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एआई शिखर सम्मेलन में चीनी रोबोट पर छिड़ा सियासी संग्राम

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SamacharToday.co.in - एआई शिखर सम्मेलन में चीनी रोबोट पर छिड़ा सियासी संग्राम - Image Credited by Newsable Asianet News

नई दिल्लीभारत मंडपम में भारत की तकनीकी संप्रभुता को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ एक बड़े राष्ट्रीय विवाद का केंद्र बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए इस शिखर सम्मेलन को बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने “अव्यवस्थित पीआर तमाशा” (disorganised PR spectacle) करार दिया।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब गलगोटिया विश्वविद्यालय पर आरोप लगे कि उसने चीन निर्मित एक रोबोटिक कुत्ते को अपने स्वयं के आविष्कार के रूप में प्रदर्शित किया। सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना और एक वायरल वीडियो के बाद, अधिकारियों ने कथित तौर पर विश्वविद्यालय को प्रदर्शनी से अपना स्टाल हटाने का निर्देश दिया है।

“पीआर तमाशा” या प्रगति?

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश की प्रतिभा और डेटा को सुरक्षित करने के बजाय केवल प्रचार को महत्व दे रही है।

“भारत की प्रतिभा और डेटा का लाभ उठाने के बजाय, एआई शिखर सम्मेलन एक अव्यवस्थित पीआर तमाशा है — भारतीय डेटा बिक्री के लिए उपलब्ध है और चीनी उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है,” राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा।

कांग्रेस पार्टी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक प्रमुख भारतीय आयोजन में चीनी रोबोटों की उपस्थिति ने देश को वैश्विक स्तर पर “हंसी का पात्र” बना दिया है। विपक्ष ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव पर भी हमला बोला और उन पर विदेशी तकनीक को “इंडिया एआई मिशन” के तहत बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

“ओरियन” बनाम “यूनिट्री गो2” का विवाद

विवाद की जड़ विश्वविद्यालय के स्टाल पर प्रदर्शित एक रोबोटिक कुत्ता था, जिसे “ओरियन” नाम दिया गया था। विश्वविद्यालय की एक प्रतिनिधि ने वीडियो में दावा किया कि इसे उनके ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ द्वारा विकसित किया गया है। उन्होंने बताया कि यह रोबोट निगरानी और सुरक्षा जैसे कार्यों में सक्षम है।

हालांकि, तकनीकी जानकारों ने तुरंत पहचान लिया कि यह चीनी कंपनी Unitree Robotics द्वारा निर्मित Unitree Go2 मॉडल है। यह रोबोट ऑनलाइन लगभग 2 से 3 लाख रुपये में आसानी से उपलब्ध है। घरेलू आविष्कार के दावे और चीनी उत्पाद की वास्तविकता के बीच इस अंतर ने “बौद्धिक बेईमानी” के आरोपों को जन्म दिया।

गलगोटिया विश्वविद्यालय का स्पष्टीकरण

विवाद बढ़ता देख गलगोटिया विश्वविद्यालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वह “दुष्प्रचार अभियान” से बहुत दुखी है। संस्थान का तर्क है कि उनका उद्देश्य कभी भी विनिर्माण (manufacturing) का दावा करना नहीं था, बल्कि छात्रों को वैश्विक उपकरणों के माध्यम से एआई प्रोग्रामिंग सिखाना था।

विश्वविद्यालय ने कहा, “हम छात्रों को एआई प्रोग्रामिंग सिखाने और वैश्विक स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके वास्तविक कौशल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।” उन्होंने जोर दिया कि छात्रों को व्यावहारिक अनुभव देने के लिए अमेरिका, चीन और सिंगापुर जैसी जगहों से आधुनिक तकनीक लाना आवश्यक है। प्रोफेसर नेहा सिंह ने पीटीआई से कहा कि बातों को स्पष्ट रूप से व्यक्त न कर पाने के कारण यह गलतफहमी पैदा हुई।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026

यह पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन (16-20 फरवरी) भारत को ‘ग्लोबल साउथ’ में एआई के नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करने के लिए आयोजित किया गया है। यह तीन मुख्य स्तंभों या “सूत्रों” पर आधारित है:

  • पीपल (लोग): समावेशी विकास पर ध्यान।

  • प्लैनेट (ग्रह): सतत विकास के लिए एआई।

  • प्रोग्रेस (प्रगति): शासन और दक्षता को मजबूत करना।

इस कार्यक्रम में 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और 500 वैश्विक एआई दिग्गज हिस्सा ले रहे हैं। उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत की एआई प्रगति न केवल देश के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए परिवर्तनकारी समाधान तैयार करेगी।

डेटा संप्रभुता और स्वदेशी तकनीक की बहस

इस विवाद ने एआई क्षेत्र में भारत की विदेशी हार्डवेयर पर निर्भरता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। हालांकि भारत ने सॉफ्टवेयर और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI) में बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे हार्डवेयर क्षेत्रों में हम अब भी आयात पर निर्भर हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि शिखर सम्मेलन में हुई यह घटना घरेलू नवाचारों (innovations) की जांच-परख की प्रक्रिया को और कड़ा करने की आवश्यकता को दर्शाती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने अभी तक स्टाल हटाए जाने पर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन इस घटना ने निश्चित रूप से “आत्मनिर्भर भारत” के तकनीकी उत्सव पर एक प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

मेरा नाम युवराज है। मैं एक अनुभवी पत्रकार एवं स्टेट न्यूज़ एडिटर हूँ, जिसे राज्य स्तरीय राजनीति, प्रशासनिक गतिविधियों और जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग व संपादन का व्यापक अनुभव है। मैं समाचारों को तथ्यपरक, संतुलित और निष्पक्ष दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखता हूँ। मेरा मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में प्रेरित करने की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। अपने कार्य के माध्यम से मैं पाठकों तक सटीक जानकारी पहुँचाने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास करता हूँ।

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