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उषा उथुप के प्रदर्शन पर मंत्रमुग्ध हुईं मृणाल ठाकुर

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SamacharToday.co.in - उषा उथुप के प्रदर्शन पर मंत्रमुग्ध हुईं मृणाल ठाकुर - Image Credited by The Times of India

मुंबई — शनिवार की रात मुंबई के ऐतिहासिक कला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल (KGAF) में भारतीय मनोरंजन जगत की दो पीढ़ियों का एक अनोखा मिलन देखने को मिला। अभिनेता मृणाल ठाकुर के लिए जो एक सामान्य फिल्म प्रमोशन की यात्रा थी, वह देखते ही देखते एक यादगार ‘फैन मोमेंट’ में बदल गई। मृणाल ने दिग्गज गायिका उषा उथुप के लाइव प्रदर्शन को देखने के लिए अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों को रद्द कर दिया।

यह घटना फेस्टिवल के ‘क्रॉस मैदान’ मंच पर हुई, जो उत्सव का मुख्य संगीत केंद्र है। मृणाल, जो मूल रूप से अपनी आगामी फिल्म के प्रचार के लिए केवल 15 मिनट के लिए वहां आई थीं, उषा उथुप के ऊर्जावान प्रदर्शन को देखकर अपनी जगह से हिल न सकीं और पूरे शो के दौरान वहीं डटी रहीं। यह इस बात का प्रमाण था कि एक जीवित किंवदंती (Living Legend) का आकर्षण स्थापित सितारों के लिए भी कितना गहरा होता है।

‘कला घोड़ा’ के मंच का जादू

जैसे ही दक्षिण मुंबई के क्षितिज पर सूरज ढला, उषा उथुप अपनी ट्रेडमार्क कांजीवरम साड़ी, बड़ी बिंदी और बालों में ताजे मोगरे के फूलों के साथ मंच पर उतरीं। माहौल में एक अलग ही ऊर्जा थी। पांच दशकों से अधिक का करियर रखने वाली दिग्गज गायिका ने ‘सेनोरिटा’ और ‘रंबा हो’ जैसे सुपरहिट गानों के साथ दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

दर्शकों की भीड़ में मृणाल ठाकुर भी शामिल थीं। मशहूर हस्तियों के लिए आरक्षित विशेष वीआईपी क्षेत्र में जाने के बजाय, मृणाल बैरिकेड्स के ठीक सामने खड़ी देखी गईं। वह केवल एक दर्शक नहीं थीं; वह उत्सव का सक्रिय हिस्सा बनी हुई थीं—नाचते हुए, शोर मचाते हुए और किसी भी आम प्रशंसक की तरह अपने फोन पर प्रदर्शन के वीडियो बनाते हुए।

चकाचौंध से परे एक गहरा रिश्ता

कार्यक्रम के बाद विशेष बातचीत में, उत्साहित मृणाल ठाकुर ने उथुप के प्रति अपनी गहरी प्रशंसा व्यक्त की। यह केवल एक संयोग नहीं बल्कि एक पुनर्मिलन जैसा था। कुछ महीने पहले दोनों ने एक साड़ी ब्रांड के विज्ञापन के लिए साथ काम किया था, जिसे मृणाल अपने जीवन का एक बड़ा अनुभव मानती हैं।

मृणाल ने बताया, “उषा मैम शानदार हैं! मुझे कुछ महीने पहले एक साड़ी विज्ञापन में उनके साथ काम करने का सौभाग्य मिला था और उस सेट पर मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला।”

अभिनेत्री ने उस विज्ञापन शूट के दौरान की एक खास याद साझा की जिसने उनके रिश्ते को और मजबूत कर दिया। मृणाल की प्रकृति और फूलों के प्रति प्रेम को जानते हुए, उथुप ने उनके लिए माइली साइरस के मशहूर गाने ‘फ्लावर्स’ का एक विशेष संस्करण गाया था।

मृणाल ने कहा, “उन्होंने मेरे लिए ‘फ्लावर्स’ गाया क्योंकि मैं एक ‘फ्लावर चाइल्ड’ हूं और मुझे फूलों से बहुत प्यार है। उन्होंने सेट पर वह गाना मुझे समर्पित किया था। और आज रात, उन्हें लाइव देखना किसी सपने जैसा था। जब उषा उथुप मंच पर हों, तो आपको वहां होना ही चाहिए!”

पेशेवर कार्यक्रम पर भारी पड़ी कला के प्रति दीवानगी

बॉलीवुड की भागदौड़ भरी दुनिया में, जहां सितारों का हर मिनट पीआर टीमों और मैनेजरों द्वारा तय किया जाता है, मृणाल का वहां रुकने का फैसला काफी चौंकाने वाला था।

मृणाल ने हंसते हुए कहा, “आज का दिन किसी ट्रीट जैसा था। मुझे खुशी है कि मैं यहां अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए आई थी। जब मुझे पता चला कि वह परफॉर्म कर रही हैं, तो मैंने थोड़ी देर रुकने का फैसला किया। दरअसल मैं यहां सिर्फ 15 मिनट के लिए रहने वाली थी, लेकिन अंततः मैं पूरे शो के लिए यहीं रुक गई! मैंने अपने सभी प्लान कैंसिल कर दिए और सोचा कि बाकी सब इंतजार कर सकते हैं!”

