Connect with us

Sports

घर में शर्मसार भारतीय हॉकी: अर्जेंटीना के हाथों 8-0 की ऐतिहासिक हार

Published

on

SamacharToday.co.in - घर में शर्मसार भारतीय हॉकी अर्जेंटीना के हाथों 8-0 की ऐतिहासिक हार - Image Credited by Hindistan Times

राउरकेला: आधुनिक खेलों का विशाल केंद्र और भारतीय गौरव का किला माना जाने वाला बिरसा मुंडा हॉकी स्टेडियम गुरुवार की शाम सन्नाटे में डूब गया। एक ऐसे परिणाम में, जिसने वैश्विक हॉकी जगत में सनसनी फैला दी, अर्जेंटीना की एक अनुशासित और आक्रामक टीम ने 2025-26 एफआईएच (FIH) प्रो लीग के मुकाबले में भारतीय पुरुष हॉकी टीम को 8-0 के अपमानजनक अंतर से शिकस्त दी।

यह केवल एक हार नहीं थी; यह एक व्यवस्थित विनाश था जिसने भारत के सामरिक ढांचे, रक्षात्मक अनुशासन और मनोवैज्ञानिक लचीलेपन की गंभीर कमियों को उजागर कर दिया। बुधवार को बेल्जियम के हाथों मिली 1-3 की हार के बाद, मुख्य कोच क्रेग फुल्टन की टीम ने अब दो मैचों में 11 गोल खा लिए हैं, जो आठ बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता देश के इतिहास में सबसे काले अध्यायों में से एक है।

पतन का विश्लेषण

आंकड़े एक भयावह कहानी बयां करते हैं। 0-8 की यह करारी हार अंतरराष्ट्रीय हॉकी में भारत की संयुक्त रूप से तीसरी सबसे खराब हार है। यह 1985 में एम्स्टर्डम के बीएमडब्ल्यू (BMW) आमंत्रण टूर्नामेंट की याद दिलाती है जहाँ नीदरलैंड ने भारत को 8-0 से हराया था, और 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल की पीड़ा को भी ताजा करती है जहाँ ऑस्ट्रेलिया ने इसी अंतर से भारत को मात दी थी।

मैच की शुरुआत में दोनों टीमें बराबर दिख रही थीं, लेकिन दरारें पड़ने में देर नहीं लगी। टॉमस रुइज़ ने 14वें मिनट में गोल का खाता खोला, जिसके तुरंत बाद 15वें मिनट में टॉमस डोमेने ने दूसरा गोल दागा। हालांकि, दूसरा क्वार्टर भारतीय रक्षकों को वर्षों तक परेशान करेगा। 20वें से 30वें मिनट के बीच अर्जेंटीना ने 10 मिनट के भीतर पांच गोल कर दिए।

इस तबाही के सूत्रधार टॉमस डोमेने रहे, जिन्होंने कुल चार गोल (15वें, 20वें, 26वें और अंतिम मिनट) किए। लूसियो मेंडेज़ (22वें), इग्नासियो इबारा (25वें) और निकोलस डेला टोरे (30वें) ने भी गोल दागे, जिससे अमित रोहिदास और जरमनप्रीत सिंह जैसे दिग्गजों से सजी भारतीय रक्षापंक्ति ताश के पत्तों की तरह ढह गई।

‘प्लेयर ऑफ द मैच’ टॉमस डोमेने ने कहा, “मेरी टीम ने पूरा खेल 100 प्रतिशत क्षमता के साथ खेला। पिछले मैच में बेल्जियम से हारने के बाद हम निराश थे, और आज हमने सुनिश्चित किया कि हम हर अवसर का लाभ उठाएं।” भारत के लिए वे अवसर बहुत कम थे और उन्हें बुरी तरह गंवाया गया।

मैदान पर नेतृत्व का संकट

इस हार का सबसे चिंताजनक पहलू भारत के वरिष्ठतम खिलाड़ियों का संयम खो देना था। कप्तान हरमनप्रीत सिंह, जो आमतौर पर टीम की पेनल्टी कॉर्नर (PC) की ताकत माने जाते हैं, का प्रदर्शन आज बेहद निराशाजनक रहा। उन्होंने दो पेनल्टी स्ट्रोक और तीन पेनल्टी कॉर्नर गंवाए, जिससे टीम को वापसी के लिए जरूरी चिंगारी नहीं मिल सकी।

उनके पीछे, गोलकीपर सूरज करकेरा और पवन पूरी तरह से तालमेल से बाहर दिखे। आधुनिक हॉकी में गोलकीपर रक्षा का निर्देशक होता है, फिर भी मैदान पर संचार और पूर्वानुमान की स्पष्ट कमी दिखी। अर्जेंटीना की टीम ‘लॉस लियोनेस’ ने भारतीय मिडफील्ड के साथ खिलवाड़ किया और अपनी मर्जी से सर्कल में प्रवेश कर त्वरित जवाबी हमले (counter-attacks) किए।

