Business
अमेरिकी कोर्ट द्वारा ट्रंप टैरिफ खारिज, शेयर बाजार उछला
न्यूयॉर्क – अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ (आयात शुल्क) को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद शुक्रवार को वॉल स्ट्रीट में तेजी दर्ज की गई। रूढ़िवादी बहुमत वाली बेंच के 6-3 के इस फैसले ने उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों और खुदरा दिग्गजों को बड़ी राहत दी है, जो पिछले साल लागू किए गए आपातकालीन शुल्कों के बोझ तले दबे हुए थे।
बाजार के तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। एसएंडपी 500 (S&P 500) 0.69% चढ़कर 6,909.51 अंक पर बंद हुआ। टेक-केंद्रित नैस्डैक (Nasdaq) 0.90% बढ़कर 22,886.07 पर पहुंच गया, जबकि डाउ जोन्स (Dow Jones) 0.47% की बढ़त के साथ 49,625.97 पर बंद हुआ।
दिग्गज टेक और रिटेल कंपनियों ने संभाली कमान
बाजार की इस तेजी का मुख्य नेतृत्व उन बड़ी कंपनियों ने किया जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर हैं। गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) में 3.7% की उछाल आई, जबकि ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन (Amazon) में 2.6% की वृद्धि हुई। एप्पल (Apple), जिसके विदेश में बड़े विनिर्माण हित हैं, भी 1.5% मजबूत हुआ।
कोर्ट के इस फैसले से विशेष रूप से उन क्षेत्रों को लाभ हुआ जो सीधे तौर पर आयात शुल्क से प्रभावित थे। खिलौना निर्माता हैस्ब्रो (Hasbro), फर्नीचर रिटेलर वेफेयर (Wayfair) और विलियम्स-सोनोमा के शेयरों में 0.5% से 2.3% के बीच बढ़त देखी गई। टैरिफ के खिलाफ आए इस अदालती फैसले ने रिफंड (धनवापसी) के द्वार भी खोल दिए हैं। पेन-वार्टन बजट मॉडल के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, सरकार को उन हजारों कंपनियों को 175 बिलियन डॉलर से अधिक का रिफंड देना पड़ सकता है जिन्होंने प्रशासन के खिलाफ मुकदमे दायर किए थे।
‘अगले चरण’ की ओर बढ़ता बाजार
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले को “अपमानजनक” बताया, लेकिन उन्होंने तुरंत एक नई घोषणा करते हुए 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत 150 दिनों की सीमित अवधि के लिए 10% वैश्विक टैरिफ लागू करने की बात कही। हालांकि, बाजार इस नए घटनाक्रम से बेअसर दिखा, क्योंकि निवेशक इसे पिछले आपातकालीन उपायों की तुलना में अधिक अनुमानित और कानूनी रूप से सीमित मान रहे हैं।
बाजार की धारणा पर टिप्पणी करते हुए, होराइजन इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख माइक डिक्सन ने कहा: “आज कुछ अनिश्चितताएं दूर हुई हैं और हम अगले चरण की ओर बढ़ रहे हैं। निवेशकों को इस बात से राहत मिली है कि नया घोषित वैश्विक टैरिफ उम्मीद से अधिक नहीं था। कोर्ट का फैसला वह स्थिरता प्रदान करता है जिसकी बाजार को सख्त तलाश थी।”
आर्थिक चुनौतियां और आगे की राह
बाजार के उत्साह के बावजूद, व्यापक आर्थिक आंकड़े मिश्रित रहे। चौथी तिमाही में जीडीपी (GDP) विकास दर उम्मीद से अधिक धीमी रही और दिसंबर के लिए मुद्रास्फीति (Inflation) के आंकड़ों में मामूली वृद्धि देखी गई। इन आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व के अगले कदम पर ट्रेडर्स को विभाजित कर दिया है। सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार जून तक ब्याज दरों में कटौती की 50% संभावना है।
इसके अलावा, निवेशक एआई (AI) क्षेत्र के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर भी सतर्क हैं। अब सभी की निगाहें अगले बुधवार को आने वाले एनवीडिया (Nvidia) के तिमाही नतीजों पर टिकी हैं। फंड मैनेजरों के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि क्या एआई से जुड़ी कंपनियों का भारी मुनाफा उनके भारी निवेश और मूल्यांकन के अनुरूप है या नहीं।
व्यापार पर कानूनी लड़ाई
सुप्रीम कोर्ट का फैसला राष्ट्रपति द्वारा लंबी अवधि की व्यापार नीतियां बनाने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल के कानूनों के उपयोग पर केंद्रित है। अदालत ने पाया कि प्रशासन ने व्यापक आर्थिक बदलावों के लिए कांग्रेस (संसद) की निगरानी को दरकिनार कर अपने कानूनी अधिकार का उल्लंघन किया है। 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत अब प्रशासन एक ऐसे उपकरण का उपयोग कर रहा है जो अल्पावधि के आपातकाल के लिए है और बिना संसदीय मंजूरी के केवल 150 दिनों तक प्रभावी रह सकता है।
