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चॉल से ₹70,000 करोड़ का साम्राज्य: ‘वायर किंग’ इंदर जयसिंघानी की प्रेरणादायक कहानी

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SamacharToday.co.in - चॉल से ₹70,000 करोड़ का साम्राज्य 'वायर किंग' इंदर जयसिंघानी की प्रेरणादायक कहानी - Image Credited by The Daily Jagran

दक्षिण मुंबई के लोहार चॉल की भीड़भाड़ वाली गलियों में, जो बिजली के सामानों का सदियों पुराना केंद्र है, कभी एक 15 साल का लड़का एक छोटी सी दुकान के काउंटर के पीछे खड़ा था। पिता के अचानक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उस किशोर के कंधों पर थी। आज वही लड़का, इंदर जयसिंघानी, एक प्रीमियम कॉरपोरेट टावर की 21वीं मंजिल से पॉलीकैब इंडिया के ₹70,000 करोड़ के साम्राज्य का संचालन करता है।

स्कूल छोड़ने वाले एक किशोर से भारत के निर्विवाद ‘वायर किंग’ बनने तक का जयसिंघानी का सफर संघर्ष और सफलता की एक मिसाल है। 2025 के अंत तक, ब्लूमबर्ग और फोर्ब्स के आंकड़ों के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 8.5 बिलियन डॉलर (₹71,000 करोड़) तक पहुंच गई है, जो उन्हें भारत के सबसे सफल स्व-निर्मित अरबपतियों में से एक बनाती है।

संघर्ष की आग में तपा बचपन

एक साधारण परिवार में जन्मे जयसिंघानी का बचपन मुंबई की चॉल की तंगहाली में बीता। 1968 में उनके जीवन में तब बड़ा बदलाव आया जब उनके पिता का निधन हो गया। गरीबी की मार और परिवार की जिम्मेदारी के बीच, 15 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल छोड़ने का कठिन निर्णय लिया और पिता की दुकान ‘सिंध इलेक्ट्रिक स्टोर्स’ की कमान संभाली।

व्यापार के बजाय, जयसिंघानी के पास निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) में जाने का दृष्टिकोण था। उन्होंने महसूस किया कि एक स्थायी विरासत बनाने के लिए उन्हें केवल बिचौलिए बने रहने के बजाय निर्माता बनना होगा। उन शुरुआती दिनों को याद करते हुए, जयसिंघानी ने एक साक्षात्कार में कहा था:

“स्थायी सफलता स्पष्ट दृष्टिकोण, नवाचार और गुणवत्ता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पर टिकी होती है। हमने शुरुआत में ही समझ लिया था कि ग्राहकों के लिए विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और स्थानीय बाजार से आगे बढ़ने के लिए उत्पादन पर नियंत्रण रखना महत्वपूर्ण है।”

साम्राज्य का निर्माण: 1975-2025

1975 में, अपने भाइयों के साथ मिलकर, जयसिंघानी ने ठाकुर इंडस्ट्रीज की स्थापना की। यही कंपनी 1983 में पॉलीकैब इंडस्ट्रीज के रूप में विकसित हुई।

कंपनी की वृद्धि की रफ्तार बेमिसाल रही है:

  • 1996: पॉलीकैब वायर्स प्राइवेट लिमिटेड का गठन।

  • 1998: दमन में प्लांट की स्थापना, ऑप्टिकल फाइबर और टेलीफोन केबल में विस्तार।

  • 2006: ₹1,000 करोड़ के राजस्व का आंकड़ा पार किया।

  • 2013: एफएमईजी (FMEG) क्षेत्र में कदम रखा, पंखे, एलईडी लाइट और स्विच लॉन्च किए।

  • 2019: शेयर बाजार में ब्लॉकबस्टर लिस्टिंग हुई, जिसका आईपीओ 52 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

आज, पॉलीकैब के पास भारत भर में 28 विनिर्माण संयंत्र हैं और संगठित वायर एवं केबल बाजार में इसकी 26-27% हिस्सेदारी है।

प्रतिस्पर्धा का नया दौर: अदानी और बिड़ला की एंट्री

जयसिंघानी ने दशकों तक इस क्षेत्र में राज किया है, लेकिन 2025 उनके लिए नई चुनौतियां लेकर आया है। भारत के दो सबसे बड़े औद्योगिक समूहों ने उनके वर्चस्व को चुनौती दी है।

मार्च 2025 में, अदानी ग्रुप ने अपनी सहायक कंपनी के माध्यम से ‘प्रणीता इकोकेबल्स लिमिटेड’ लॉन्च की। वहीं, आदित्य बिड़ला ग्रुप ने अल्ट्राटेक सीमेंट के जरिए गुजरात में एक प्लांट स्थापित करने के लिए ₹1,800 करोड़ का निवेश किया है। इन चुनौतियों के बावजूद, पॉलीकैब पीछे हटने को तैयार नहीं है और अगले पांच वर्षों के लिए ₹6,000–₹8,000 करोड़ के निवेश के साथ अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए आक्रामक योजना बना रही है।

अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। समाचार टुडे में अनूप कुमार की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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