद। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूरा देश उन बहादुर सैनिकों को याद कर रहा है। जिन्होंने मां भारती की रक्षा में अपना प्राण न्यौछावर कर दिए। 1999 में आज ही के दिन भारतीय सेना ने दुश्मन को खदेड़ कर कारगिल की पहाड़ी पर तिरंगा फहराया था। आज हम आपको उत्तर प्रदेश की एक ऐसी जांबाज महिला की कहानी सुनाते हैं। जिन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान सैकड़ों की संख्या में घायल सैनिकों का इलाज कर देश की सेवा की।

गाजियाबाद के अशोक नगर की मेजर डॉक्टर प्राची गर्ग नाम के साथ ही गर्व का अहसास करा देती हैं। प्राची को कारगिल युद्ध के दौरान सेवा देने वाली एक मात्र महिला मेडिकल अफसर होने का गौरव प्राप्त है। मेजर प्राची गर्ग 8 माउंटेन डिविजन से लड़ाई के दौरान सक्रिय रहने वाली एकमात्र महिला सैन्य अधिकारी भी है। इतना ही नहीं ऑपरेशन पराक्रम में भी मेजर प्राची ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। शार्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से जून 1997 में सिलेक्ट होने के साथ ही आर्मी का जीवन शुरू हो गया था। दिसंबर 1997 फील्ड एरिया में पोस्टिंग हो गई।

प्राची बताती है कि कारगिल वॉर की बात करें तो यादें आज भी हिला देती हैं। आज भी प्राची गर्ग हौसला नहीं हारी है। उनका कहना है कि एक बार फिर उन्हें अगर देश की सेवा करने और सेना की वर्दी पहनने का मौका मिले तो इसे अपना गौरव समझेंगी।

प्राची का दिल अभी भी कहीं न कहीं सेना में ही अटका रहता है। हर दिन उन्हें देश सेवा में बिताए दिनों की याद आती है। प्राची ने अपने साथ काफी फोटो उस दौर के इकट्ठा कर रखे हैं। जिन्हें देखकर आज भी उनकी आंखें भर जाती हैं। उनका बस एक आखरी सपना है कि वे फिर देश की सेवा करें।