फिल्म उद्योग के जानकारों का कहना है कि ऐसे पल दुर्लभ होते हैं। आमतौर पर सितारे आते हैं, अपनी बात रखते हैं, सोशल मीडिया के लिए तस्वीरें खिंचवाते हैं और भीड़ बढ़ने से पहले निकल जाते हैं। लेकिन मृणाल का यह फैसला उनके भीतर छिपे एक सच्चे प्रशंसक को दर्शाता है।

उषा उथुप: एक अद्भुत व्यक्तित्व

उषा उथुप केवल एक गायिका नहीं हैं; वह अपने आप में एक संस्था हैं। अपनी अनोखी ‘कॉन्ट्राल्टो’ आवाज के लिए जानी जाने वाली उषा ने भारत में पारंपरिक महिला पार्श्व गायन के मानदंडों को बदल दिया। पश्चिमी पॉप, जैज और भारतीय लोक संगीत के बीच सेतु बनाने की उनकी क्षमता के लिए उन्हें भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से नवाजा जा चुका है।

मृणाल ने आगे कहा, “जब वह प्रदर्शन करती हैं, तो आपको बस आनंद लेना होता है। वह जो खुशी फैलाती हैं, वह अविश्वसनीय है। वह एक जीवित किंवदंती हैं।”

कला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल की भावना

1999 में स्थापित ‘कला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल’ भारत का सबसे बड़ा बहुसांस्कृतिक सड़क उत्सव है। हर साल फरवरी में नौ दिनों के लिए यह क्षेत्र एक खुले आर्ट गैलरी और कॉन्सर्ट हॉल में बदल जाता है। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य कला को जनता के लिए सुलभ बनाना और कलाकार व जनता के बीच की दूरियों को खत्म करना रहा है।

शनिवार को मृणाल ठाकुर और उषा उथुप के बीच की बातचीत इसी दर्शन को पूरी तरह से चरितार्थ करती है। यह केवल फिल्म प्रमोशन या संगीत कार्यक्रम के बारे में नहीं था; यह एक गुरु और शिष्या के बीच के कच्चे और अनफ़िल्टर्ड संबंध और पेशेवर सीमाओं को पार करने की कला की शक्ति के बारे में था।

विशेषज्ञ राय: सहजता की शक्ति

सांस्कृतिक आलोचक और कार्यक्रम इतिहासकार राहुल देशपांडे ने टिप्पणी की, “कला घोड़ा में हमने जो देखा वह केवल एक सेलिब्रिटी का दिखना नहीं था। यह उषा उथुप जैसे दिग्गज कलाकारों की स्थायी शक्ति का प्रमाण था। मृणाल ठाकुर जैसी आधुनिक अभिनेत्री का अपने काम छोड़कर किसी वरिष्ठ को देखने के लिए रुकना युवाओं को अपनी कला और पूर्वजों की यात्रा का सम्मान करने का एक सुंदर संदेश देता है।”

मृणाल के लिए आगे की राह

भले ही वह रात संगीत के नाम थी, लेकिन मृणाल ठाकुर आज उद्योग की सबसे व्यस्त अभिनेत्रियों में से एक हैं। हाल के दिनों में हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा दोनों में सफलता के बाद, वह वर्तमान में कई बड़ी फिल्मों की रिलीज की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, उनका मानना है कि इस तरह के पल उन्हें जमीन से जुड़े रहने में मदद करते हैं।

उन्होंने स्नेहपूर्वक कहा, “हम वास्तव में सेट पर एक-दूसरे से जुड़ गए थे। मैं उनसे बहुत प्यार करती हूं।”

जैसे-जैसे फेस्टिवल आगे बढ़ेगा, उस सितारे की कहानी जो किसी और को देखने के लिए रुक गई थी, संभवतः कला घोड़ा की कहानियों का हिस्सा बन जाएगी—एक ऐसी याद जो बताती है कि सच्ची महानता की उपस्थिति में, हर कोई एक प्रशंसक होता है।

शमा एक उत्साही और संवेदनशील लेखिका हैं, जो समाज से जुड़ी घटनाओं, मानव सरोकारों और बदलते समय की सच्ची कहानियों को शब्दों में ढालती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली है। शमा का विश्वास है कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों और परिवर्तन की आवाज़ है। वे हर विषय को गहराई से समझती हैं और सटीक तथ्यों के साथ ऐसी प्रस्तुति देती हैं जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया है। उनके लेख न केवल सूचनात्मक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

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