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जियो का महा-धमाका: मॉर्गन स्टेनली और गोल्डमैन सैक्स करेंगे भारत के सबसे बड़े IPO का नेतृत्व
मुंबई – भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में “मदर ऑफ ऑल IPO” कहे जा रहे जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड (Jio Platforms Ltd.) के लिस्टिंग की तैयारी अब अपने अंतिम चरण में है। रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) की इस डिजिटल इकाई ने अपने मेगा IPO के प्रबंधन के लिए वैश्विक दिग्गज मॉर्गन स्टेनली और गोल्डमैन सैक्स को मुख्य बैंकर के रूप में चुना है। रिपोर्टों के अनुसार, इस IPO के जरिए जियो की वैल्यूएशन 133 अरब डॉलर से 182 अरब डॉलर (लगभग ₹15.3 लाख करोड़) के बीच आंकी जा रही है।
2026 की पहली छमाही में आने वाला यह IPO मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए वैल्यू-अनलॉकिंग (मूल्य खोज) की दिशा में सबसे बड़ा कदम होगा। सूत्रों के अनुसार, कंपनी अपना ड्राफ्ट रेड-हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है, बस उसे वित्त मंत्रालय द्वारा सेबी (SEBI) के उस नए प्रस्ताव की मंजूरी का इंतजार है, जिसमें बड़े IPO के लिए ‘पब्लिक फ्लोट’ (सार्वजनिक हिस्सेदारी) की सीमा घटाकर 2.5% करने की बात कही गई है।
नया नियम: 2.5% फ्लोट की अहमियत
जियो के IPO की सफलता काफी हद तक सेबी के नए नियमों पर टिकी है। सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि बहुत बड़ी कंपनियां अपनी कुल इक्विटी का केवल 2.5% हिस्सा बेचकर बाजार में लिस्ट हो सकती हैं, जबकि वर्तमान नियम 5% की मांग करते हैं।
इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया, “अगर कानून बदल जाता है, तो 2.5% हिस्सेदारी बेचना ही पहली पसंद होगी। इससे बाजार में एक साथ बहुत ज्यादा शेयर नहीं आएंगे और शेयरों की कीमत को लेकर निवेशकों में उत्साह बना रहेगा।”
$180 अरब के मूल्यांकन पर, 2.5% हिस्सेदारी बेचने से भी लगभग 4.5 अरब डॉलर (₹37,500 करोड़) जुटेंगे। यह 2024 में हुंडई मोटर इंडिया द्वारा जुटाए गए $3.3 अरब के रिकॉर्ड को आसानी से तोड़ देगा।
IPO का ढांचा: कौन बेचेगा अपनी हिस्सेदारी?
यह IPO नए शेयरों (Fresh Issue) और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचने (OFS) का एक मिश्रण होगा। इसके जरिए जियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और 6G जैसे भविष्य के क्षेत्रों में निवेश के लिए नई पूंजी मिलेगी, वहीं 2020 में निवेश करने वाली प्राइवेट इक्विटी फर्मों को बाहर निकलने का मौका मिलेगा।
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इनकी हिस्सेदारी घटेगी: KKR & Co., सिल्वर लेक (Silver Lake) और विस्टा इक्विटी पार्टनर्स (Vista Equity Partners) अपनी हिस्सेदारी कम कर सकते हैं।
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रणनीतिक साझेदार: मेटा (9.99%) और गूगल (7.75%) द्वारा अपनी हिस्सेदारी बरकरार रखने की उम्मीद है, जो जियो के डिजिटल इकोसिस्टम में उनके भरोसे को दर्शाता है।
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रिलायंस का नियंत्रण: रिलायंस इंडस्ट्रीज मुख्य प्रमोटर के रूप में अपना बहुमत नियंत्रण बनाए रखेगी।
मूल्यांकन: दूरसंचार से कहीं आगे
जियो का $180 अरब का संभावित मूल्यांकन उसे भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची में शीर्ष पर ले जाएगा। यह मूल्यांकन उसकी प्रतिद्वंदी कंपनी भारती एयरटेल (₹12 लाख करोड़) से भी कहीं अधिक है।
रिलायंस जियो इंफोकॉम के रणनीति प्रमुख, अंशुमान ठाकुर ने हाल ही में कहा:
“IPO पर आंतरिक काम तेजी से चल रहा है। हम सेबी द्वारा अनुशंसित 2.5% फ्लोट के आधार पर अपनी योजना बना रहे हैं, लेकिन अंतिम प्रक्रिया सरकारी अधिसूचना मिलने के बाद ही शुरू होगी। विनियामक स्पष्टता मिलते ही हम बाजार में उतरने के लिए तैयार हैं।”
जेफरीज (Jefferies) जैसे ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि जून 2026 में होने वाली संभावित 15% टैरिफ वृद्धि और ब्रॉडबैंड सेवाओं में तेजी से जियो की कमाई में भारी उछाल आएगा, जो इस उच्च मूल्यांकन को सही ठहराता है।
जियो का डिजिटल साम्राज्य
2019 में स्थापित जियो प्लेटफॉर्म्स आज 50 करोड़ से अधिक ग्राहकों के साथ भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम और डिजिटल सेवा प्रदाता है। 2020 में कंपनी ने वैश्विक निवेशकों से $20 अरब जुटाए थे, जिससे वह कर्ज मुक्त हो गई थी। आज जियो केवल एक टेलीकॉम कंपनी नहीं है; यह Nvidia के साथ मिलकर AI इंफ्रास्ट्रक्चर बना रही है और ‘रिया’ (Riya) जैसे वॉइस असिस्टेंट और जियोक्लास जैसे उत्पादों के साथ टेक क्षेत्र में क्रांति ला रही है।
भारतीय बाजार के लिए ऐतिहासिक क्षण
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जियो की लिस्टिंग भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। यह न केवल रिलायंस के शेयरधारकों के लिए संपत्ति का निर्माण करेगी, बल्कि वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की “टेक-डेस्टिनेशन” वाली छवि को भी मजबूत करेगी।