तीसरा क्वार्टर एकमात्र ऐसी अवधि थी जहाँ भारत कोई गोल नहीं खाने में सफल रहा, लेकिन यह भारतीय वापसी के बजाय अर्जेंटीना की आक्रामकता में क्षणिक कमी अधिक लग रही थी। चौथे क्वार्टर तक खेल मेहमान टीम के लिए एक अभ्यास सत्र जैसा बन गया था।

कड़े बदलावों की भारी कीमत

मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों को भले ही आलोचना का सामना करना पड़े, लेकिन हॉकी इंडिया (HI) प्रबंधन की हालिया चयन नीतियां अब गहन जांच के दायरे में हैं। प्रो लीग की तैयारी में, राष्ट्रीय महासंघ ने अनुभवी दिग्गजों को बाहर कर युवाओं को मौका देने का बड़ा दांव खेला।

पूर्व कप्तान मनप्रीत सिंह की कमी आज साफ खली। 33 वर्ष की आयु में भी मनप्रीत दुनिया के बेहतरीन प्लेमेकर्स में से एक हैं, जो खेल की गति को नियंत्रित करने की क्षमता रखते हैं। उन्हें, नियमित गोलकीपर कृष्ण बहादुर पाठक और फॉरवर्ड दिलप्रीत सिंह को टीम से बाहर करना चर्चा का विषय बना हुआ है, विशेषकर तब जब पाठक और दिलप्रीत दोनों ने पिछले महीने हॉकी इंडिया लीग (HIL) में शानदार प्रदर्शन किया था।

एक पूर्व राष्ट्रीय कोच ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “प्रो लीग जैसे उच्च दबाव वाले वातावरण में, आप रातों-रात अनुभव पैदा नहीं कर सकते। युवाओं को उन दिग्गजों के साथ तराशा जाना चाहिए जो विपरीत परिस्थितियों में उनका मार्गदर्शन कर सकें। आज मैदान पर कोई ऐसा नहीं था जो टीम को शांत रहने और फिर से संगठित होने के लिए कहे।”

क्रेग फुल्टन ने इस मुकाबले के लिए चार बदलाव किए थे और मनमीत सिंह को पदार्पण का मौका दिया, लेकिन यह उनके लिए एक ऐसा अनुभव रहा जिसे वह जल्द से जल्द भूलना चाहेंगे। परिणाम एक कड़वी सच्चाई की पुष्टि करता है: बदलाव आवश्यक है, लेकिन वर्ल्ड कप और एशियाई खेलों (जहाँ से 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का सीधा टिकट मिलता है) वाले सत्र में ऐसा करना एक बहुत बड़ा जोखिम है जो फिलहाल विफल होता दिख रहा है।

आगे की मनोवैज्ञानिक लड़ाई

इस हार का नौ-टीमीय प्रो लीग तालिका में भारत की स्थिति पर बुरा असर पड़ा है, जबकि अर्जेंटीना चौथे स्थान पर पहुंच गया है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि घरेलू मैदान पर 8-0 की हार का मनोवैज्ञानिक घाव बहुत गहरा है।

भारत के पास अपने घावों को सहलाने का समय नहीं है। उन्हें शनिवार को विश्व नंबर 2 बेल्जियम का सामना करना है और रविवार को फिर से अर्जेंटीना से भिड़ना है। फुल्टन के सामने एक टूटी हुई रक्षापंक्ति को फिर से खड़ा करने और उस कप्तान का आत्मविश्वास बहाल करने की विशाल चुनौती है, जो उम्मीदों के बोझ तले दबा हुआ नजर आ रहा है।

सब्यसाची एक अनुभवी और विचारशील संपादक हैं, जो समाचारों और समसामयिक विषयों को गहराई से समझने के लिए जाने जाते हैं। उनकी संपादकीय दृष्टि सटीकता, निष्पक्षता और सार्थक संवाद पर केंद्रित है। सब्यसाची का मानना है कि संपादन केवल भाषा सुधारने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि विचारों को सही दिशा देने की कला है। वे प्रत्येक लेख और रिपोर्ट को इस तरह से गढ़ते हैं कि पाठकों तक न केवल सूचना पहुँचे, बल्कि उसका सामाजिक प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखे। उन्होंने विभिन्न विषयों—राजनीति, समाज, संस्कृति, शिक्षा और पर्यावरण—पर संतुलित संपादकीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उनके संपादन के माध्यम से समाचार टुडे में सामग्री और भी प्रासंगिक, विश्वसनीय और प्रभावशाली बनती है। समाचार टुडे में सब्यसाची की भूमिका: संपादकीय सामग्री का चयन और परिष्करण समाचारों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता सुनिश्चित करना लेखकों को मार्गदर्शन और संपादकीय दिशा प्रदान करना रुचियाँ: लेखन, साहित्य, समसामयिक अध्ययन, और विचार विमर्श।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © 2017-2026 SamacharToday.