Geo-politics
आलोचक पर आतंकी का ठप्पा: पाकिस्तान ने आदिल राजा को किया ब्लैकलिस्ट
पाकिस्तान सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए, ब्रिटेन में रह रहे पूर्व सैन्य अधिकारी और राजनीतिक टिप्पणीकार मेजर (रिटायर्ड) आदिल राजा को आधिकारिक तौर पर “आतंकवादी” घोषित कर दिया है। गृह मंत्रालय ने आतंकवाद विरोधी अधिनियम (ATA), 1997 की चौथी अनुसूची (Schedule 4) के तहत राजा का नाम शामिल किया है, जिसका अर्थ है कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना गया है।
यह घटनाक्रम पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान और विदेश में रह रहे उसके आलोचकों के बीच जारी संघर्ष में एक नया और तीखा मोड़ है। आदिल राजा, जिन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का मुखर समर्थक माना जाता है, अपने यूट्यूब चैनलों के माध्यम से सेना और सरकार की तीखी आलोचना के लिए जाने जाते हैं।
क्या है चौथी अनुसूची (Schedule 4)?
पाकिस्तान के कानून के अनुसार, चौथी अनुसूची एक ऐसी निगरानी सूची है जिसमें आतंकवाद या सांप्रदायिकता में संलिप्त होने के संदिग्ध व्यक्तियों को रखा जाता है। इस सूची में नाम आने के बाद व्यक्ति पर कई कड़े प्रतिबंध लग जाते हैं:
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संपत्ति फ्रीज करना: बैंक खातों की निगरानी और उन्हें तुरंत फ्रीज करना।
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यात्रा प्रतिबंध: पासपोर्ट जारी करने या उसके नवीनीकरण पर रोक।
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निगरानी: स्थानीय पुलिस को नियमित रिपोर्ट देना और आवाजाही पर पाबंदी।
हालांकि राजा इस समय लंदन में हैं, लेकिन इस घोषणा के बाद पाकिस्तान के लिए उनके प्रत्यर्पण (Extradition) की कानूनी मांग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल सकती है।
राजा का पलटवार: “यह प्रतिशोध है”
इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए आदिल राजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसे “बदले की कार्रवाई” बताया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान सरकार उन्हें ब्रिटेन से वापस लाने में विफल रही है, इसलिए अब उन्हें आतंकवादी घोषित कर चुप कराने की कोशिश की जा रही है।
राजा ने कहा, “यह पदनाम किसी अपराध का परिणाम नहीं है, बल्कि मेरी पत्रकारिता का सीधा प्रतिशोध है।” उन्होंने हाल ही में अपने लंदन स्थित घर में हुई चोरी और तोड़फोड़ की घटना को भी इस ‘दमनकारी अभियान’ का हिस्सा बताया। राजा का आरोप है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां ब्रिटेन में रह रहे असंतुष्टों को डराने के लिए “पारराष्ट्रीय दमन” (Transnational Repression) का सहारा ले रही हैं।
एक सैन्य अधिकारी से ‘व्हिसलब्लोअर’ तक
मेजर (रिटायर्ड) आदिल फारूक राजा ने 2022 में ब्रिटेन जाने से पहले पाकिस्तानी सेना में अपनी सेवाएं दी थीं। वहां जाने के बाद उन्होंने सैन्य भ्रष्टाचार और राजनीतिक जोड़-तोड़ के खिलाफ “व्हिसलब्लोअर” के रूप में बड़ी पहचान बनाई। 2023 में, पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने उन्हें उनकी अनुपस्थिति में ‘विद्रोह भड़काने’ का दोषी पाते हुए 14 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।
राजनयिक गतिरोध
यह मामला अब ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच राजनयिक तनाव का कारण बन सकता है। पाकिस्तान का कहना है कि राजा “राज्य विरोधी” गतिविधियों में शामिल हैं, जबकि मानवाधिकार समूह उन्हें एक ‘राजनीतिक असंतुष्ट’ मान रहे हैं।
“आलोचकों को चुप कराने के लिए आतंकवाद कानूनों का सहारा लेना एक खतरनाक परंपरा है,” डॉ. आयशा सिद्दीका, पाकिस्तानी सैन्य मामलों की विशेषज्ञ ने कहा। “इससे वास्तविक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर होती है और उन देशों के साथ संबंध बिगड़ते हैं जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं।”
निष्कर्ष
आदिल राजा का मामला पाकिस्तान में बढ़ते डिजिटल दमन का एक और उदाहरण है। जहां एक तरफ सरकार “डिजिटल आतंकवाद” को रोकने के लिए फायरवॉल और कानूनी प्रतिबंधों का उपयोग कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राजा जैसे आलोचक अंतरराष्ट्रीय मंचों से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या ब्रिटेन पाकिस्तान के इस नए वर्गीकरण को स्वीकार करेगा या इसे राजनीतिक उत्पीड़न मानकर खारिज कर देगा।
